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डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को संबोधित करते हुए कहा—समृद्ध किसान ही विकसित भारत की नींव, ‘किसान कल्याण वर्ष’ में अन्नदाताओं को बड़ी सौगातें

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  भोपाल | मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश की जनता के नाम एक विशेष संदेश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि मध्यप्रदेश का समृद्ध किसान ही 'विकसित भारत 2047' के निर्माण में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा। राज्य सरकार ने इस वर्ष को "किसान कल्याण वर्ष" के रूप में समर्पित किया है, जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाना और किसानों के जीवन में खुशहाली लाना है। मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में "सच्चा वादा और पक्का काम" के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सरकार ने किसानों से किया हर वादा प्राथमिकता के साथ पूरा किया है।

गेहूं उपार्जन के लक्ष्य में ऐतिहासिक वृद्धि और नई व्यवस्थाएं

  किसानों के हित में एक बड़ा निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि प्रदेश में गेहूं उत्पादन के रिकॉर्ड को देखते हुए केंद्र सरकार के सहयोग से उपार्जन का लक्ष्य 78 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर अब 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। यह 22 लाख मीट्रिक टन की बड़ी बढ़ोत्तरी किसानों की आय सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। इसके साथ ही, किसानों की सुविधा के लिए अब गेहूं की खरीदी सप्ताह में 6 दिन की जाएगी और शनिवार को भी अवकाश नहीं रहेगा। स्लॉट बुकिंग की तारीख को भी 30 अप्रैल से बढ़ाकर अब 9 मई तक कर दिया गया है, जिससे अंतिम छोर का किसान भी अपनी फसल आसानी से बेच सके।

भू-अर्जन पर 4 गुना मुआवजा और फसलों पर विशेष बोनस

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने किसानों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर एक और ऐतिहासिक कदम की जानकारी दी। अब किसानों को उनकी अधिग्रहित भूमि के बदले 4 गुना तक मुआवजा दिया जाएगा, जो उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में बड़ा फैसला है। केवल इतना ही नहीं, सरकार ने दलहन और तिलहन फसलों को बढ़ावा देने के लिए उड़द की खरीदी पर समर्थन मूल्य के अतिरिक्त 600 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देने का निर्णय लिया है। सरसों के उत्पादन में भी भावांतर योजना के सफल क्रियान्वयन से किसानों को बाजार में एमएसपी से अधिक दाम मिल रहे हैं।

सिंचाई के लिए दिन में बिजली और सौर ऊर्जा पर जोर

  प्रदेश के अन्नदाताओं को रात की परेशानियों से मुक्ति दिलाने के लिए सरकार अब रात के बजाय दिन में ही सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रही है। 'किसान कल्याण वर्ष' के अंतर्गत मात्र 5 रुपये में कृषि पंप कनेक्शन दिए जा रहे हैं। साथ ही, कृषक मित्र योजना के माध्यम से किसानों को 90 प्रतिशत सब्सिडी पर सोलर सिंचाई पंप उपलब्ध कराए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि इन प्रयासों से मध्यप्रदेश का किसान बिजली के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा और खेती की लागत में भी कमी आएगी।

मध्यप्रदेश को 'मिल्क कैपिटल' बनाने का लक्ष्य

  खेती के साथ-साथ पशुपालन को लाभ का धंधा बनाने के लिए राज्य सरकार प्रदेश को देश की 'मिल्क कैपिटल' के रूप में विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई 1752 दुग्ध समितियों के गठन के बाद प्रतिदिन का दूध संकलन 10 लाख किलोग्राम के पार पहुंच गया है। दुग्ध उत्पादक किसानों को अब प्रति किलो 8 से 10 रुपये अधिक दाम मिल रहे हैं, जिसके फलस्वरूप अब तक 1600 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। यह क्रांति न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।

उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता और आधुनिक वितरण प्रणाली

  वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों के लिए खाद और उर्वरक की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की है। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि प्रदेश में 5.90 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। वितरण प्रणाली को आधुनिक और पारदर्शी बनाते हुए ऐसी व्यवस्था की गई है कि किसानों को बिना लंबी कतारों में लगे, उनके मनचाहे स्थान से खाद मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंत में भावुक अपील करते हुए कहा कि पूरा मध्यप्रदेश उनका परिवार है और वे हर परिस्थिति में आखिरी दम तक किसानों के साथ खड़े रहेंगे।

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