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नवदिवसीय नवकार महामंत्र की आराधना,नवकार के आगे धन, दौलत, सम्पत्ति, अहंकार सब गौण: मुनि पीयूषचन्द्रविजय

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 राजगढ़ (धार) । नवकार आराधना के आठवें दिन मुनिश्री ने कहा कि आज नवकार आराधना आठवां दिन है । अष्टकर्मो का क्षय करवाकर विरक्ति की और ले जाने वाले नवकार महामंत्र की आराधना की जा रही है । हम णमो आयरियाणं शब्द का उच्चारण करते है तब संसार के सभी आचायर्भगवन्तों को हमारा नमन पहुंच जाता है । आचायर्रत्नशेखरसूरीश्वरजी म.सा. भी नवकार महामंत्र के तीसरे पद को शौभायमान कर रहे है । जिनशासन के महाराजा आचायर्भगवन्तों की निश्रा में हम अपने पापों की आलोचना करते है । आचायर्भगवन्त तीथर्ंकर के समान होते है । ‘‘तिथ्यर समो सूरि ‘‘ याने जिनमें ज्ञानाचार, दशर्नाचार, तपाचार, चारित्राचार, वीयार्चार हो व 36 गुणों से परिपूणर्, गीताथर् हो और 45 आगम का ज्ञान हो वे आचायर् जिनशासन में तीथर्ंकर के समतुल्य माने गये है । जितना दोष प्रभु की अवेल्हना करने में लगता है उतना ही दोष आचायर् की अवेल्हना करने में लगता है । तीथर्ंकर की भक्ति में जितने पुण्य की प्राप्ति होती है उतनी ही आचायर् की भक्ति में पुण्य प्राप्त होता है । उक्त बात गच्छाधिपति आचायर्देवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्यरत्न मुनिराज श्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा. ने राजेन्द्र भवन राजगढ़ के प्रवचन में कही । आपने कहा कि देवी-देवता खुश होने पर इंसान को भौतिक सुख साधन दे सकते है पर एक सामायिक का पुण्य नहीं दे सकते है पर यदि भुलवश यदि कोई देवी-देवता वरदान दे भी दे और भाग्य में नहीं हो तो वह वरदान भी निष्फल हो जाता है । लक्ष्मीजी की पूजा जरुर करना पर भरोसा मत करना, तीथर्ंकर परमात्मा की पूजा करना यदि नहीं कर पाये तो कोई बात नहीं पर तीथर्ंकर पर भरोसा जरुर करना । पुण्य प्रबल है तो साथ देने वाले बहुत मिल जायेगें पुण्य कमजोर हुऐ तो अपना सगा भी दूर चला जायेगा । हम सप्ताह के सात वारों के हिसाब से देवी-देवता की पूजा करके अपने मन को समझाते है । सोमवार को शिवजी, मंगलवार को हनुमानजी, बुधवार को गणेशजी, गुरुवार को सरस्वतीमाता या गुरुदेव, शुक्रवार को लक्ष्मीजी, शनिवार को शनिदेव व रविवार नाकोड़ा भैरवजी की आराधना कर लेते है । अब हमारे पास नवकार महामंत्र की आराधना करने के लिये सप्ताह में कोई दिन शेष नहीं बचा । जबकि नवकार महामंत्र को हर पल सुमिरण करना चाहिये जिससे वह हमारी आत्मा का कल्याण कर सके । बिना अस्तित्व वाले पैसे के घमण्ड में इंसान जमीन पर नहीं चलता है वह हवा में उड़ने लगता है जबकि हमारे जीवन का आधार नवकार होना चाहिये । नवकार के आगे धन, दौलत, सम्पत्ति, अहंकार सब गौण है ।

आज शुक्रवार को प्रवचन के दौरान मुनिश्री ने बताया कि 30, 31 व 01 सितम्बर तक त्रिदिवसीय दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की आराधना एकासने के साथ रखी गई है । इस आराधना में श्री कमलेशकुमार अनोखीलालजी चत्तर, श्रीमती मोहनबेन भैरुलालजी फरबदा, श्री पारसमल शांतिलालजी गादिया एवं पारणे का लाभ श्री कांतिलाल शांतिलालजी सराफ परिवार द्वारा लिया गया । 28 अगस्त को दीपक एकासने का आयोजन श्री प्रकाशचंदजी बाबुलालजी कोठारी परिवार दत्तीगांव वालों की ओर से रखा गया है । नवकार महामंत्र के आठवें दिन एकासने का लाभ श्री पुनमचंद मांगीलालजी पुराणी परिवार लिया गया आज सभी आराधकों ने आयंबिल तप के साथ नवकार महामंत्र की आराधना की । एकासने के लाभाथीर् का बहुमान राजगढ़ श्रीसंघ की ओर से बहुमान के लाभाथीर् मेहता परिवार ने किया । मुनिश्री की प्रेरणा से नियमित प्रवचन वाणी का श्रवण कर श्रीमती पिंकी सुमितजी गादिया राजगढ़ ने अपनी आत्मा के कल्याण की भावना से महामृत्युंजय तप प्रारम्भ किया था, आज उनका 30 वां उपवास है ।

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