राजगढ़ (धार): नगर के मार्केटिंग सोसाइटी मैदान में श्री महावीर हनुमान गौशाला मंदिर ट्रस्ट एवं संत रविदास समाज ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित श्रीराम कथा के आठवें दिन श्रद्धालुओं का भारी जनसैलाब उमड़ा। पांच धाम एक मुकाम माताजी मंदिर के ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज (Jyotishacharya Shri Purshottam Bhardwaj) के मुखारविंद से बह रही श्रीराम कथा की अमृत धारा में भक्त पूरी तरह सराबोर नजर आए। सोमवार को क्षेत्रीय विधायक प्रताप ग्रेवाल (MLA Pratap Grewal) ने भी कथा पांडाल पहुंचकर व्यासपीठ का पूजन किया और आरती में सम्मिलित होकर धर्मलाभ लिया।
गुरु महिमा और आत्मिक शुद्धि (Spiritual Purification) का संदेश
कथा के आठवें दिन ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज ने गुरु की महत्ता और मन की शुद्धि पर विशेष प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति गुरु की नजरों से गिर जाता है, उसके लिए जीवन में सफलता पाना अत्यंत कठिन हो जाता है। गुरु के चरणों का सानिध्य ही मनुष्य की तकदीर बदलने की शक्ति रखता है। उन्होंने जीवन में सत्संग (Satsang) की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि जब हमारा मन शुद्ध होता है, तभी हमारे विचार और वाणी में शुद्धि आती है। कथा के माध्यम से ही हमें यह समझ आती है कि जीवन में क्या देखना चाहिए, क्या सुनना चाहिए और कैसा व्यवहार करना चाहिए।
संस्कार और कुल परंपराओं का महत्व
व्यासपीठ से श्री भारद्वाज ने कहा कि हम अपने बच्चों को लाड-प्यार से बड़ा करते हैं और उन्हें कुल की रीति-रिवाज सिखाते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें धर्म की शिक्षा देने में कमी रह जाती है। माता-पिता को चाहिए कि वे स्वयं भक्ति मार्ग पर चलें ताकि उनके बच्चे भी उन संस्कारों को आत्मसात कर सकें। उन्होंने बताया कि संसार की धन-संपत्ति, पद और प्रतिष्ठा मन को कभी संतुष्ट नहीं कर सकते। मन की शांति केवल प्रभु के नाम और संकीर्तन में ही संभव है।
नशामुक्त समाज और राम नाम का नशा
प्रवचन के दौरान उन्होंने आधुनिक शादियों और समाज में व्याप्त बुराइयों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज की शादियों में लोग गलत प्रकार का नशा करके आते हैं, जिससे परिवार और समाज में केवल असंतोष फैलता है। इसके विपरीत, यदि नशा करना ही है तो राम नाम का नशा करें। राम का नाम किसी को दुखी नहीं करता, बल्कि दुखी व्यक्ति को सुखी बनाने का एकमात्र साधन है। उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में कम से कम एक कार्य निरंतर करें और वह है प्रभु का सुमिरन।
जैन संतों की तपस्या का सम्मान एवं बहुमान (Felicitation)
कथा में विशेष रूप से जैन समाज के साधु-संतों की तपस्या और उनके सिद्धांतों का वर्णन किया गया। श्री भारद्वाज ने कहा कि जैन संत त्याग और वैराग्य का जीवन जीते हैं और भगवान महावीर के 'जियो और जीने दो' (Live and Let Live) के सिद्धांत पर चलते हुए समाज को अहिंसा का मार्ग दिखाते हैं।
इस अवसर पर नवरत्न परिवार द्वारा ज्योतिषाचार्य श्री भारद्वाज को आचार्य नवरत्न सागर सुरीश्वर जी महाराज का चित्र भेंट कर शाल और श्रीफल से सम्मानित किया गया। इस दौरान नवरत्न परिवार के प्रदेश संगठन मंत्री (State Organization Secretary) नितिन जैन (चिंटू चौहान),राजगढ़ शाखा अध्यक्ष (Branch President) रोहन जैन सेंडी (MR),सुशील जैन,प्रवीण जैन (सर),हरीश जैन,ललित जैन,सचिन चोमेलावाला,वीकेन जैन,अभिषेक पारख, दिनेश गुगलिया और कल्पेश जैन सहित समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
सुविधाएं और आगामी कार्यक्रम (Upcoming Events)
भीषण गर्मी को देखते हुए आयोजन समिति ने पूरे कथा पांडाल को वातानुकूलित (Air Conditioned) बनाया है और शीतल जल की उत्तम व्यवस्था की है। कथा के समापन पर प्रतिदिन सभी भक्तों के लिए भोजन प्रसादी (Bhojan Prasadi) का प्रबंध किया जा रहा है। समिति के लक्ष्मण डामेचा ने जानकारी दी कि 12 मई को कथा का पूर्ण समापन होगा और 13 मई को इसी मैदान पर भव्य निःशुल्क सामूहिक विवाह (Mass Marriage) समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके पश्चात पूरे नगर के लिए 'नगर चौरासी' महाप्रसादी का वितरण होगा। आयोजन समिति के सदस्यों ने समस्त धर्मप्रेमी जनता से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।


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