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जमशेदपुर पहुंचे देश के कई प्रसिद्ध कलाकार, लेखकों और साहित्यकारों के बीच शुरू होने जा रहा है जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025

 

संघर्ष, कला और सृजन की कहानियों से सजा साहित्यिक मंच, पहले दिन राहगीर, भज्जू श्याम और डॉ. दामोदर खड़से अनुभव साझा करेंगे

जमशेदपुर पहुंचे देश के कई प्रसिद्ध कलाकार, लेखक और साहित्यकार, और आज से जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल की शुरुआत होने जा रही है। यह साहित्यिक आयोजन शहर को रचनात्मक विचारों, कला और संघर्ष से उपजे सृजन का मंच बनाने वाला है। देश के अलग-अलग हिस्सों से आए जाने-माने रचनाकार अपने अनुभव, विचार और जीवन यात्राओं को साझा करेंगे। फेस्टिवल में बड़ी संख्या में युवा, साहित्य प्रेमी और कला से जुड़े लोग शामिल होंगे, जिससे जमशेदपुर में साहित्यिक माहौल और भी जीवंत होने की उम्मीद है।

फेस्टिवल के पहले सत्र में चर्चित लोकगायक राहगीर, पद्मश्री से सम्मानित गोंड कलाकार भज्जू श्याम और साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखक डॉ. दामोदर खड़से मंच साझा करेंगे। तीनों की यात्राएं अलग-अलग रही हैं, लेकिन संघर्ष, संवेदनशीलता और सृजन के प्रति अटूट विश्वास उनकी कहानियों का साझा सूत्र रहेगा। वक्ता बताएंगे कि कला और साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं हैं, बल्कि जीवन की सच्चाइयों से उपजा संघर्ष और आत्मा की आवाज भी हैं।

जमशेदपुर पहुंचते ही लोकगायक राहगीर का उनके चाहने वाले गर्मजोशी से स्वागत किया। सोशल मीडिया पर वायरल गीतों से पहचान बनाने वाले राहगीर को देखने और सुनने के लिए बड़ी संख्या में प्रशंसक मौजूद होंगे। फेस्टिवल परिसर में उनकी मौजूदगी से माहौल और भी जीवंत होने वाला है। खासकर शहर के साहित्यकार और रचनाकारों ने उनसे मुलाकात किया और उनके गीतों और संघर्ष भरे रचनात्मक सफर की सराहना की।

राजस्थान के लोकगायक और गीतकार राहगीर ने अपने जीवन के उस मोड़ का जिक्र किया, जब उन्होंने एक सुरक्षित इंजीनियरिंग नौकरी छोड़कर संगीत को अपनाने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में कविताएं लिखना शुरू किया और एक दोस्त द्वारा भेजा गया गिटार उनके जीवन की दिशा बदलने वाला साबित हुआ। परिवार के विरोध और सामाजिक दबाव के बावजूद उन्होंने अपने मन की सुनी। 2016 से 2021 तक का दौर संघर्षों से भरा रहा और कोरोना काल में उन्हें दोबारा नौकरी खोजने की मजबूरी तक आ गई। इसी दौरान हिमाचल प्रदेश में बस का इंतजार करते हुए गुनगुनाया गया गीत “बस आने में देर है” सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और यहीं से उनके संगीत को नई पहचान मिली। राहगीर ने कहा कि लोगों का प्यार और भावनात्मक जुड़ाव ही उनकी सबसे बड़ी कमाई है।

पद्मश्री सम्मानित गोंड कलाकार भज्जू श्याम बताएंगे कि गोंड पेंटिंग केवल चित्रकला नहीं, बल्कि कहानियों की दृश्य भाषा है। पाटनगढ़ गांव से निकलकर उन्होंने अपनी कला के माध्यम से आदिवासी संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि अब तक वे 16 किताबें लिख चुके हैं और लंदन यात्रा सहित अपने जीवन के अनुभवों को पेंटिंग के जरिए प्रस्तुत करेंगे। उनका मानना है कि नई पीढ़ी अगर अपनी जड़ों से जुड़कर सीखेगी, तभी पारंपरिक कलाएं जीवित रह पाएंगी।

साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित लेखक डॉ. दामोदर खड़से कहेंगे कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज को आईना दिखाना भी है। वह अपनी पुस्तक ‘काला सूरज’ का जिक्र करेंगे, जो पत्रकारों के जीवन और सिस्टम की जटिलताओं को उजागर करती है। उनके उपन्यास ‘भगदड़’ में गांव से शहर तक के संघर्ष को दिखाया गया है, जबकि हालिया कृति ‘बादल रात’ महिलाओं की प्रगति, संघर्ष और आत्मनिर्भरता की कहानी कहती है। डॉ. खड़से के अनुसार, वही साहित्य सार्थक है जो समाज की सच्चाइयों से संवाद करे।

आयोजकों के अनुसार, जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल आज 20 से 21 तक चलेगा, जिसमें देश के कई प्रसिद्ध लेखक, कलाकार और सांस्कृतिक दिग्गज शामिल होंगे। यह आयोजन जमशेदपुर को राष्ट्रीय स्तर पर साहित्यिक पहचान दिलाने के साथ-साथ युवाओं को रचनात्मक सोच और अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित करेगा।

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