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गुरु सप्तमी महामहोत्सव 2025 : आचार्य यतीन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का 65 वां पुण्य दिवस गुणानुवाद सभा के साथ मनाया


   राजगढ़/धार । श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी (ट्रस्ट) श्री मोहनखेडा तीर्थ के तत्वाधान में दादा गुरुदेव की पाट परम्परा के अष्ठम पट्टधर गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के पट्टा अलंकार नवम गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय हितेशचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. एवं मुनिमण्डल व साध्वी मण्डल की पावनतम निश्रा में दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की पाट परम्परा के चतुर्थ पीताम्बर विजेता व्याख्यान वाचस्पति गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय यतीन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का 65 वां पुण्य दिवस पुष्पांजलि व भावांजलि के साथ मनाया गया ।

   गुणानुवाद सभा में गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय हितेशचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. ने भावांजलि अर्पित करते हुए कहा कि चतुर्थ आचार्यदेव श्री यतीन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. ने अपने जीवन में दादा गुरुदेव की सभी आज्ञाओं का पालन करते हुए समाज व साधु-साध्वी भगवन्तों के उत्थान के लिये काफी कार्य किया है साथ ही उन्होंने अपने जीवन काल में कई साहित्यों की रचना करके हमारा मार्गदर्शन किया है। जो वर्तमान के समय में काफी सार्थक सिद्ध हो रहा है। मुनिराज श्री चन्द्रयशविजयजी म.सा. ने भावांजलि प्रकट करते हुए कहा कि आचार्यश्री का जन्म धोलपुर नगर में हुआ था। उनकी दीक्षा खाचरौद नगर में हुई थी उनके समय काल में चाहे मुनि हो, चाहे साध्वी भगवन्त हो या समाज के कोई वरिष्ठ हो उनको आचार्यश्री के पास यदि जाना हो तो जाने वाले व्यक्ति को आचार्यश्री की कलम के रुकने का और उनकी निगाहे उपर उठने तक का इन्तजार करना पड़ता था क्योंकि वे हमेशा सतत लेखन कार्य में व्यस्त रहते थे। मुनिराज श्री पुष्पेन्द्रविजयजी म.सा. ने भावांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आचार्यश्री जब भी विहार में रहते थे तब भी उनकी कलम हमेशा चलती रहती थी। उन्होंने अपने जीवन काल में विहार क्षेत्र के दौरान भी काफी लेखन कार्य किया व "मेरी विहार यात्रा" के लेखन में उन्होंने मारवाड़, गुजरात, मालवा आदि क्षेत्रों की विहार यात्रा का वर्णन करते हुए वर्तमान साधु संतों के लिये एक अच्छा साहित्य तैयार करके हमारा मार्ग दर्शन किया है। इस अवसर पर तीर्थ के मेनेजिंग ट्रस्टी सुजनमल सेठ ने कहा कि आचार्य यतीन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का मेरे जीवन में पर बाल्यकाल से बहुत प्रभाव रहा है। आचार्यश्री का जब राणापुर नगर में चातुर्मास हेतु प्रवेश होना था तब मेरे पिताश्री सागरमलजी सेठ को आचार्यश्री ने बुलवाया था और नगर वासियों को राणापुर में चातुर्मास हेतु आदेश दिया था उस वक्त मेरी उम्र मात्र 9 या 10 वर्ष थी। मैं तब से आचार्यश्री से जुड़ा हुआ हुँ जीवन की कई यादे जुड़ी हुई है। गुरु सप्तमी महामहोत्सव के अध्यक्ष कमलजी लुणिया ने भावांजलि अर्पित करते हुए कहा कि आचार्यश्री के जीवन से जुड़ी हुई कई बातों को समाजजनों के बीच में साझा किया ।

   इस अवसर पर श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी (ट्रस्ट) मण्डल की और से मेनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ, गुरु सप्तमी महोत्सव अध्यक्ष व ट्रस्टी कमलचंद लुणिया, ट्रस्टी जयंतीलाल कंकुचौपड़ा, तीर्थ महाप्रबंधक अर्जुनप्रसाद मेहता, सहप्रबंधक प्रीतेश जैन, ट्रस्ट के युवा सहयोगी अरविंद जैन, राजगढ़ श्रीसंघ के सेवन्तीलाल मोदी, राजेन्द्र खजांची, संतोष चत्तर विशेष रुप से उपस्थित रहे ।

  आज व्याख्यान वाचस्पति पिताम्बर विजेता आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय यतीन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की पुण्यतिथि मनायी गई गुरुतीज के अवसर पर राजगढ़ श्रीसंघ की और से श्रीमती लीलाबाई लालचंदजी राजेन्द्रकुमार, तेजकुमार, सुनिलकुमार गोठी खजांची परिवार द्वारा गुरुपद महापूजन का भव्य आयोजन हुआ साथ ही गोठी खजांची परिवार के द्वारा स्वामीवात्सल्य का आयोजन भी रखा गया ।

  शुक्रवार को उपाध्याय श्री मोहनविजयजी म.सा. की पुण्यतिथि मनाई जावेगी ।

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