नई दिल्ली, दिनांक 16 फरवरी 2026:
भारत में दंत चिकित्सा क्षेत्र के लिए एक स्वतंत्र और समर्पित बीमा पॉलिसी लागू करने की दिशा में केंद्र सरकार के स्तर पर महत्वपूर्ण पहल शुरू हो गई है। इंडियन डेंटल एसोसिएशन के सदस्य तथा केंद्र सरकार की विभिन्न सलाहकार समितियों में कार्य कर चुके डॉ. आदित्य पतकराव के निरंतर प्रयासों को संज्ञान में लेते हुए Dental Council of India (DCI) ने Insurance Regulatory and Development Authority of India (IRDAI) को इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही प्रारंभ करने हेतु आधिकारिक पत्र प्रेषित किया है।
दंत उपचारों पर बढ़ता खर्च, आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ तथा दंत स्वास्थ्य के लिए सीमित बीमा कवरेज की पृष्ठभूमि में डॉ. पतकराव ने वर्ष 2024 में ओम बिरला से मुलाकात कर इस विषय की तात्कालिक आवश्यकता को रेखांकित किया था। इसके बाद इस विषय को राष्ट्रीय स्तर पर गति मिली और संबंधित मंत्रालयों तथा नियामक संस्थाओं के साथ अनुवर्ती कार्रवाई प्रारंभ हुई।
दिनांक 15 सितंबर 2025 को डॉ. आदित्य पतकराव ने भारत सरकार के समक्ष दंत बीमा संबंधी औपचारिक अभ्यावेदन प्रस्तुत किया। इसके पश्चात 10 नवंबर 2025 को केंद्र सरकार ने यह मामला डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया को आगे की कार्रवाई हेतु प्रेषित किया। 8 जनवरी 2026 को DCI की ‘अधिनियम एवं विनियमन उपसमिति’ ने प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा कर सकारात्मक अनुशंसा की। तत्पश्चात 21 जनवरी 2026 को DCI की कार्यकारी समिति ने इस अनुशंसा को औपचारिक स्वीकृति प्रदान की।
इन सभी प्रक्रियाओं के बाद 16 फरवरी 2026 को जावक क्रमांक No. DCI/ARPM/Regulation/Gen/Gen/130/2025-26/2026/10208 के अंतर्गत डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया के संयुक्त सचिव डॉ. अभिषेक सिंह ने IRDAI के अध्यक्ष श्री अजय सेठ को आधिकारिक पत्र भेजकर दंत उपचारों के लिए स्वतंत्र बीमा पॉलिसी विकसित करने हेतु सकारात्मक कार्यवाही करने का अनुरोध किया है। इससे अब बीमा कंपनियों के लिए दंत उपचारों हेतु विशेष स्वास्थ्य बीमा योजनाएँ विकसित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. आदित्य पतकराव ने कहा,
“2024 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिर्ला जी के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुआ यह प्रयास आज एक महत्वपूर्ण चरण पर पहुंचा है। रूट कैनाल, इम्प्लांट्स तथा अन्य महंगे दंत उपचारों के लिए आम नागरिकों को बीमा संरक्षण मिलना समय की आवश्यकता है।
डेंटल कैरीज (दांतों में कीड़ा लगना) को विश्व का सबसे सामान्य रोग माना जाता है। इसलिए मौखिक स्वास्थ्य को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। समय पर उपचार न कराने पर दांतों में कीड़ा बढ़ सकता है, दर्द हो सकता है और आगे चलकर गंभीर संक्रमण भी हो सकता है। हाल के शोध से यह भी सिद्ध हुआ है कि मुंह में होने वाले जीवाणु संक्रमण, दंत कैरीज तथा मसूड़ों के बैक्टीरिया केवल दांतों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकते हैं। मसूड़ों के रोग और मौखिक संक्रमण का संबंध हृदय रोग, मधुमेह, श्वसन संबंधी बीमारियों तथा गर्भावस्था की कुछ जटिलताओं से भी पाया गया है। इसलिए नियमित ब्रश करना, फ्लॉस का उपयोग, समय-समय पर दंत जांच और मौखिक स्वच्छता बनाए रखना समग्र शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। ‘स्वस्थ मुंह, स्वस्थ शरीर’ की अवधारणा आज और अधिक स्पष्ट हो रही है।
दंत बीमा संरक्षण के इस निर्णय से दंत स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और मरीजों को आर्थिक राहत मिलेगी।”
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि स्वतंत्र दंत बीमा पॉलिसी लागू होती है तो महंगे उपचार मध्यम वर्ग के लिए सुलभ हो सकेंगे। बीमा कवरेज के कारण मरीज समय पर उपचार कराने के लिए प्रेरित होंगे, जिससे देश के समग्र दंत स्वास्थ्य में सुधार होगा। साथ ही दंत चिकित्सकों को भी उपचार के दायरे का विस्तार करने तथा आधुनिक तकनीकों का अधिक प्रभावी उपयोग करने में प्रोत्साहन मिलेगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र, विशेषकर दंत चिकित्सा क्षेत्र में, यह निर्णय नीतिगत दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसे भविष्य में अधिक समावेशी और व्यापक स्वास्थ्य बीमा व्यवस्था की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम के रूप में देखा जा रहा है।



