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भारत में LPG साइबर घोटालों में उछाल: फर्जी बुकिंग लिंक, WhatsApp APK मैलवेयर और UPI फ्रॉड का बड़ा खुलासा

भारत में LPG से जुड़े साइबर फ्रॉड के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। देशभर में अलर्ट जारी किया गया है क्योंकि ठग गैस की कथित कमी की अफवाह फैलाकर आम लोगों को निशाना बना रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि LPG की कोई कमी नहीं है, लेकिन डर और जल्दबाज़ी का फायदा उठाकर साइबर अपराधी लोगों को फर्जी मैसेज, कॉल और लिंक के जरिए जाल में फंसा रहे हैं।

फर्जी बुकिंग लिंक, WhatsApp APK मैलवेयर और UPI फ्रॉड का बड़ा खुलासा

महाराष्ट्र, पंजाब, ओडिशा, कर्नाटक और उत्तराखंड जैसे कई राज्यों से एक समान पैटर्न सामने आया है। लोगों को SMS और WhatsApp पर ऐसे मैसेज मिल रहे हैं जिनमें LPG बुकिंग फेल, पेमेंट एरर या कनेक्शन बंद होने की चेतावनी दी जाती है। इन मैसेज में फर्जी वेबसाइट लिंक या नकली कस्टमर केयर नंबर दिए जाते हैं। कई मामलों में यूजर्स को “ऑफिशियल” दिखने वाले ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है, जो बाद में फ्रॉड का कारण बनते हैं।

साइबर सुरक्षा कंपनी TraceX Labs के अनुसार, यह घोटाला अब केवल साधारण फिशिंग तक सीमित नहीं है। हमलावर ट्रोजन से संक्रमित APK फाइल्स का उपयोग कर रहे हैं, जिनमें Remote Access Trojan (RAT) छिपा होता है। जैसे ही यूजर इसे इंस्टॉल करता है, हमलावर उसके फोन का पूरा कंट्रोल हासिल कर लेते हैं—जिससे वे OTP पढ़ सकते हैं, मैसेज एक्सेस कर सकते हैं और बैंकिंग व UPI ऐप्स तक पहुंच बना सकते हैं।

इस फ्रॉड को और खतरनाक बनाता है एडवांस UPI बायपास टेक्निक। हमलावर टोकन-बेस्ड सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर बिना यूजर की अनुमति के ट्रांजैक्शन कर देते हैं। इससे पैसे बहुत तेजी से खाते से निकल जाते हैं और कई बार यूजर को पता भी नहीं चलता।

एक और बड़ा खतरा इसका तेजी से फैलना है। एक बार डिवाइस संक्रमित होने के बाद, मैलवेयर खुद-ब-खुद यूजर के कॉन्टैक्ट्स को फर्जी लिंक और APK फाइल्स भेजता है। क्योंकि ये मैसेज किसी जान-पहचान वाले के नंबर से आते हैं, लोग आसानी से भरोसा कर लेते हैं और यह स्कैम तेजी से फैलता जाता है।

इसके अलावा ठग नकली LPG बुकिंग वेबसाइट्स, कैशबैक वाले QR कोड और स्क्रीन-शेयरिंग ऐप्स का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। यूजर्स को लगता है कि वे सामान्य प्रक्रिया जैसे सिलेंडर बुक करना या KYC अपडेट कर रहे हैं, लेकिन वास्तव में वे अपनी संवेदनशील जानकारी ठगों को दे रहे होते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह एक सुनियोजित साइबर अपराध नेटवर्क है, जिसमें सोशल इंजीनियरिंग, मैलवेयर और फाइनेंशियल फ्रॉड का कॉम्बिनेशन शामिल है। ठग लोगों के डर, भरोसे और जल्दबाज़ी का फायदा उठाकर उन्हें फंसा रहे हैं।

बचाव के लिए लोगों को सलाह दी जाती है कि वे केवल आधिकारिक LPG वेबसाइट या ऐप का ही उपयोग करें, किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और अनवेरिफाइड APK फाइल्स डाउनलोड न करें। OTP, UPI PIN या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यहां तक कि जान-पहचान वाले नंबर से आए मैसेज पर भी बिना जांच भरोसा न करें।

सरकारी एजेंसियां लगातार जागरूकता बढ़ाने में लगी हैं। यदि किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी का शक हो, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करें।

यह बढ़ता हुआ LPG स्कैम यह दिखाता है कि भारत में साइबर अपराध अब और अधिक एडवांस और खतरनाक होते जा रहे हैं। ऐसे में सतर्कता और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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