जब तक शरीर स्वस्थ है धर्म आराधना करे - महासती श्री सुधाश्री जी




  राजगढ़(धार)। जिस मनुष्य जीवन को पाने के लिए देवता भी तरसते है वो दुर्लभ मानव भव आप सभी को प्राप्त हुआ है ओर ईस दुर्लभ मानव भव मे भी जैन कुल का मिलना अत्यंत दुर्लभ है जो आपको मिला है, इसलिए जब तक आपका शरीर स्वस्थ है तब तक धर्म आराधना करते रहे, युवा अवस्था मे किया गया धर्म तप बुड्ढापा तो सुधारते ही है साथ ही अगले भव के लिए लिए भी पुण्य का उपार्जन करते है, एक बार बीमारी लगी तो चाहते हुए भी आप धर्म आराधना नही कर पायेगे!  उक्त उदगार बुधवार को स्थानक भवन मे आयोजित प्रवचन सभा मे पुज्य आचार्य भगवंत श्री सरदारमुनि म.सा. की आग्यानुवर्ति पुज्य महासती श्री सुधाश्री जी म.सा के द्वारा फ़रमाये गये, महासती श्री रुचिता श्री जी म.सा के द्वारा धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा गया की परमात्मा महावीर के शासन मे हमे ऎसे ऎसे शास्त्र मिले जिनको पढ़कर मानव मोक्ष के मार्ग की ओर प्रशस्त होकर अपने भव भ्रमण को रोक सकता है, मनुष्य को भगवान बनने का अधिकार परमात्मा के द्वारा केवल जैन शासन को ही प्रदान किया गया है, प्रवचन सभा मे श्री संघ के अनेक श्रावक श्राविका बच्चो ने उपस्थित होकर जीनवाणी श्रवण का लाभ लिया ! 

  समाज के हेमंत वागरेचा ने बताया की पुज्य महासती जी आदि ठाणा 3 दीक्षा के पशचात पहली बार मंगलवार शाम को रिंगनोद से विहार कर के राजगढ स्थानक भवन पर पधारे, पुज्य महासती मंडल की आगवानी के लिए समाज के अनेक श्रावक श्राविका फ़ोरलेन चौकडी पर पहुंचे ! संघ अध्यक्ष नरेन्द्र मुणत, भेरुलाल वागरेचा के द्वारा बताया गया की महासती मंडल का विहार शुक्रवार को अहमदाबाद के लिए होगा!