नई दिल्ली। साल 2026 की होली सामान्य नहीं बल्कि आध्यात्मिक और खगोलीय दृष्टि से अत्यंत विशिष्ट होने जा रही है। प्रसिद्ध सेलिब्रिटी एस्ट्रोलॉजर और आध्यात्मिक मार्गदर्शक स्वाती पांडेय के अनुसार, इस बार होलिका दहन और उसके अगले दिन लगने वाले ग्रहण का एक ऐसा दुर्लभ संयोग बन रहा है जो कई दशकों के बाद देखने को मिलेगा। इस खगोलीय घटना का सीधा असर मानवीय ऊर्जा, मानसिक स्थिति और कर्मफल पर पड़ेगा, जिसके लिए अभी से सतर्क रहने और विशेष नियमों का पालन करने की आवश्यकता है।
स्वाती पांडेय ने इस विशेष समय के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उनके अनुसार, 2 मार्च 2026 को सोमवार के दिन रात्रि 8:30 बजे होने वाला होलिका दहन केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि नकारात्मक ऊर्जा और शत्रु बाधा को समाप्त करने का महामुहूर्त है। इस समय व्यक्ति को अपने भीतर की किसी एक बड़ी बुराई या नकारात्मक विचार को त्यागने का संकल्प लेना चाहिए। इसी दिन सत्यनारायण व्रत कथा का श्रवण करना परिवार में सुख-समृद्धि लाने वाला और ग्रहण के दुष्प्रभावों को कम करने वाला साबित होगा।
अगले दिन यानी 3 मार्च 2026, मंगलवार को लगने वाला ग्रहण दोपहर 3:20 बजे शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक चलेगा। स्वाती पांडेय ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यह समय आध्यात्मिक रूप से बेहद संवेदनशील है, इसलिए इस दौरान भोजन करने, यात्रा करने या कोई भी नया निर्णय लेने से बचना चाहिए। विशेषकर गर्भवती महिलाओं को इस काल में अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मंदिर के कपाट भी सुबह 6:20 बजे ही बंद कर दिए जाएंगे, जो शाम 7:00 बजे शुद्धिकरण के बाद ही खुलेंगे। इस दौरान मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से दूरी बनाकर महामृत्युंजय मंत्र या विष्णु मंत्र का जाप करना आत्मिक शांति के लिए सर्वोत्तम रहेगा।
ग्रहण की समाप्ति के बाद 4 मार्च 2026 को रंगों वाली होली मनाई जाएगी। स्वाती पांडेय का मानना है कि ग्रहण के अंधकार के बाद रंगों का यह उत्सव सकारात्मक ऊर्जा के पुनर्जन्म का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने और पुराने मनमुटाव भुलाकर रिश्तों में नए रंग भरने का आह्वान किया है। उनका आध्यात्मिक संदेश स्पष्ट है कि पहले भीतर की बुराई को जलाएं, फिर आत्ममंथन करें और अंत में जीवन को उत्सव के रंगों से सराबोर करें।



