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सांप से नहीं पाप से डरे : मुनि पीयूषचन्द्रविजय

 


  राजगढ़ (धार) । सांप का दंश व्यक्ति की मृत्यु के साथ एक ही जीवन को खराब करता है पर पाप का दंश व्यक्ति के कई भव खराब कर देता है । सिन्दूर प्रकर में आचार्य श्री सौमप्रभसूरीश्वरजी म.सा. ने बताया है कि सरलता से मिली वस्तु की व्यक्ति बिल्कुल चिन्ता नहीं करता है । यह सोचता है कि मुझे मानव जन्म बहुत ही सरलता से मिल गया है । मानव जीवन प्राप्त करना बहुत ही दुर्लभ कार्य है । व्यक्ति लापरवाही के चलते मानव जीवन की महत्ता को नहीं समझ पा रहा है । देवताओं को जन्म के साथ मति, श्रुत और अवधि तीन ज्ञान प्राप्त हो जाते है । तीर्थंकर परमात्मा केवलज्ञान को भी प्राप्त करते है । देवताओं के पास विरती नहीं होती है । देवता तप नहीं कर सकते है । इसी कारण भगवान महावीर की प्रथम देशना खाली गयी थी क्योंकि उस समय समोशरण में सिर्फ देवता ही विराजित थे । मानव जाति से कोई भी उपस्थित नहीं था जो व्रत नियम पच्चखाण ग्रहण कर सके । उक्त बात रविवार को राजेन्द्र भवन राजगढ़ की 50 दिवसीय प्रवचन माला में गच्छाधिपति आचार्य देवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्यरत्न मुनिराज श्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा. ने कही । आपने कहा कि प्रबल पुण्यानुबंधी पुण्य की वजह से हमें आज मानव जीवन, जैन शासन, जैन परिवार और जैन धर्म में अपने जीवन को यापन करने का अवसर मिला है । पूण्य और पुरुषार्थ के बल पर हमें सद्गुरु की प्राप्ति होती है । गुरु हमें देव से मिलाते है और धर्म से आत्मा को जोड़ने का पूनीत कार्य करते है । इस लिये देव गुरु और धर्म की शरण लेने की बात कही जाती है । देव और धर्म से जोड़ने के लिये गुरु ही महत्वपूर्ण कड़ी होती है । साधना का मार्ग बहुत ही कठिन है, यदि यह मार्ग सरल होता तो हर कोई साधना के मार्ग को अपना कर मोक्ष प्राप्ति के प्रयास कर लेता । धर्म व्यक्ति को निर्भय बनाता है । संसारी व्यक्ति हमेशा संसार में भय ग्रस्त रहता है ।

सोमवार को प्रातः प्रवचन माला में राजगढ़ श्रीसंघ के श्री अनिलकुमार मनोहरलालजी खजांची परिवार द्वारा उत्तराध्ययन सूत्र एवं श्री मथुरालालजी प्यारचंदजी मोदी परिवार द्वारा धन्यकुमार चरित्र ग्रंथ वोहराया जावेगा । इन दोनों सूत्रों के आधार पर चातुर्मास प्रवचन माला के तहत प्रवचन निरन्तर गतिमान रहेगें । 

मुनिश्री ने कहा कि अट्ठम तप आराधना राजगढ़ श्रीसंघ में श्री मथूरालालजी प्यारचंदजी मोदी परिवार द्वारा श्रावण वदी 9, दिनांक 02 अगस्त से श्रावण वदी 11, दिनांक 04 अगस्त तक करवायी जावेगी ।

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