कल्याण/ महाराष्ट्र । 19 फरवरी छत्रपति शिव जयंती के अवसर पर प्रो. डॉ. दिनेश गुप्ता आनंदश्री ने छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा जीते गए 422 ऐतिहासिक किलों के नामों से निर्मित शिवछत्रपति महाराज का एक अद्वितीय और आविष्कारक चित्र तैयार कर इतिहास, कला और शोध का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया है। यह चित्र न केवल एक कलाकृति है, बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए एक महत्वपूर्ण सबक और जीवंत प्रेरणा भी समाहित किए हुए है।
इस प्रेरणादायक कृति की सोच उन्हें पिछले वर्ष उस समय मिली, जब छत्रपति शिवाजी महाराज से जुड़े 12 ऐतिहासिक किलों को यूनेस्को द्वारा ‘वर्ल्ड हेरिटेज’ का दर्जा प्रदान किया गया। उसी क्षण प्रो. डॉ. गुप्ता ने यह संकल्प लिया कि शिवाजी महाराज के पराक्रम, रणनीति और राष्ट्रनिर्माण की भावना को एक ऐसे चित्र में ढाला जाए, जो आने वाली पीढ़ियों को इतिहास से जोड़ सके।
इस पूरे पोर्ट्रेट को साकार करने में डॉ. गुप्ता को लगातार दो दिन का समय लगा। इस रचना का सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण पक्ष रहा—
सभी 422 किलों पर गहन शोध, उनके सही नाम, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और फिर उन्हें अत्यंत सूक्ष्म कलात्मक शैली में शिवाजी महाराज के चेहरे और तेजस्वी व्यक्तित्व में रूपांतरित करना।
यह चित्र केवल एक दृश्य कला नहीं, बल्कि—शिवाजी महाराज के शौर्य और नेतृत्व का ऐतिहासिक दस्तावेज, भारतीय संस्कृति और इतिहास के गौरव का दृश्य रूप तथा राष्ट्रप्रेरणा और आत्मगौरव का सशक्त प्रतीक है।
विशेष उल्लेखनीय है कि प्रो. डॉ. दिनेश गुप्ता आनंदश्री इससे पूर्व भी अपनी आविष्कारक कला के माध्यम से छह बार गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करा चुके हैं। उनका मानना है कि “पुरस्कार मिले या न मिले, आविष्कार की प्रक्रिया हर दिन चलती रहनी चाहिए।”
उनका यह चित्र आने वाली पीढ़ी को यह संदेश देता है कि इतिहास को केवल पढ़ा ही नहीं, बल्कि रचनात्मकता, शोध और समर्पण के साथ जिया भी जा सकता है। प्रो. डॉ. गुप्ता का यह प्रयास कला को साधना और इतिहास को प्रेरणा में बदलने वाला एक महत्वपूर्ण योगदान माना जा रहा है।



