मध्यप्रदेश की धरती पर लगभग एक सदी बाद जंगली भैंसा (Wild Buffalo) की वापसी ने वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पल दर्ज किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बालाघाट जिले के सूपखार क्षेत्र में इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ करते हुए इसे प्रदेश की जैव-विविधता के लिए एक निर्णायक कदम बताया।
कान्हा टाइगर रिजर्व बना पुनर्स्थापन का केंद्र
असम के प्रसिद्ध काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लाए गए जंगली भैंसों को कान्हा टाइगर रिजर्व में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया है। पहले चरण में चार जंगली भैंसों—तीन मादा और एक नर—को सॉफ्ट रिलीज प्रक्रिया के तहत सुरक्षित बाड़े में छोड़ा गया। सभी भैंस युवा और स्वस्थ हैं, जिससे इनके अनुकूलन की संभावना मजबूत मानी जा रही है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि यह सिर्फ वन्यजीवों की वापसी नहीं, बल्कि प्रदेश के पारिस्थितिक संतुलन को पुनर्जीवित करने की दिशा में बड़ा कदम है।
100 साल बाद वापसी: जैव विविधता को मिलेगा नया जीवन
मध्यप्रदेश में जंगली भैंसों की प्रजाति लगभग 100 वर्ष पहले विलुप्त हो चुकी थी। वर्तमान में इनकी प्राकृतिक उपस्थिति मुख्य रूप से असम तक सीमित है। ऐसे में यह पुनर्स्थापन परियोजना न केवल एक खोई हुई प्रजाति की वापसी है, बल्कि घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने का भी प्रयास है।
जंगली भैंसें घास के मैदानों के संरक्षण में अहम भूमिका निभाती हैं। इनके चरने से वनस्पति संतुलन बना रहता है, जिससे अन्य वन्य प्रजातियों को भी लाभ मिलता है।
असम से मध्यप्रदेश तक 2000 किलोमीटर का सफर
इस परियोजना के तहत 19 मार्च से 10 अप्रैल 2026 के बीच काजीरंगा के विभिन्न क्षेत्रों से सात किशोर भैंसों को चयनित किया गया। इनमें से चार भैंसों को 25 अप्रैल 2026 को लगभग 2000 किलोमीटर की लंबी यात्रा के बाद कान्हा टाइगर रिजर्व लाया गया।
यह पूरा ट्रांसलोकेशन अभियान विशेषज्ञ वन अधिकारियों और अनुभवी पशु चिकित्सकों की निगरानी में सम्पन्न हुआ, जिससे जानवरों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जा सका।
वैज्ञानिक अध्ययन ने बताया कान्हा को सबसे उपयुक्त
भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा किए गए अध्ययन में कान्हा टाइगर रिजर्व को जंगली भैंसों के पुनर्स्थापन के लिए सबसे अनुकूल स्थान पाया गया। यहां के विस्तृत घास के मैदान, पर्याप्त जल स्रोत और कम मानव हस्तक्षेप इस प्रजाति के लिए आदर्श परिस्थितियां प्रदान करते हैं।
वन्य संरक्षण में मध्यप्रदेश की बढ़ती पहचान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश पहले ही “टाइगर स्टेट” और “चीता स्टेट” के रूप में देश में अपनी पहचान बना चुका है। कूनो नेशनल पार्क में चीतों की सफल वापसी के बाद अब जंगली भैंसों का पुनर्स्थापन प्रदेश को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में अन्य विलुप्त या संकटग्रस्त प्रजातियों के पुनर्वास पर भी कार्य किया जाएगा, जिससे प्रदेश की जैव विविधता और समृद्ध हो सके।
स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। वन्यजीवों की विविधता बढ़ने से देश-विदेश के पर्यटक आकर्षित होंगे, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
अंतर्राज्यीय सहयोग का मजबूत उदाहरण
इस अभियान ने असम और मध्यप्रदेश के बीच सहयोग का एक नया अध्याय भी जोड़ा है। मुख्यमंत्री ने असम के मुख्यमंत्री डॉ. हेमंत बिस्वा सरमा के साथ हुई चर्चा को इस परियोजना की सफलता का आधार बताया।
भविष्य की दिशा: संतुलित विकास और संरक्षण
जंगली भैंसों की यह वापसी केवल एक प्रजाति का पुनर्स्थापन नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। मध्यप्रदेश सरकार अधोसंरचना विकास के साथ-साथ पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध नजर आ रही है।





