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ज्ञान मोक्ष का द्वार है: मुनि रजतचंद्र विजय



 झाबुआ। नमस्कार महामंत्र की आराधना के 7 वें दिन आचार्य भगवंत श्रीमद्विजय ऋषभचंद्र सुरीश्वरजी महाराजा साहेब के शिष्य प्रवचन प्रभावक मुनिराज श्री रजतचंद्र विजयजी म.सा.ने ज्ञानपद विषय पर सारगर्भित प्रवचन देते हुए कहा ज्ञान gateway of moksha  यानि ज्ञान मोक्ष का द्वार है। आगम में भी पढमं नाणं तओ दया पहले ज्ञान फिर दया कहां है। एक नारकी जीव 100 वर्ष तक जिस भयंकर पीड़ा को सहनकर जितने कर्मों की निर्जरा करता है उतनी निर्जरा सम्यग् ज्ञान युक्त  1 नवकारसी वाली साधक आत्मा करती है । ज्ञान प्राप्ति के 5 प्रकार बताये शास्त्रों में 1 वंचना गुरु से सूत्रपाठ ग्रहण करना 2 पृछना समझ में ना आये वह विनयपूर्वक गुरु से पूछना 3  परावर्तना प्राप्त किये ज्ञान वो परावर्तन करें रिविजन करें 4 अनूपेक्षा सूत्र का अर्थ घटन करें 5 धर्म कथा सूत्र के साथ अर्थ के चिंतन करें। मुनि श्री ने 8 प्रकार के ज्ञानाचार पर भी प्रकाश किया। मुनि श्री ने जिनशासन के उन महापुरुषों के बारे में प्रकाश डाला जिन्होंने बड़े बडे ज्ञान भंडार की स्थापना की। जैसे कुमारपाल महाराजा वस्तुपाल मंत्री पेथडशाह आदि ने गुरु भगवंतो के  उपदेश से हजारों ग्रंथ स्थापित कर अनेको ज्ञान भंडार बनाये थे। जीवन में ज्ञान का बहुत महत्व है। प्रभु महावीर ने अंतिम देशना में विनय पाठ सिखाया। मुनि श्री ने बताया ज्ञान विनय से  प्राप्त होता है। बचपन की अवधि में स्कूल में एक सूत्र सिखाया विद्या दधति विनयम् (विद्या) ज्ञान विनय से प्राप्त किया जाता है। जीवन की शिक्षा का पहला पाठ भी विनय हे।विनयवान सभी का प्रिय बन जाता है। नवकार भी यही सिखाता है। मुनिश्री ने श्रीपाल मयणा की धर्म आराधना के प्रति पक्की श्रद्धा का वर्णन सुनाया।  धर्मसभा में मुनिश्री ने लब्धि तप वाले तपस्वी एवं नवकार तप वाले तपस्वी को सामूहिक पच्चखान प्रदान किए।  श्री नवकार चित्र पर आज हेमेंद्र सुरी महिला मंडल ने दीप प्रज्वलन किया। गौतम

 स्वामी आरती का लाभ यशवंत जी भंडारी ने लिया प्रभावना एक गुरु भक्त की ओर से की गई।

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