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"जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025" साहित्य, विचारों और संवादों की अनोखी यात्रा के लिए 30 नवंबर तक पंजीकरण, ऑनलाइन प्रक्रिया उपलब्ध

 

जमशेदपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025 इस वर्ष अपने एक नए और रचनात्मक स्वरूप के कारण विशेष चर्चा में है। आयोजन समिति का कहना है कि यह फेस्टिवल केवल दो दिनों का साधारण आयोजन नहीं, बल्कि एक ऐसी निरंतर सृजन-यात्रा रहेगा जिसमें संवाद, विचार और अनुभवों को संजोकर एक स्थायी दस्तावेज़ तैयार किया जाएगा। कार्यक्रम के उपरांत “संवादों से सृजन तक” शीर्षक से एक विशेष स्मारिका प्रकाशित होगी, जिसमें फेस्टिवल के दौरान हुए प्रमुख विचार-विमर्श, वक्ताओं के लेखकीय दृष्टिकोण, चयनित टिप्पणियाँ, प्रतिभागियों के अनुभव और दोनों दिनों की प्रमुख झलकियाँ शामिल की जाएँगी। यह स्मारिका साहित्य, भाषा, समाज, कला और समकालीन सोच की विविध धाराओं का एक महत्वपूर्ण संग्रह होगी।

समिति ने बताया कि फेस्टिवल उन सभी लोगों के लिए खुला है जो साहित्य, लेखन, संवाद-संरचना या रचनात्मक वातावरण के प्रति रुचि रखते हैं। इस आयोजन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर व्यक्ति की उपस्थिति और उसकी अभिव्यक्ति इस सामूहिक सृजन का हिस्सा बने। चाहे कोई विचार साझा करे, चर्चा में शामिल हो या सिर्फ़ सुनने आए, हर रूप में भागीदारी फेस्टिवल को और समृद्ध बनाती है।

आयोजन समिति ने पंजीकरण और प्रवेश से संबंधित जानकारी भी स्पष्ट और सकारात्मक रूप में साझा की है। जो प्रतिभागी औपचारिक रूप से पंजीकरण करवाना चाहते हैं, उनके लिए दो दिनों का शुल्क 1000 रुपये निर्धारित है। जो छात्र पंजीकरण करवाना चाहते हैं, उनके लिए दोनों दिनों का शुल्क 500 रुपये निर्धारित है। पंजीकरण कराने वाले प्रतिभागियों को किट, आईडी कार्ड, पार्टिसिपेशन सर्टिफिकेट और दोनों दिनों का लंच कूपन प्रदान किया जाएगा। इच्छुक प्रतिभागी 30 नवंबर से पहले ऑनलाइन फॉर्म के माध्यम से अपना पंजीकरण पूरा कर सकते हैं। समिति ने बताया कि पंजीकरण प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने के लिए एक ऑनलाइन लिंक उपलब्ध कराया गया है, जिसके माध्यम से कोई भी आसानी से अपना नाम दर्ज कर सकता है:

रजिस्ट्रेशन फॉर्म भरने के लिए यहां क्लिक करें

साथ ही समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति बिना पंजीकरण करवाए केवल सत्रों को अटेंड करना चाहता है, तो उसका भी पूर्ण रूप से स्वागत है। ऐसे आगंतुक बिना किसी शुल्क के आकर सभी सत्रों का आनंद ले सकते हैं। उनका उद्देश्य यह है कि साहित्य और संवाद की दुनिया हर उस व्यक्ति तक पहुँचे जो सीखना, सुनना या अनुभव करना चाहता है। समिति का मानना है कि फेस्टिवल सभी का है पंजीकृत प्रतिभागी हों या केवल दर्शक-हर उपस्थिति इस आयोजन को और प्रभावशाली बनाती है।

आयोजन टीम ने अंत में यह भी कहा कि यदि किसी जानकारी में कोई त्रुटि रह जाए या किसी प्रतिभागी के पास कोई सुझाव हो, तो वे इसे सदैव स्वागतयोग्य मानते हैं। उनका कहना है कि यह फेस्टिवल एक सामूहिक सृजन है, और इसमें शामिल हर व्यक्ति आने वाले वर्षों तक याद किए जाने वाले इस दस्तावेज़ का अभिन्न हिस्सा बनेगा।

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