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श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में भागवती दीक्षा सम्पन्न,अजय नाहर बने मुनि जिनभद्रविजय,साध्वी श्री हर्शितगुणाश्री जी व साध्वी श्री हितरत्नाश्री जी ने पंच महाव्रत किये अंगीकार


  राजगढ़ (धार) । दादा गुरुदेव की पाट परम्परा के अष्टम पट्टधर श्री मोहनखेड़ा तीर्थ विकास प्रेरक वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा, मुनि मण्डल, साध्वीवृदों की पावनतम सानिध्यता एवं श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी (ट्रस्ट) श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ के तत्वावधान में दसई निवासी अजय अशोककुमारजी नाहर की दीक्षा एवं साध्वी श्री हर्षितगुणाश्री जी म.सा., साध्वी श्री हितरत्नाश्री जी म.सा. की बड़ी दीक्षा की भव्य विधि आज बुधवार हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुई । नूतन मुनि अजय नाहर को पंचमुष्ठी केशलोचन के पश्चात् आचार्य श्री ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. ने मुनि जिनभद्रविजयजी नाम प्रदान किया ।







    प्रातःकाल की वेला में नवकारसी के पश्चात् गाजे बाजे के साथ दीक्षार्थी अजय नाहर को उनके अस्थायी निवास से दीक्षा छाब के साथ श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ स्थित दीक्षा वाटिका में लाया गया । यहां पर विराजित वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के समक्ष दीक्षार्थी व समाजजनों ने सामुहिक गुरु वंदन किया । तत्पश्चात् चैमुखी में विराजित प्रभु के समक्ष साध्वी श्री हर्षितगुणाश्री जी म.सा., साध्वी श्री हितरत्नाश्री जी म.सा. ने बड़ी दीक्षा की विधि पूर्ण की । बड़ी दीक्षा विधि पश्चात् दीक्षार्थी अजय नाहर की दीक्षा विधि प्रारम्भ हुई । दीक्षा से पूर्व अजय नाहर को मन्दसौर धुंधड़का निवासी दिनेश जैन परिवार ने विजय तिलक करके दीक्षा मार्ग में विजय प्राप्त करने हेतु मार्ग प्रशस्त किया । दीक्षार्थी के मामा परिवार श्री राजेन्द्रकुमार अशोककुमार दुलीचंदजी चण्डालिया श्री नाकोड़ा ट्रेडर्स राजगढ़ वालों ने नूतन मुनि को वोहराये जाने वाला रजोहरण आचार्यश्री को वोहराया । संगीतमय प्रस्तुतियों के बीच दीक्षा की विधि चलती रही इसी बीच आचार्यश्री ने दीक्षार्थी को रजोहरण प्रदान किया । रजोहरण प्राप्त करते ही अजय नाहर खुशी के मारे झुम उठा और चैमुखी के सम्मुख नृत्य करते हुये अपनी खुशी का इजहार करने लगा । यहां से अजय नाहर को वेश परिवर्तन के लिये ले जाया गया, कुछ ही समय पश्चात् वेश परिवर्तन कर पुनः नूतन मुनि के रुप में अजय नाहर दीक्षा पाण्डाल में लाये गये । यहां उन्हें आचार्यश्री की निश्रा में वेश परिवर्तन के पश्चात् नूतन मुनि बनने की विधि ज्ञानप्रेमी मुनिराज श्री पुष्पेन्द्रविजयजी म.सा. के मंत्रोच्चार के साथ पूर्ण करवायी गयी । मुनिश्री ने सुधर्मास्वामी की पाट परम्परा में हुये समस्त आचार्य भगवन्त व दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की पाट परम्परा के समस्त आचार्य भगवन्तों के नामों की नामावली श्रवण करवाने के पश्चात् आचार्य श्री ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. ने अजय नाहर का पंचमुष्ठी केशलोचन करके नूतन नाम मुनि श्री जिनभद्रविजय दिया ।

दीक्षा के अवसर पर इन भाग्यशालीयों ने लिये लाभ- रजोहरण- श्री राजेन्द्रकुमार अशोककुमार दुलीचंदजी चण्डालिया परिवार राजगढ़, चादर- श्री पारसमल सागरमलजी गादिया उज्जैन, चोलपट्टा- श्री विकास मेहता मुम्बई, गौतमपात्र- श्री धनराज कंकुचोपड़ा बालोतरा, धर्मदण्ड- श्री राजमल अशोककुमार जी नाहर दसई, केशलोचन के पश्चात केश प्राप्त करने का लाभ श्रीमती बसन्तीबाई शांतिलालजी वेदमुथा मुम्बई/भूति, नवकार माला अर्पित करने का लाभ- श्रीमती रेखा देवी कांतिलालजी शाह मुम्बई, नामकरण के समय थाली डंका बजाने का लाभ- अजय नाहर की मौसी व भुआ परिवार, दोनों बड़ी दीक्षा की साध्वीजी को संयुक्त रुप से कामली ओढाने का लाभ- श्री सोहनराज मिश्रीमलजी वर्धन परिवार को प्राप्त हुआ ।
   दीक्षा के अवसर पर पूना जैन श्रीसंघ ने आचार्यश्री से पूना जैन संघ में चैत्र मास की ओलीजी आराधना में निश्रा प्रदान करने हेतु विनंती की साथ ही राजगढ़ जैन श्रीसंघ ने 18 जनवरी को श्री शांतिनाथ जिन मंदिर के जिर्णोद्धार हेतु उत्थापन विधि में अपनी निश्रा प्रदान करने की विनती की । दसई श्रीसंघ ने आचार्यश्री से नूतन मुनि के साथ नगर प्रवेश की विनती की । इस पर आचार्यश्री ने कहा कि मेरा बदनावर नगर के श्री शंखेश्वरपुरम् तीर्थ की प्रतिष्ठा हेतु 25 जनवरी को प्रवेश होगा वहां 31 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न की जावेगी । वहा से मैं महाराष्ट्र की ओर विहार करुंगा । पूना जैन संघ की चैत्र मास की शाश्वत नवपद ओलीजी आराधना में निश्रा प्रदान करुंगा । 18 जनवरी को राजगढ़ श्री शांतिनाथ जिन मंदिर की उत्थापन विधि में भी निश्रा प्रदान करुंगा । दसई श्रीसंघ की विनती हुई है इसके लिये जैसा आगे हमारा प्रोग्राम बनेगा वैसे संघ को सुचना की जावेगी । कार्यक्रम मंे संगीतमय प्रस्तुति संगीतकार देवेश जैन मोहनखेड़ा द्वारा दी गई । इस अवसर पर तीर्थ के मेनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ, ट्रस्टी- मांगीलाल पावेचा, मेघराज जैन, संजय सराफ, आनन्दीलाल अम्बोर सहित राजगढ़ श्रीसंघ, दसई, टाण्डा, झाबुआ, बदनावर, मन्दसौर, लीमड़ी आदि श्रीसंघों की विशेष उपस्थिति रही ।

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