नई दिल्ली : प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज 9वें 'परीक्षा पे चर्चा' (PPC 2026) के दौरान छात्रों के साथ एक ऐतिहासिक और अनौपचारिक संवाद किया। उन्होंने दिल्ली स्थित अपने आवास पर छात्रों के साथ समय बिताया और उनके जीवन, करियर और परीक्षाओं से जुड़े हर छोटे-बड़े सवाल का जवाब दिया।
यहाँ प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए सभी प्रमुख बिंदु और पूरी बातचीत विस्तार से दी गई है:
प्रमुख मंत्र: एक नजर में
स्वयं के प्रति सच्चे रहें: सबकी सलाह सुनें, लेकिन बदलाव तभी करें जब आप चाहें।
लक्ष्य की परिभाषा: लक्ष्य पहुंच के भीतर होने चाहिए, लेकिन आसानी से हासिल होने वाले नहीं।
सीखने का क्रम: पहले मन विकसित करें, फिर उसे जोड़ें और फिर विषयों को व्यवस्थित करें।
संतुलन ही कुंजी है: पढ़ाई, कौशल, आराम और शौक के बीच तालमेल बिठाएं।
वर्तमान में जिएं: वर्तमान ईश्वर का 'उपहार' (Present) है; यहीं और अभी जीना सीखें।
सपना देखना: सपना न देखना अपराध है, हमेशा बड़े सपने देखें और कम डरें।
बातचीत के मुख्य अंश (विस्तार से)
1. आपकी शैली, आपकी गति
गुजरात के एक छात्र के भ्रम को दूर करते हुए पीएम ने कहा कि जिस तरह हर किसी के खाने का तरीका अलग होता है, वैसे ही पढ़ने की अपनी लय होती है। उन्होंने जोर दिया कि अपनी पद्धति पर भरोसा रखें। सुझावों को सुनें, लेकिन सुधार अपने व्यक्तिगत अनुभव से करें।
2. शिक्षकों के लिए 'एक कदम आगे' की नीति
पीएम ने कहा कि शिक्षकों को अपनी गति छात्रों से बस एक कदम आगे रखनी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि अध्यायों की घोषणा पहले से कर दें ताकि छात्रों में जिज्ञासा पैदा हो। जब छात्र पहले से थोड़ा पढ़कर आएंगे, तो उनकी समझ गहरी होगी और वे कभी पीछे नहीं छूटेंगे।
3. कौशल बनाम अंक (Skill vs Marks)
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि शिक्षा और कौशल जुड़वां भाई-बहन हैं। व्यावसायिक कौशल के लिए निरंतर अभ्यास जरूरी है। उन्होंने उदाहरण दिया कि केवल किताबों से कोई डॉक्टर नहीं बनता, वास्तविक कौशल रोगियों के साथ काम करने से आता है।
4. अंकों के बोझ से मुक्ति
मणिपुर के एक छात्र के सवाल पर पीएम ने कहा कि अंक अंतिम लक्ष्य नहीं हैं। उन्होंने पूछा—"क्या आपको पिछले साल के टॉपर का नाम याद है?" जब जवाब 'नहीं' मिला, तो उन्होंने समझाया कि अंकों का महत्व बहुत कम समय के लिए होता है, जबकि सर्वांगीण विकास जीवन भर काम आता है।
5. गेमिंग और रचनात्मकता
गेमिंग में करियर बनाने की इच्छा रखने वाले छात्रों को पीएम ने प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि भारतीय कथाओं (पंचतंत्र आदि) पर आधारित गेम बनाएं। उन्होंने गेमिंग में जुए के प्रति आगाह किया और इसे एक रचनात्मक कौशल के रूप में अपनाने की सलाह दी।
6. समय और आत्मविश्वास का प्रबंधन
समय का सदुपयोग: सोने से पहले डायरी में अगले दिन के काम लिखें। इससे तनाव और थकान दूर होती है।
आत्मविश्वास: यह आंतरिक सत्य से आता है। जब आप अपनी खूबियों का जश्न मनाते हैं, तो डर अपने आप खत्म हो जाता है।
परीक्षा का तनाव: प्रश्नपत्र शुरू करने से पहले 30 सेकंड का विराम लें और गहरी सांसें लें।
7. शोर और मुश्किलों के बीच पढ़ाई
शोर के बीच पढ़ने की चुनौती पर पीएम ने संघर्ष की कहानियाँ साझा कीं। उन्होंने कहा कि आराम से जीवन को आकार नहीं मिलता, बल्कि मुश्किल परिस्थितियाँ ही हमें मजबूत बनाती हैं।
विकसित भारत 2047: युवाओं का संकल्प
प्रधानमंत्री ने छात्रों को 2047 के 'विकसित भारत' का सारथी बताया। उन्होंने 5 प्रमुख कार्यों पर जोर दिया:
स्वदेशी अपनाएं: घर की विदेशी वस्तुओं को भारतीय विकल्पों से बदलें।
स्वच्छता: इसे अपना कर्तव्य समझें और कूड़ा न फैलाने का संकल्प लें।
स्वास्थ्य: अपनी फिटनेस का ध्यान रखना भी राष्ट्र सेवा है।
एआई (AI) का सही उपयोग: एआई को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि ज्ञान बढ़ाने का जरिया बनाएं।
कर्तव्य पालन: समय की पाबंदी और अनुशासन को जीवन का हिस्सा बनाएं।
समापन संदेश
प्रधानमंत्री ने छात्रों द्वारा भेंट की गई जैविक चाय, बांसुरी वादन और कविताओं की सराहना की। उन्होंने सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि परीक्षाएं त्योहार हैं, इनका उत्सव मनाएं।
विशेष सूचना: अगला एपिसोड 9 फरवरी, 2026 को सुबह 10 बजे प्रसारित होगा।




