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आचार्य श्री विद्याचन्द्रसूरीश्वरजी जी म.सा. की 40 वीं पूण्यतिथि मनायी,गुरु आज्ञा ही धर्म है: आचार्य ऋषभचन्द्रसूरि,श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में आचार्यश्री का मुनि व साध्वी मण्डल के साथ चातुर्मास प्रवेश कल होगा



राजगढ़ (धार) म.प्र. । दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की पाट परम्परा के अष्ठम पट्टधर वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. व साधु-साध्वी मण्डल की निश्रा में पंचम पट्टधर कविरत्न आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय विद्याचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की 40 वीं पूण्यतिथि, मुनिराज श्री पुष्पेन्द्रविजयजी म.सा. का दीक्षा दिवस, मुनिराज श्री जिनचन्द्रविजयजी म.सा. एवं मुनिराज श्री जीतचन्द्रविजयजी म.सा. की अखण्ड मौन साधना की पूर्णाहुति व मुनिराज श्री जिनभद्रविजयजी म.सा. के जन्म दिवस के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन शासन की गाईड लाईन का पालन करते हुये हुआ ।












कार्यक्रम में तीसरे वर्षीतप के आराधक वरिष्ठ मुनिराज श्री पीयुषचन्द्रविजयजी म.सा. ने कविरत्न आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय रवीन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की गुणानुवाद सभा में कहा कि आचार्यश्री का जन्म राठौर वंश के जोधपुर शहर में हुआ था पर जैन समाज के संतों के सानिध्य में रहकर जैन दीक्षा ग्रहण कर वे जैन के ही नहीं जन जन की आस्था के केन्द्र बने । वे समग्र समाज के लिये सहज और सरल होकर अपना वात्सल्य प्रदान करते थे ।
कार्यक्रम में वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. ने अपने उपकारी गुरु आचार्य श्री विद्याचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के गुणों की चर्चा की व कहा कि आगम के अनुसार 4 ज्ञान के धारक होने के बावजूद स्वयं को अज्ञानी प्रकट करते हुये भगवान महावीर से 36 हजार प्रश्न लोक कल्याण के लिये किये । गुरु और शिष्य का गुरु के प्रति आदर प्रभु महावीर एवं गणधर गौतमस्वामी के जीवन में देखने को मिलता है । इसी वजह से गुरु गौतम जो अपार लब्धि के धारक है, के नाम का जाप किया जाता है । गौतमस्वामी जी ने प्रभु महावीर के आदेश का अक्षरशः पालन किया । गुरु की आज्ञा ही धर्म होता है । मुनिश्री जीतचन्द्रविजयजी म.सा. ने मुझसे मौन साधना का मार्ग पूछा मैंने उन्हें एकांत में रहकर एक माह तक उवस्सगरहं स्त्रोत के साथ जाप करने का सुझाव दिया । इसी प्रकार मुनिराज श्री जिनचन्द्रविजयजी म.सा. की भी एक माह की मौन साधना की पूर्णाहुति आज हुई है । मैं समस्त मुनियों को कोरोना काल में जन कल्याण के लिये की गई साधना के लिये आशीर्वाद प्रदान करता हूं ।
इस अवसर पर आचार्य श्री विद्याचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के चित्र के समक्ष श्री बाबुलाल धनराजजी डोडियागांधी परिवार की और गहुंली की गई । श्री मेघराज जैन वासक्षेप पूजा, चित्र पर माल्यार्पण श्री विनेशकुमार जैन व दीपप्रज्जवलन श्री जयंतिलाल मुलचंदजी बाफना परिवार द्वारा किया गया । कार्यक्रम में 150 से अधिक आराधकों ने सामुहिक सामायिक की । समस्त आराधकों एवं कार्यक्रम में उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को प्रभावना का वितरण बागरा निवासी श्री विनेश जैन परिवार द्वारा किया गया । कार्यक्रम के अंत में तीर्थ के मेनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ ने आभार प्रकट करते हुये रविवार को आचार्य श्री ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. आदि ठाणा के चातुर्मास मंगलमय प्रवेश इन्टरनेशन स्कूल से शासन की गाईड लाईन का पालन करते हुये उपस्थित रहने का आग्रह किया ।

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