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5 और 9 के अंक से क्या है प्रधानमंत्री की घोषणा का संबंध ? जानिए योगेन्द्र माथुर से.......



(योगेन्द्र माथुर,लेखक, पत्रकार व चिंतक)


    8 का अंक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का प्रिय अंक रहा है। अपने पहले कार्यकाल व दूसरे कार्यकाल के अब तक के समय में उन्होंने जो भी घोषणा की है या बड़े कदम उठाए हैं, उनका अधिकांशतः 8 के अंक से ही संबंध रहा है। रेडियो पर मन की बात कार्यक्रम को छोड़कर यह पहला मौका है जब प्रधानमंत्री ने किसी महत्वपूर्ण कदम या कार्य के लिए 8 का अंक नही चुना है।
    प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना वायरस की वैश्विक महामारी से युद्ध में भारत के सुरक्षित भविष्य की दृष्टि से 3 अप्रैल की सुबह 9 बजे टीवी पर 9 मिनट के वीडियो संदेश के माध्यम से देशवासियों से अपील की कि वे 5 अप्रैल को रात्रि 9 बजे 9 मिनट तक अपने घर की छत या बालकनी में दीपक, मोमबत्ती या टार्च व मोबाइल की फ्लैश जलाकर रोशनी करें। अनायास ही लोगों के मन में जिज्ञासा जागी की मोदीजी की इस अपील के मायने क्या हैं, इसे किस तरह लिया जाए?
   हमारे देश के परमज्ञानी संत, विद्वान, धर्म-अध्यात्म व ज्योतिष के जानकारों नें लोगों की जिज्ञासाओं के जवाब भी देना आरंभ कर दिए हैं। जिज्ञासा दो तरह की है, पहली इस अपील के मायने और दूसरी यह कि 05 तारीख व 09 बजे ही क्यों? एक कोशिश मैंने भी की है जिज्ञासाओं के समाधान ढूँढने की। 
   सबसे पहले यहाँ बता दूँ की 9 अंक धर्म, विज्ञान व ज्योतिष की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण अंक है। इसे पूर्णाक या अविभाज्य अंक माना जाता है अर्थात 9 के अंक को कितनी बार भी जोड़ें या 9 के अंक में किसी भी अंक का गुना किया जाए फलांको का योग 9 ही होगा जैसे 5×9=45, यहाँ 4 5 को जोड़ें तो फल 9 ही होगा। ज्योतिष में ग्रहों की संख्या भी 9 ही मानी गई है। पृथ्वी गोल है और उसका पूरा वृत्त 360 का होता है अर्थात 3 और 6 का जोड़ यहाँ भी 9 होता है।
    सनातन धर्म में किसी भी मंत्र के जाप के लिए 108 मनकों की माला उपयोग में लाई जाती है जो मूलतः ज्योतिष के 27 नक्षत्रों व प्रत्येक के 4 चरणों का योग 27×4=108 होती है। 27 के अंकों का जोड़ भी 9 होता है। माँ दुर्गा के 9 रूपों की ही पूजा की जाती है। धर्म शास्त्र में 18 पुराण व 108 उपनिषदों की प्रमुख रूप से मान्यता है। इनके अंको का योग भी 9 हुआ। अष्टसिद्धि है तो 9 निधियाँ भी हैं। काल गणना में प्रत्येक युग की आयु निर्धारित हुई है। सतयुग 1728000 वर्ष, त्रेता युग 129600 वर्ष, द्वापर युग 864000 एवं कलयुग 432000 वर्ष का है। इनके अंको का कुल योग भी 9 ही होता है। भगवान विष्णु के अब तक 9 अवतार प्रमुख माने गए हैं। दसवें कल्कि अवतार की प्रतीक्षा है।
    अब समझते हैं इस चयन के पीछे का गणित। तारीख है 5 और माह है चौथा अर्थात अप्रेल।  तारीख के 5 व अप्रेल के 4 अंक का योग करें तो योग 9 होगा। 5 का अंक बुध का अंक है। हमारा शरीर भी 5 तत्वों से मिलकर बना है जिसमें अग्नि तत्व महत्वपूर्ण है। अग्नि के भी 5 रूप बताए गए हैं। पंचामृत व पंचगव्य का सनातन धर्म मे विशेष महत्व है। शिव पंचायतन में भी देवताओं की संख्या 5 ही है। 4 का अंक राहु का है। वार रविवार है। रविवार के स्वामी देवता सूर्य हैं और सूर्य सौर मंडल में ग्रहों के राजा माने गए हैं। सूर्य प्रकाश या उजास के देवता हैं। 5 तारीख की रात 9 बजे तुला लग्न की कुंडली में चन्द्रमा सिंह राशि में गोचर कर रहे हैं। सिंह राशि सूर्य की राशि है। मंगल, शनि व गुरु चतुर्थ भाव में मकर राशि में युति कर रहे हैं। मकर राशि शनि की स्व राशि है। शनि व राहु को हम अंधकार व विनाशकारी ग्रह ही मानते हैं। 9 का अंक मंगल का अंक है और मंगल अग्नि तत्व के कारक हैं। मंगल को सौर मंडल के ग्रहों में सेनापति अर्थात नेतृत्वकर्ता माना गया है। इस गोचर में मंगल मकर राशि में उच्च के माने जाते हैं। अब एक बात यहाँ समझने की है कि शनि स्वयं के घर में मौजूद होने से बलि अर्थात शक्तिशाली हो रहा है और मंगल उच्च राशि में होने से अत्यधिक प्रभावी हो रहा है। यहाँ गुरु भी विराजमान हैं लेकिन मकर राशि गुरु की नीच राशि होने से गुरु का प्रभाव यहाँ काम नही कर रहा। राहु अपनी उच्च राशि मिथुन में गोचर कर शक्तिशाली हो रहे हैं। ग्रहों के राजा सूर्य मीन राशि में गुरु की सेवा में होने के चलते फिलहाल प्रभाव नही दिखा पा रहे हैं। गोचर की इसी स्थिति के चलते दुनिया में हाहाकार मचा हुआ है क्योंकि पाप ग्रह अधिक शक्तिशाली हैं और शुभ ग्रह अपना प्रभाव दिखाने की स्थिति में नही हैं।
    5 अप्रैल की रात्रि अनंग त्रयोदशी है। अनंग अर्थात मंगल। तुला लग्न में लग्नेश शुक्र अष्टम भाव में है जो दीर्घायु देता है। चन्द्रमा पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में है जो सिंह राशि का नक्षत्र है। सिंह राशि का स्वामी सूर्य रेवती नक्षत्र में है। यह रवि योग का निर्माण कर रहा है जो समस्त दोषों को हरने वाला है। 5 का अंक बुध का कारक है। बुध रात्रि का कारक ग्रह माना जाता है अर्थात रात्रि में यह अधिक प्रभावशाली होता है।
   यहाँ प्रधानमंत्री की घोषणा के पीछे कुल मिलाकर जो लॉजिक या गणित है वह यह कि दीपक, मोमबत्ती जलाकर अग्नि तत्व को प्रभावी बनाया जाए अर्थात मंगल के बल में वृद्धि हो। मंगल को बलि करने का अर्थ है हमारे साहस, उत्साह, दृढ़ता को मजबूत करना। टार्च या मोबाइल की फ्लैश लाइट से उजाला कर सूर्य की ताकत को बढ़ाया जाए और शनि या राहु रूपी अंधकार के प्रभाव को कम किया जाए। सूर्य को मजबूत कर सूर्य की राशि मे विराजमान चन्द्र को मजंबूत करना जो हमारे मनोबल का स्वामी है अर्थात हमारे मनोबल को मजबूत करना। हमारा मनोबल मजंबूत होगा तो हम कोरोना रूपी अंधकार से पूरी दृढ़ता व साहस के साथ लड़ पाएँगे।
    सनातन धर्म में दीप जलाने का विशेष महत्व है। प्रत्येक शुभ कार्य या अनुष्ठान के आरंभ में दीप ज्योति ही प्रज्ज्वलित की जाती है। दीपक जलाने से अंधकार तो दूर होता ही है, वातावरण में विद्यमान कीट-पतंगे व जीवाणु-विषाणु भी खत्म होते हैं। दीपक या मोमबत्ती के उजास में कीट-पतंगे उसकी लौ या बत्ती की तरफ खींचे चले आते हैं और जलकर नष्ट हो जाते हैं। कोरोना वायरस भी एक प्रकार का विषाणु ही है। अतः कोरोना वायरस से भारत की विजय की दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह दूरदृष्टि से युक्त अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
    मेरा आप सभी से निवेदन है कि आप यथासंभव दीपक या मोमबत्ती ही जलाएँ, वह भी 5 या 9 की संख्या में हो तो सोने पे सुहागा होगा। इलेक्ट्रॉनिक टार्च या मोबाइल की फ्लैश लाईट का प्रयोग न करें। क्योंकि राहु इनका कारक ग्रह है और इनका प्रयोग करना अर्थात राहु को मजबूत करना है। 


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