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जीवन में धन का नहीं धर्म का महत्व है: मुनि पीयूषचन्द्रविजय


 

 राजगढ़ (धार) । परमात्मा महावीर ने कहा है कि मनुष्य को अपने जीवन में धन की अपेक्षा धर्म को ज्यादा महत्व देना चाहिए । उतराध्ययन सूत्र में मनुष्य जीवन को दुलर्भ बतलाते हुए कहा है कि इस जीवन को धमर् में लगाकर आत्मकल्याण करें । उक्त उपदेश गच्छाधिपति आचायर्देवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्यरत्न मुनिराज श्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा. ने राजेन्द्र भवन उपस्थित श्रोताओं को दिये । आपने बतलाया कि धन से इस लोक के भौतिक सुख सुविधा साधन मिल जायेगें मगर धर्म करने से परलोक के सुख भी सहज मिल जाते है । धर्म से किस्मत को भी बदला जा सकता है । धर्म करने वाली आत्मा शाश्वत अक्षय सुख को भी प्राप्त कर सकती है । इसलिये हमेशा धर्म मागर् पर चलने का प्रयत्न करो । मुनिश्री ने धर्म के महत्व को बतलाते हुये कहा कि परोपकार एवं पवित्र भाव से किये गये कार्य ही सही अर्थ में धर्म है ।

 आज बुधवार को प्रवचन के दौरान मुनिश्री ने बताया कि 27 अगस्त को पाट परम्परा के षष्ठम पट्टधर गच्छाधिपति आचायर्देवेश श्रीमद्विजय हेमेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का 10 वां पुण्यदिवस मनाया जावेगा । इस दिन सामुहिक सामायिक के साथ गुणानुवाद सभा भी होगी । दीपक एकासने का आयोजन श्री प्रकाशचंदजी बाबुलालजी कोठारी परिवार दत्तीगांव वालों की ओर से रखा गया है । मुनिश्री की प्रेरणा से नियमित प्रवचन वाणी का श्रवण कर श्रीमती पिंकी सुमितजी गादिया राजगढ़ ने अपनी आत्मा के कल्याण की भावना से महामृत्युंजय तप प्रारम्भ किया था, आज उनका 34 वां उपवास है ।

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