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राजगढ़ में मुनि श्री पीयूषचन्द्र विजयजी का भव्य मंगल प्रवेश: गुरु के बिना ज्ञान संभव नहीं,अहिंसा ही धर्म का सच्चा मार्ग







 




  राजगढ़ (धार)। मोहनखेड़ा महातीर्थ विकास प्रेरक आचार्य प्रवर श्रीमद्विजय ऋषभचन्द सूरीश्वरजी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य, राजगढ़ नंदन और सप्तम वर्षीतप के तपस्वी मुनिराज श्री पीयूषचन्द्र विजयजी महाराज साहेब का राजगढ़ नगर में अत्यंत भव्य और मंगलमय प्रवेश संपन्न हुआ। मुनि श्री की अगवानी प्रातः काल हेमकमल धाम मंदिर (पुराना बस स्टैंड) से की गई, जहाँ समाज के प्रबुद्धजनों अशोक भंडारी, संदीप खजांची, राजेंद्र बाफना, संजय पुराणी, सुनील चत्तर, राजेश फरबदा, नीलेश पुराणी, दिलीप मेहता, सुनील फरबदा, सुरेश मालवी, सुनील छजलानी, पप्पू गादिया ,महेंद्र मोदी और राजेंद्र भंडारी, शैलेष जैन,नीलेश सराफ,संदीप जैन पारस गादिया आदि ने उपस्थित होकर मुनि श्री का आत्मीय स्वागत और वंदन किया।
    
  नगर प्रवेश के पश्चात राजेंद्र भवन में मुनि श्री की महिला मंडल ने आगवानी कर गहुली की जिसके पश्चात धर्मसभा जिसमें मुनि श्री पीयूषचन्द्र विजयजी ने सारगर्भित उद्बोधन देते हुए कहा कि जीवन में संत और गुरु का होना अनिवार्य है क्योंकि गुरु ही हमें सही बोध कराते हैं। उन्होंने समाज को आईना दिखाते हुए कहा कि आज लोग सांप से तो डरते हैं, लेकिन पाप करने से नहीं डरते, जबकि पाप का भय ही मनुष्य को सन्मार्ग पर रखता है। जैन धर्म की मूल भावना अहिंसा और शांति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने संवाद के महत्व को समझाया और कहा कि जीवन में संवाद आवश्यक है, अन्यथा विवादों में वृद्धि होती है। इस पावन अवसर पर मुनि श्री के वर्षीतप के उपलक्ष्य में राजेंद्र भवन में चौबीसी का भव्य आयोजन भी हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में समाज की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता कर धर्म लाभ लिया। मुनि श्री पीयूष चंद्र विजयजी मसा का बुधवार को मोहनखेड़ा तीर्थ सुबह विहार करेंगे ।
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