राजगढ़ (धार)। राजगढ़ । नगर के श्री आदेश्वर जैन मंदिर एवं श्री शत्रुंजयावतार हेमकमल धाम की वर्षगांठ गुरुवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ मनाई गई। महोत्सव के दौरान “ओम प्रियांहतम-प्रियांहतम, ओम पुण्याहं-पुण्याहं” के गगनभेदी जयघोष से पूरा वातावरण धर्ममय हो गया। आयोजन आचार्यश्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी के शिष्य मुनिश्री पीयूषचंद्र विजयजी महाराज की पावन निश्रा में संपन्न हुआ।
महोत्सव के अंतर्गत प्रातः श्री नवरत्न आराधना भवन से ध्वजा का भव्य चल समारोह निकाला गया। लाभार्थी परिवारों ने आस्था के साथ केसरिया ध्वजाएं सिर पर धारण कीं। बैंड-बाजों पर बजते भक्ति गीतों और जयकारों के बीच शोभायात्रा नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई आदेश्वरजी मंदिर पहुंची, जहां श्री ऋषभदेव मोतीलाल ट्रस्ट मंडल के पदाधिकारियों ने अगवानी की।
मंदिर परिसर में मुनिश्री के सान्निध्य में सत्तरभेदी पूजन कराया गया। इसके पश्चात लाभार्थी परिवारों ने ध्वजा लेकर मंदिर की तीन परिक्रमा की और विधि-विधान से ध्वज दंड की पूजा-अर्चना कर शुभ मुहूर्त में पुरानी ध्वजा उतारकर नई ध्वजा फहराई। ध्वजारोहण के साथ ही श्रद्धालुओं ने उल्लासपूर्वक जयकारे लगाए।
इसी प्रकार पुराना बस स्टैंड स्थित श्री शत्रुंजयावतार हेमकमल धाम पर भी विधिपूर्वक ध्वजारोहण संपन्न हुआ। समारोह के समापन पर श्रद्धालुओं को श्रीफल की प्रभावना वितरित की गई।
ध्वजारोहण के पश्चात मुनिश्री पीयूषचंद्र विजयजी महाराज ने मांगलिक का श्रवण कराते हुए धर्मसभा को संबोधित किया। उन्होंने गुरु तत्व की महत्ता बताते हुए कहा कि गुरु के प्रति श्रद्धा और उनके बताए मार्ग पर चलने से जीव के अनेक जन्मों के दोषों का शमन होता है। अनीति से अर्जित धन कभी धर्म कार्यों में फलदायी नहीं होता, इसलिए सदैव शुद्ध आचरण अपनाना चाहिए। उन्होंने ‘अहिंसा परमो धर्म’ और ‘जियो और जीने दो’ के सिद्धांतों को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी।
इस अवसर पर वर्षीतप की उग्र साधना में लीन मुनिश्री का संघ एवं ट्रस्ट द्वारा कांबली ओढ़ाकर भावपूर्ण बहुमान भी किया गया। समारोह में समाजजन बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
यात्रा एवं आयोजन में ट्रस्ट के कार्यवाहक अध्यक्ष गौरव जैन नानासेठ, उपाध्यक्ष अनील पारख, ट्रस्टी सुशील जैन, सचिव निर्मल जैन, नितेश फर्शीवाला, मीडिया प्रभारी नितिन पारख, विनोद गुगलिया, सेंडी एमआर सहित अनेक पदाधिकारी एवं समाजजन मौजूद रहे।
समापन अवसर पर प्रतिष्ठा लाभार्थी परिवार द्वारा सकल श्रीसंघ के लिए स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की।
महोत्सव के दौरान श्री आदेश्वरजी मंदिर में 9 तथा हेमकमल धाम में 45 ध्वजाएं चढ़ाई गईं, जिससे पूरे नगर में उत्सव और श्रद्धा का माहौल बना रहा।



