इंदौर। इंदौर के तिलक नगर स्थित श्री राजेंद्रसूरी आराधना भवन में आयोजित भव्य जैन प्रतिष्ठा महोत्सव में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शामिल होकर श्रद्धालुओं को संबोधित किया। मुख्यमंत्री के आगमन से कार्यक्रम का उत्साह और भव्यता कई गुना बढ़ गई।
यह प्रतिष्ठा महोत्सव गच्छाधिपति आचार्य श्रीमद् विजय ऋषभचंद्रसूरीश्वरजी म.सा. की पाट परंपरा में विराजमान आचार्य श्री हितेशचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. (मोहनखेड़ा) आदि ठाणा की मंगल निश्रा में संपन्न हुआ। उनके पावन सान्निध्य और आशीर्वचनों से पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत नजर आया।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने उद्बोधन में जैन धर्म के मूल सिद्धांत—अहिंसा, सत्य, तप, संयम और सेवा—की सराहना करते हुए कहा कि ये मूल्य व्यक्ति ही नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र को सशक्त बनाते हैं। उन्होंने कहा कि जैन समाज ने देश के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास में हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में बताया कि उन्हें अल्प समय में ही आचार्य श्री हितेशचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का दूसरी बार आशीर्वाद प्राप्त करने का सौभाग्य मिला है। उन्होंने कहा कि अक्षय तृतीया के अवसर पर वे मोहनखेड़ा तीर्थ में दर्शन कर चुके हैं और अब इंदौर में पुनः उनका सान्निध्य प्राप्त हुआ है। “मोहनखेड़ा” नाम से उनका विशेष भावनात्मक जुड़ाव भी उन्होंने व्यक्त किया।
उन्होंने आयोजन की भव्यता, अनुशासन और व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए आयोजक मंडल को बधाई दी। साथ ही उन्होंने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में आध्यात्मिक चेतना को जागृत करने का महत्वपूर्ण कार्य करते हैं।
इस अवसर पर वरिष्ठ समाजसेवी मेघराज जैन, मैनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ, संस्था अध्यक्ष प्रेमकमल बागरेचा, आयोजन समिति अध्यक्ष संजय मोदी, अनूप कटारिया सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन सौरभ चोपड़ा द्वारा किया गया।
कार्यक्रम में प्रदेशभर से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। दिनभर विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, पूजन और शाम को भक्ति संध्या का आयोजन हुआ। जयपुर से आए भजन गायक राजीव विजयवर्गीय और इंदौर के देवेश जैन ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा वातावरण भक्ति और श्रद्धा में सराबोर नजर आया।
समापन अवसर पर आयोजकों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए सभी अतिथियों का सम्मान किया और कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संपन्न किया।




