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सरकार ने पीएफसी को दिया ‘महारत्न’ का सर्वोच्च सम्मान

 


  मुम्बई : भारत सरकार ने राज्य स्वामित्व की पावर फाइनैंस काॅर्पोरेशन लिमिटेड (पीएफसी) को प्रतिष्ठित ‘महारत्न’ के दर्जे से सम्मानित किया है, इसी के साथ पीएफसी को बेहतर संचालन एवं वित्तीय स्वायत्ता प्राप्त हुई है। आज वित्त मंत्रालय के तहत सार्वजनिक उद्यम विभाग द्वारा यह आदेश जारी किया गया। 1986 में निगमित पीएफसी आज सबसे बड़ी इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनैंस कंपनी है, जो विद्युत मंत्रालय के प्रशासनिक नियन्त्रण में विद्युत क्षेत्र के लिए पूरी तरह से समर्पित है।


पीएफसी को ‘महारत्न’ का सम्मान मिलने से पीएफसी बोर्ड की वित्तीय फैसले लेने की क्षमता बढ़ेगी। ‘महारत्न’ सीपीएसई का बोर्ड वित्तीय संयुक्त उद्यम और पूर्ण स्वामित्व की सब्सिडरी के लिए इक्विटी निवेश कर सकता है तथा भारत एवं विदेश में मर्जर और अधिग्रहण कर सकता है, जो संबंधित सीपीएसई के कुल मूल्य के 15 फीसदी तक और एक परियोजना के लिए रु 5000 करोड़ तक सीमित होगा। बोर्ड कर्मचारी एवं मानव संसाधन प्रबन्धन और प्रशिक्षण से संबंधित योजनाओं को भी संरचित एवं कार्यान्वित कर सकता है। वे दूसरों के साथ टेक्नोलाॅजी जाॅइन्ट वेंचर या अन्य सामरिक साझेदारियां भी कर सकते हैं।


इस अवसर पर माननीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय उर्जा मंत्री श्री आर.के सिंह ने पीएफसी को बधाई देते हुए कहा कि ‘महारत्न’ का सम्मान पीएफसी में भारत सरकार के विश्वास को दर्शाता है, इससे स्पष्ट है कि पीएफसी भारतीय विद्युत क्षेत्र के समग्र विकास में सामरिक भूमिका निभा रहा है और उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। यह नया सम्मान पीएफसी को विद्युत क्षेत्र के लिए प्र्रतिस्पर्धी वित्तीय सुविधाएं उपलब्ध कराने में सक्षम बनाएगा, जो सभी के लिए किफ़ायती एवं भरोसेमंद 24/7 विद्युत की उपलब्धता को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। महारत्न का सम्मान मिलने के बाद पीएफसी सरकार के एजेण्डा के तहत 2030 तक 40 फीसदी हरित उर्जा की राष्ट्रीय प्रतिबद्धता में योगदान देगा और रु 3 लाख करोड़ से अधिक के आउटले के साथ नई संशोधित वितरण सेक्टर योजना की प्रभावी निगरानी एवं कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेगा।


श्री आर एस ढिल्लांे, सीएमडी, पीएफसी ने कहा, ‘‘पीएफसी को पिछले 3 सालों के दौरान उत्कृष्ट वित्तीय प्रदर्शन के लिए महारत्न का सम्मान मिला है। कोविड के बावजूद पीएफसी ने वित्तीय वर्ष 2020-21 के दौरान विद्युत क्षेत्र के लिए अब तक का अधिकतम सालाना अनुमोदन एवं वितरण- रु 1.66 लाख करोड़ और रु 88,300 करोड़- दर्ज किया है और वित्तीय वर्ष में अधिकतम रु 8444 करोड़ का मुनाफ़ा दर्ज किया है। पीएफसी ने पावर सेक्टर में लिक्विडिटी संकट को दूर करने के लिए लिक्विडिटी इन्फ्यूज़न योजना (‘आत्मनिर्भर भारत योजना’) के तहत डिस्कोम्स को वित्तपोषण प्रदान कर कोविड के बीच महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।


महारत्न की शक्तियां मिलने के बाद पीएफसी अपने कारोबार के विकास को तेज़ कर अपने संचालन को विविध बनाएगा तथा अपनी क्षमता का उपयोग कर विद्युत क्षेत्र के समग्र विकास हेतु सरकार के लक्ष्यों को हासिल करने में उल्लेखनीय योगदान देगा। हम निगम के कर्मचारियों और पूर्व प्रबन्धन के प्रति आभारी हैं, जिनके सहयोग, योगदान एवं समर्पण की वजह से ही यह उल्लेखनीय उपलब्धि संभव हो पाई है। हम विद्युत मंत्रालय को भी हार्दिक धन्यवाद देते हैं, जिनके सहयोग के बिना यह सम्मान संभव नहीं था।’’

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