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पीएम मोदी की 'मन की बात': छठ महापर्व का उल्लास,'वन्देमातरम्' के 150 वर्ष और स्वदेशी की बढ़ती ताकत




 

   नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 अक्टूबर 2025 को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' की 127वीं कड़ी में देशवासियों को संबोधित किया। यह संबोधन त्योहारों के उल्लास, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रीय गौरव के विषयों पर केंद्रित रहा। प्रधानमंत्री ने 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता, सरदार पटेल के योगदान और राष्ट्रगीत 'वन्देमातरम्' की आगामी 150वीं वर्षगांठ पर विशेष रूप से प्रकाश डाला।

पर्व और उपलब्धियाँ: 'ऑपरेशन सिंदूर' और स्वदेशी का उत्साह

   प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत दीपावली और छठ महापर्व के उल्लास से की। उन्होंने छठ को संस्कृति, प्रकृति और समाज की एकता का प्रतिबिंब बताया, जहाँ समाज का हर वर्ग घाटों पर एक साथ खड़ा होता है।

  • सफलता की गूंज: पीएम मोदी ने देश की उपलब्धियों पर नागरिकों के सकारात्मक संदेशों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 'ऑपरेशन सिंदूर' ने हर भारतीय को गर्व से भर दिया है, क्योंकि माओवादी आतंक से प्रभावित रहे इलाकों में भी खुशियों के दीप जले हैं।

  • स्वदेशी और बचत: उन्होंने बाजारों में स्वदेशी सामानों की खरीदारी में आई जबरदस्त तेजी पर खुशी व्यक्त की। इसके अलावा, लोगों ने खाद्य तेल में 10 प्रतिशत की कमी के आग्रह पर सकारात्मक रुख दिखाया है, जिससे GST बचत उत्सव को लेकर भी उत्साह है।

स्वच्छता और पर्यावरण: 'गारबेज कैफे' से मैंग्रोव संरक्षण तक

प्रधानमंत्री ने स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रेरक कार्यों की सराहना की:

  • प्लास्टिक से भोजन: छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर में 'गारबेज कैफे' की अनूठी पहल को सराहा गया, जहाँ 1 किलो प्लास्टिक कचरा लाने पर भरपेट खाना मिलता है।

  • झीलों को जीवन: बेंगलुरु के इंजीनियर कपिल शर्मा की टीम ने 40 कुंओं और 6 झीलों को पुनर्जीवित किया है, जिसमें कॉर्पोरेट और स्थानीय लोग शामिल हैं।

  • मैंग्रोव का महत्व: पीएम ने समुद्री इको-सिस्टम में मैंग्रोव की अहमियत बताई, जो सुनामी और चक्रवात जैसी आपदाओं में मददगार होते हैं। उन्होंने गुजरात के धोलेरा और कच्छ में वन विभाग द्वारा चलाए जा रहे सफल मैंग्रोव पौधारोपण अभियान की सराहना की, जिसके परिणामस्वरूप क्षेत्र में डॉल्फिन और प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ी है।

  • 'एक पेड़ माँ के नाम': उन्होंने प्राचीन ग्रंथों का हवाला देते हुए देशवासियों से 'एक पेड़ माँ के नाम' अभियान को आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

राष्ट्रीय गौरव: भारतीय श्वान, सरदार पटेल और आदिवासी वीरों का सम्मान

  सुरक्षा बलों में देशी नस्ल के श्वान:

  प्रधानमंत्री ने करीब पाँच साल पहले किए गए भारतीय नस्ल के श्वानों (Dogs) को अपनाने के आग्रह की सफलता साझा की। BSF और CRPF ने अपने दस्तों में रामपुर हाउंड, मुधोल हाउंड, कोम्बाई और पांडिकोना जैसी नस्लों को शामिल किया है। उन्होंने मुधोल हाउंड 'रिया' द्वारा पुलिस ड्यूटी मीट में पहला पुरस्कार जीतने और देशी श्वान द्वारा छत्तीसगढ़ में 8 किलोग्राम विस्फोटक का पता लगाने का साहसिक उदाहरण भी दिया।

   सरदार पटेल को श्रद्धांजलि (31 अक्टूबर):

   पीएम मोदी ने 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती को विशेष अवसर बताया। उन्होंने सरदार पटेल के प्रतिभाशाली छात्र और सफल वकील होने के साथ-साथ खेड़ा और बोरसद सत्याग्रह में उनके योगदान को याद किया। उन्होंने सरदार पटेल के 'स्वच्छता और सुशासन' पर जोर देने और भारत के ब्यूरोक्रेटिक फ्रेमवर्क की मजबूत नींव रखने के लिए उन्हें नमन किया। उन्होंने देशवासियों से 'Run For Unity' में शामिल होने का आह्वान किया।

  जनजातीय वीरों का स्मरण:

  प्रधानमंत्री ने कोमरम भीम की जन्म-जयंती (22 अक्टूबर) को याद किया, जिन्होंने निज़ाम के क्रूर अत्याचारों के खिलाफ संघर्ष किया। साथ ही, उन्होंने 15 नवंबर को मनाए जाने वाले 'जनजातीय गौरव दिवस' पर भगवान बिरसा मुंडा को भी श्रद्धांजलि दी और युवाओं से इन वीरों के बारे में जानने का आग्रह किया।

संस्कृति और भाषा: कॉफी, संस्कृत और 'वन्देमातरम्' की 150वीं वर्षगांठ

  • कोरापुट कॉफी की खुशबू: प्रधानमंत्री ने ओडिशा की कोरापुट कॉफी के उत्कृष्ट स्वाद और कॉफी की खेती से लोगों के जीवन में आए 'सम्मान और समृद्धि' के सुखद बदलावों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत की कॉफी (चिकमंगलुरु, कुर्ग, वायनाड आदि) दुनिया भर में लोकप्रिय हो रही है।

  • संस्कृत को नई पहचान: पीएम ने कहा कि सोशल मीडिया की दुनिया ने संस्कृत को नई प्राणवायु दी है। उन्होंने युवा कंटेंट क्रिएटर्स जैसे यश सालुंड्के (क्रिकेटर और कंटेंट क्रिएटर), कमला और जान्हवी (अध्यात्म) और 'संस्कृत छात्रोहम्' चैनल का उल्लेख किया, जो रोचक तरीके से संस्कृत का प्रचार कर रहे हैं।

  • 'वन्देमातरम्' का उत्सव: सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक, प्रधानमंत्री ने राष्ट्रगीत 'वन्देमातरम्' की आगामी 150वीं वर्षगांठ (7 नवंबर) पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि 19वीं शताब्दी में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय जी द्वारा रचित यह गीत, माँ-भारती से प्रेम की अमूर्त भावना को साकार स्वर देता है। उन्होंने देशवासियों से #VandeMatram150 के साथ सुझाव भेजकर इस वर्षगांठ को ऐतिहासिक बनाने का आग्रह किया।

 प्रधानमंत्री ने अंत में देशवासियों को धन्यवाद देते हुए अगले महीने नए विषयों के साथ मिलने का वादा किया। उन्होंने लोगों से सेवा भावना से समाज को बदलने में जुटे व्यक्तियों और समूहों की जानकारी साझा करने का भी आग्रह किया।

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