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हजारों श्रद्धालुओं की गूँज से भक्तिमय हुआ राजगढ़: श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर में सामूहिक चालीसा पाठ का भव्य आयोजन








 




  राजगढ़। हिंदू नववर्ष के पावन अवसर पर राजगढ़ सहित आसपास का पूरा ग्रामीण अंचल हनुमान भक्ति के रंग में सराबोर नजर आया। चैत्र सुदी एकम यानी 19 मार्च के उपलक्ष्य में गुरुवार को श्री खेड़ापति हनुमान मंदिर के प्रांगण में एक ऐतिहासिक आयोजन संपन्न हुआ। यहाँ आयोजित सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ में न केवल राजगढ़ बल्कि आसपास के गाँवों के अनगिनत भक्तों ने उपस्थित होकर भक्ति की नई इबारत लिख दी। इस आयोजन को लेकर पिछले 15 दिनों से तैयारियाँ चल रही थीं और भक्तों को आमंत्रित किया जा रहा था। गुरुवार को यह प्रयास उस समय सिद्ध हुआ जब हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने एक स्वर में हनुमान चालीसा का पाठ किया।

  मंदिर के पुजारी पं. सत्यनारायण व्यास ने जानकारी देते हुए बताया कि इस बड़े पैमाने पर आयोजित कार्यक्रम में पुरुषों के साथ-साथ मातृशक्ति ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया,जो सनातन धर्म की मजबूती का एक जीवंत संदेश है।

   इस पुनीत कार्य में राजगढ़ नगर के साथ ही छड़ावद, धुलेट, कंजरोटा, दलपुरा और अमोदिया जैसे ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँचे। दोपहर 2:00 बजे से संगीतमय सुंदरकांड पाठ का शुभारंभ किया गया, जिसमें भक्तों ने भक्ति भाव से शिरकत की। इसके पश्चात शाम 6:00 बजे सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ शुरू हुआ, जिसकी गूँज पूरे क्षेत्र में सुनाई दी।

  आयोजन की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदिर परिसर छोटा पड़ गया और आसपास की जगहों पर भी पैर रखने की जगह नहीं थी। शाम 5:30 बजे भगवान श्री खेड़ापति हनुमानजी महाराज की भव्य महाआरती की गई। इस दौरान मंदिर परिसर को विशेष साज-सज्जा और दीपों की रोशनी से जगमग किया गया था। महाआरती के पश्चात उपस्थित हजारों भक्तों के बीच महाप्रसादी का वितरण किया गया। इस धार्मिक उत्सव में एक खास बात यह भी रही कि कई अभिभावक अपने बच्चों को साथ लेकर पहुँचे ताकि वे उन्हें धर्म, संस्कार और अपनी रीति-रिवाजों से जोड़ सकें।

इस आयोजन की सफलता में इंटरनेट और सोशल मीडिया की भी बड़ी भूमिका रही। धर्म क्षेत्र की दिग्गज हस्तियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वीडियो संदेशों के माध्यम से भक्तों से शामिल होने की अपील की थी। इस अभियान में प्रमुख रूप से ज्योतिषाचार्य श्री पुरुषोत्तम भारद्वाज, पं. सुभाष शर्मा दत्तीगांव, दयारामदास, जीम हंत पीपलखुंटा, निरंजनदासजी वैष्णव, ऋषिराज वैष्णव, प्रेमदासजी महाराज, गुरुजी श्रीमहंत रामेश्वरगिरीजी, जैनाचार्य श्री विश्वरत्नसागर सूरीश्वरजी और जीत रत्न सागरजी जैसे संतों का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। साथ ही नीलेश सोनी, गौरव दुबे, लक्ष्मण डामेचा, डॉ. बल बहादुर सिंह,नरसिंह बैरागी,अंतिम पंवार,और प्रभुसिंह राजपूत सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने अपनी सक्रिय भागीदारी निभाई।
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