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श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में डायलेसिस मशीन की भेंट,निर्मल भावों से जीने वाला व्यक्ति प्रगति पाता है: आचार्य ऋषभचन्द्रसूरि



   राजगढ़ (धार) म.प्र. । जीवन यात्रा में जन्म व मृत्यु हवाई जहाज के लेंडिंग व टेकआॅफ जैसा है । जीवन के जहाज को उड़ाने के लिये एक अच्छे पायलेट की जरुरत होती है । जीवन में सुख दुःख, मान अपमान, नफा नुकसान आते रहते है पर ऐसे विपरीत समय में व्यक्ति समभाव में रहता है तो वह जीवन में सफलता पा लेता है । मृत्यु के पश्चात् इंसान के धर्म का नहीं बल्कि उसके कर्मो का हिसाब होता है । मानव जन्म पुनः प्राप्त करने के लिये इस जीवन में जीवदया, मानवसेवा करके अपनी कर्म सत्ता को मजबूत कर लेना चाहिये । जो निर्मल भावों के साथ जीवन जीता है वही व्यक्ति प्रगति करता है । उक्त बात परम गुरुभक्त श्री संतोष रखबचंद जी देवड़ा नाकोड़ा के 52 वें जन्मोत्सव के अवसर पर वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. ने कही । आपने कहा कि श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ द्वारा संचालित गुरु राजेन्द्र नेत्र चिकित्सालय में वर्ष 2014 से 2 डायलेसिस मशीन कार्य कर रही है । डायलेसिस मशीन द्वारा कोरोना काल में धार, झाबुआ, अलिराजपुर, बड़वानी आदि जिलों के साथ इन्दौर तक के मरीजों का डायलेसिस किया जा रहा है । गत माह तक लगभग 450 से अधिक किडनी के मरीज इन मशीनों से लाभ उठा चूके है । वर्तमान में हमें एक और मशीन की जरुरत थी । मेरी प्रेरणा से परम गुरुभक्त श्री संतोष नाकोड़ा ने फ्रेशनेश कम्पनी की डायलेसिस मशीन श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी द्वारा संचालित गुरु राजेन्द्रसूरि चिकित्सालय मोहनखेड़ा को भेट की ।
इससे पूर्व श्री मोहनखेड़ा तीर्थ के मुख्य द्वार से अहिंसा यात्रा निकाली गयी व गौशाला जाकर गायों को गुड़ लापसी, फल, हरी सब्जीयों आदि का आहार दिया गया । तत्पश्चात् श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी ट्रस्ट श्री मोहनखेड़ा तीर्थ के मेनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ, ट्रस्टी- संजय सराफ, आनन्दीलाल अम्बोर, मंत्रणा समिति सदस्य सेवन्तीलाल मोदी, राजेन्द्र खजांची, दिलीप भण्डारी, शेलेष अम्बोर आदि ने श्री संतोष नाकोड़ा परिवार का ट्रस्ट की ओर से बहुमान किया । अन्त में आभार मेनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ ने माना ।

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