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मध्यप्रदेश के वन,वनोपज और वन्य-प्राणी प्रदेश की पहचान : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव




 

  भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश में वन संपदा एवं वन्य जीवों का संरक्षण करते हुए राज्य सरकार निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आयुर्वेद को बढ़ाया और स्वयं अपनाया भी है। भारतीय संस्कृति में वन एवं पेड़ों के संरक्षण की परंपरा रही है। भोपाल में आयोजित 11वें अंतरराष्ट्रीय वन मेला इसे आगे बढ़ा रहा है। वन मेले का पूरे प्रदेश को इंतजार रहता है। यहां आयुर्वेदिक उत्पादों के 350 से अधिक स्टॉल्स लगाए गए हैं। साथ ही यहां 80 आयुर्वेदिक डॉक्टर एवं 100 से अधिक वैद्य आमजन को निःशुल्क परामर्श देंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को लाल परेड ग्राउंड में 17 से 23 दिसंबर तक आयोजित हो रहे अंतर्राष्ट्रीय वन मेले के शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष वन मेले का आयोजन "समृद्ध वन , खुशहाल जन'' की थीम पर किया गया है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 11वें अंतरराष्ट्रीय वन मेले का दीप प्रज्ज्वलन एवं फीता काटकर शुभारंभ किया। उन्होंने भगवान धनवंतरि की पूजा-अर्चना की एवं विंध्या हर्बल सहित विभिन्न स्टॉल का अवलोकन कर औषधि एवं हर्बल उत्पादों की जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव को रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लघु वनोपज को प्रोत्साहित करने वाले गीत 'लघु वनोपज हमारी शान' का विमोचन किया। साथ ही उन्होंने विंध्या हर्बल के नए लोगो एवं विभिन्न उत्पादों से सुसज्जित वेलनेस किट का औपचारिक विमोचन भी किया।














  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज लघु वनोपज के अनेक उत्पाद बाजार में उपलब्ध हैं। जब एलोपैथिक दवाएं आराम न दे तो लोग आयुर्वेद की शरण में जाते हैं। हमारे घर-घर में आयुर्वेदिक नुस्खों का भंडार है। वर्तमान परिदृश्य में मेडिकल साइंस तो प्रशंसनीय है लेकिन आयुर्वेदिक उत्पादों का भी अपना अलग महत्व है। कोरोनाकाल में आयुर्वेदिक काढ़ा दुनिया के लिए अमृत के समान था। हमारी सरकार भी आयुर्वेद चिकित्सा एवं योग को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य कर रही है। प्रदेश में पहले केवल 7 शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय थे, पिछले एक साल में हमने 8 नए शासकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय खोले गये है।

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार प्राथमिक वनोपज सहकारी समितियों, जिला यूनियनों एवं अनुसूचित जाति-जनजाति, पिछड़ा वर्ग को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है। तेंदुपत्ता सहित अन्य वनोपज का संग्रहण करने वालों को इन पर बोनस देकर आर्थिक रूप से सशक्त करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। प्रदेश सरकार ने ट्राईफेड के माध्यम से 32 लघु वनोपज के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 25 प्रतिशत की वृद्धि की जा रही है। प्रदेश सरकार वन्य जीवों के संरक्षण की दिशा में कार्य करते हुए राष्ट्रीय उद्यानों एवं अभयारण्य की संख्या बढ़ा रही है। वर्ष 2026 में रानी दुर्गावती के नाम पर बनने जा रहे नौरादेही अभयारण्य में चीतों को बसाया जाएगा। मध्यप्रदेश में शीघ्र ही जंगली गैंडे और जिराफ लाये जायेंगे।  

   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन मेले में प्रदेश के जिला यूनियन, वन, वन धन केन्द्र, जड़ी-बूटी संग्राहक, उत्पादक, आयुर्वेदिक औषधि निर्माता, परम्परागत भोजन सामग्री के निर्माता एवं विक्रेतागण अपने उत्पादों का प्रदर्शन और विक्रय करेंगे। मेले में 10 शासकीय स्टॉल, 24 अन्य राज्यों के स्टॉल, 16 प्रदर्शनी के स्टॉल, 136 प्रायवेट स्टॉल, 26 फूड स्टॉल, जिनमें अलीराजपुर का दालपानिया, छिंदवाड़ा की वन रसोई, बाँधवगढ़ की गोंडी व्यंजन का स्वाद मिलेगा।

   वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री श्री दिलीप अहिरवार ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के मार्गदर्शन में वन विभाग लघु वनोपज के माध्यम से छोटे उधमियों को भी समृद्ध कर रहा है। उन्होंने कहा कि उज्जैन में भी वन मेले का आयोजन किया जायेगा। वहीं, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं प्रबंध संचालक मध्य प्रदेश राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ मर्यादित डॉ. समीता राजौरा ने कहा कि मध्यप्रदेश वन एवं वन्यजीवों के संरक्षण में देश में अग्रणी स्थान हासिल कर चुका है। वन हमारी प्राकृतिक जीवनशैली का आधार हैं। वन मेले की शुरुआत 2001 में की गई थी।

   कार्यक्रम में विधायक भगवान दास सबनानी, नगर निगम अध्यक्ष श्री किशन सूर्यवंशी, अपर मुख्य सचिव वन अशोक बर्णवाल, प्रधान मुख्य वन संरक्षण श्री व्ही.एन. अम्बाड़े सहित वन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी कर्मचारी एवं आमजन उपस्थित थे। 


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