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श्री मोहनखेड़ा तीर्थ में पर्युषण पर्व आराधना प्रारम्भ तन और मन के साथ आत्मा की शुद्धि जरुरी: साध्वी हर्षवर्धनाश्रीजी

 


   राजगढ़ / धार  | श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी (ट्रस्ट) श्री मोहनखेडा तीर्थ के तत्वाधान में पर्युषण महापर्व की आराधना गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म. सा. की आज्ञानुवर्ती साध्वी श्री सद्गुणाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा में प्रारम्भ हुई । पर्युषण पर्व के प्रथम दिन पूरे मंदिर परिसर को विधुत सज्जा के साथ सजाया गया व प्रभु श्री आदिनाथ भगवान, दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की मन मोहक अंगरचना की गई । पर्व के प्रथम दिन ही अष्टान्हिका प्रवचन प्रारम्भ हुए । वासक्षेप पूजा, केसर पूजा, स्नात्रपूजा, प्रवचन, प्रतिक्रमण आदि करके सभी आराधक आठ दिन के इस महापर्व में अपनी आत्मा को शुद्ध करने का उपक्रम कर रहे हैं ।

  अष्टान्हिका प्रवचन बोहराने का लाभ भंवरलालजी जोगाणी परिवार द्वारा लिया गया । ओटमलजी साकलचंदजी बागरा / मुम्बई वालों ने ज्ञान की पांच पुजा करने का लाभ लिया । आरती के पश्चात् साध्वी श्री संघवणश्रीजी म.सा. की शिष्या साध्वी श्री हर्षवर्धनाश्रीजी म. सा. ने प्रवचन में कहा इन आठ दिनों में पानी का उपयोगा कम से कम करें । प्रयास ऐसा हो की जीव हिंसा ना हो । अमारी प्रर्वतन का जो शास्त्रों में नियम बताया गया है उसका विशेष रुप से पालन करके विशिष्ट का उपार्जन करें । मन में राग द्वेष नहीं आने दे । अभयदान महादान माना गया है पर्व के दौरान अबोल पशुओं की जीव हिंसा पर रोक लगवाने का प्रयास करें । श्रद्धा और विनय पुर्वक प्रभु की आज्ञा का पालन करें वही सच्चा श्रावक कहलाता है । जीव हिंसा से बचने के लिये पर्युषण पर्व के दिनों में हरी सब्जी फल, फुट का सेवन नहीं करें । आत्मा की शुद्धि के लिये तप रुपी साबुन जरुरी है । तन और मन की शुद्धि के साथ आत्मा की शुद्धि जरुरी है और आत्मा की शुद्धि इन पर्व के दिनों में जप तप करके की जा सकती है । जो हर श्रावक-श्राविकाओं को करना चाहिये ।

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