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पूज्य आचार्यदेव श्री ऋषभचंद्र सूरीश्वरजी म.सा. के पुण्योत्सव के समापन दिवस पर 29 अगस्त को हुई विराट गुणानुवाद सभा



 झाबुआ। स्थानीय श्री ऋषभदेव बावन जीनालय मे चातुर्मास हेतू विराजित पूज्य मुनिराज श्री रजतचन्द्र विजयजी म.सा.और पूज्य जीतचन्द्र विजयजी म.सा.की पावन निश्रा मे आज गच्छाधिपति पूज्य आचार्यदेव श्री ऋषभचन्द्र सूरीश्वरजी म.सा.की पावन स्मृति मे आयोजित पाँच दिवसीय पुण्योत्सव का गुणानुवाद सभा के साथ 29अगस्त को समापन हुआ | इस अवसर पर पू.मुनिराज श्री रजतचन्द्र विजयजी म.सा.ने कहाँ की भगवान महावीर के शासन में बहुत बड़े बड़े धर्म प्रभावक आचार्य एवं गुरु भगवंत हुए हे ,जिन्होने जिनशासन की ध्वज पताका को सम्पूर्ण विश्व मे फ़हराया हे | जैन दर्शन मे गुरु का बहुत महत्व होता हे | जितने भी धर्म हे उन सब मे गुरु की महत्वता बतायी गयी हे । गुरु को कई उपमाएं दी गयी हे । गुरु दीपक के समान होते हे जो अंधकार को हटाते हे एवं हमारे जीवन मे प्रकाश लाते हे | गुरु को सूर्य के समान तेजस्वी माना गया हे | गुरु नौका के समान हे जो भवसागर से पार कराते हे | ऐसे ही गुरु थे पूज्य आचार्य श्री ऋषभचन्द्र सुरीजी महाराजा साहेब। वे विश्वपूज्य श्रीमद्विजय राजेंद्र सूरीश्वरजी म.सा.की पाट परम्परा के 8 वें आचार्य थे | पूज्य आचार्य श्री को इसीलिए परोपकार सम्राट की उपाधि दी गयी क्योंकि वे हर व्यक्ति के दुख को तत्परता के साथ दूर करते थे | पूज्य गुरुदेव ऐसी सीढ़ी के समान थे जिस पर एक बार व्यक्ति चढ़े तो ऊँचाईयौ तक पहुँच जाने मे सक्षम हो जाता था | कोरोना महामारी के समय मोहनखेडा तीर्थ मे उन्होने कोविड अस्पताल प्रारम्भ करवाकर 250 से ज्यादा लोगो की जान बचाई | कार्यक्रम का शुभारम्भ पूज्य ऋषभचंद्र सुरीजी की गुरु वन्दना जो की पूज्य रजतचन्द्र विजयजी म.सा.ने करवायी से प्रारम्भ हुई | इसके पश्चात पूज्य आचार्य श्री ऋषभचन्द्र सूरीश्वरजी म.सा.की तस्वीर के समक्ष अक्षत श्रीफल से गहूंली और माल्यार्पण श्रीमती श्यामूबेन नवीन संतोष  मुकेश रुनवाल परिवार ने लिया | आचार्य श्री के स्फटिक रत्न चरण पादुका पर गुरु पूजन का लाभ हेमेन्द्र सूरी महिला मंडल झाबुआ ने लिया | अतिथि श्री संजय मेहता , यशवंत भंडारी , प्रदीप संघवी , प्रवीण रुनवाल , मनोहर भंडारी , मनोहर छाजेड , तेज प्रकाश कोठारी , डा. संतोष प्रधान , कमलेश कोठारी , पन्कज कोठारी संतोष रूनवाल , धर्मचंद्र मेहता अन्तिम जैन आदि ने तस्वीर के समक्ष दीप प्रज्जवलित किया | इस अवसर पर धर्मचंद मेहता ने कहाँ की पूज्य आचार्य श्री गुणों की खान थे उनके रग रग मे जीवों के प्रति करुणा थी | उत्तम लोढ़ा ने कहाँ की आचार्य श्री आज हमारे बीच मे नही हे किंतु उनकी ऊर्जा हमे अभी भी प्राप्त हो रही हे | मनोहर भंडारी ने कहाँ की आचार्य श्री ने मोहनखेडा तीर्थ को ऊंचाई तक पहुँचाया | यशवंत भंडारी ने उनको मानवता का मसीहा बताया | संजय मेहता ने झाबुआ संघ मे उनके योगदान की चर्चा की | डा. प्रदीप संघवी ने कहाँ की उन्होने शिक्षा के क्षेत्र मे उल्लेखनिय मार्गदर्शन दिया | योगेन्द्र नाहर , मनोज मेहता , अभय धारीवाल ,  सुभाषचंद्र कोठारी, अशोक काटारिया प्रवीण रुनवाल , पंकज कोठारी , मनोहर मोदी , मनोहर छाजेड तेज प्रकाश कोठारी ने अपने विचारो रखे | श्रीमती उषा बाठिया , मधु काठी , मोना रुनवाल किरण मेहता , श्रीमती बरखा जैन , अंकिता , तमन्ना रुनवाल आदि ने गीत के माध्यम से आचार्य श्री को याद किया | इसके पाश्चात चातुर्मास समिति के सदस्यों द्वारा आज के नवकारसी के लाभार्थी श्री मनोहर मोदी प्रतीक मोदी परिवार का और स्वधर्मिवात्सल्य के लाभार्थी श्यामूबेन ,नवीन, संतोष , मुकेश रुनवाल परिवार का शाल तिलक माला पहनाकर बहुमान किया गया | अंत मे पूज्य गौतम स्वामीजी , गुरुदेव राजेंद्र सुरीजी और आचार्य श्री ऋषभचन्द्र सुरीजी की आरती उतारी गयी | संचालन संजय काठी और आभार चातुर्मास समू अध्यक्ष सुभाषचन्द्र कोठारी ने किया |

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