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गुजरात से अपने घर आने को तरस रहे मजदूरो कब तक लाएगी सरकार - विधायक ग्रेवाल



  सरदारपुर(धार)। सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा शुक्रवार को मजदूर दिवस पर प्रदेश के महामहिम राज्यपाल के नाम पर अनुविभागीय अधिकारी सरदारपुर को ज्ञापन सौपा गया। ज्ञापन मे बताया गया है कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान द्वारा 24 अप्रैल को बडी जिम्मेदारी के साथ यह कहा गया था कि मध्यप्रदेश के जो भी मजदूर अन्य राज्यो मे फंसे हुए है, हम उन्है प्रदेश मे लाने की व्यवस्था कर रहे है। लेकिन दुःख इस बात का है कि आज 07 दिन बाद भी तहसील सरदारपुर जिला धार के 05 हजार मजदूरो मे से बडी संख्या मे उनके घर पहुचाने का कार्य प्रारंभ नही हुआ है। जबकि भारत सरकार द्वारा कोरोना लॉकडाउन के पहले विदेशो मे फंसे भारतीय विद्यार्थियो एवं नागरिको को उनके घरो एवं राज्य मे पहुचा दिया गया है एवं कोटा (राजस्थान) से भी हजारो विद्यार्थियो को उनके घर तक पहुचा दिया गया। वही दुसरी ओर गुजरात सहित अन्य राज्यो मे फंसे हजारो गरीब आदिवासी मजदूरो को उनके घर लाने के लिए आपने अभी तक कोई ठोस नीति क्यो नही बनाई। गरीब मजदूर अपने घर आने के लिए तरस रहे है। वे प्रतिदिन मुझे व्हाट्सएप पर वीडियो कॉल के माध्यम से अपना दुःख दर्द बंया कर रहे है। उनकी अन्य राज्यो मे भोजन की अपर्याप्त व्यवस्था होने से भूखे मरने की नौबत आ गई है। उनके साथ मे उनके छोटे-छोटे बच्चे भी बिलख रहे है। यहॉ तक कि 29 अप्रैल 2020 को गुजरात के ग्राम उपलेटा जिला जामनगर मे अत्यधिक वर्षा के कारण गरीब आदिवासी मजदूरो की कच्ची झोपडियॉ भी धंस गई जिसकी वजह से उनका जीवन यावन दूभर हो गया है। परेशान मजदूरो द्वारा जब वहॉ के अधिकारियो से घर आने के संबंध मे बात की जाती है तो उनके द्वारा भी उचित जवाब नही दिया जाता है। साथ ही लॉकडाउन के प्रारंभ से ही मध्यप्रदेश के बेटमा मे सरदारपुर तहसील के ग्राम रामसागर के लगभग 110 मजदूर फंसे हुए है। अगर आज चुनाव होते तो सरकारे उनके वोट के लिए उन गरीब मजदूरो को स्वयं लेकर आती, तो फिर इस समय सरकार द्वारा गरीब मजदूरो की और ध्यान क्यो नही दिया जा रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा हमेशा गरीब मजदूरो की बात की जाती है तो फिर आज ये गरीब मजदूर क्यो परेशान हो रहे है। विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा मांग की गई है कि सरदारपुर जिला धार, झाबुआ, अलिराजपुर, बडवानी, खरगौन, रतलाम सहित अन्य जिलो के जो मजदूर गुजरात एवं अन्य राज्यो मे फंसे हुए है उन्है उनके घर सकुशल पहुचाया जाए। अगर शीघ्र ही पर्याप्त संख्या मे गरीब आदिवासी मजदूरो को उनके घर पहुचाने का कार्य प्रारंभ नही होता है तो मेरे द्वारा कोरोना लॉकडाउन के नियमो का पालन करने हुए क्रमबध्द आंदोलन किया जाएगा। जिसकी सम्पूर्ण जवाबदारी शासन-प्रशासन की रहेगी।
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