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इंदौर में 'जात्रा–2026' का भव्य शुभारम्भ; जनजातीय रंग,सुर और स्वाद से सराबोर हुआ गांधी हॉल परिसर




 



   इंदौर। शहर के ऐतिहासिक गांधी हॉल परिसर में आज 'जात्रा–2026' का भव्य शुभारम्भ हुआ। तीन दिवसीय इस उत्सव के पहले दिन जनजातीय संस्कृति, लोकनृत्य और पारंपरिक व्यंजनों की सुगंध से पूरा परिसर ऊर्जा व उल्लास से भर गया। कार्यक्रम के शुभारम्भ अवसर पर शनि साधक पूज्य गुरुजी दादू महाराज, सांसद शंकर लालवानी, नगर महापौर पुष्यमित्र भार्गव, भाजपा नगर उपाध्यक्ष भरत पारख एवं स्टेट प्रेस क्लब अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल विशेष रूप से उपस्थित रहे। इस अवसर पर राजनीतिक रणनीतिकार डॉ. अतुल मलिकराम को दीपक जैन के द्वारा पिछड़ा वर्ग एवं आदिवासी समाज के उत्थान हेतु निरंतर कार्यरत रहने के लिए सम्मानित किया गया। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर आयोजन का विधिवत शुभारम्भ किया और जनजातीय कलाकारों की प्रस्तुतियों का अवलोकन किया।

  जनजातीय सामाजिक सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस आयोजन की थीम इस वर्ष 'पारंपरिक रंग, सुर और स्वाद' रखी गई है। पहले दिन प्रदेश के विभिन्न आदिवासी अंचलों से आए कलाकारों ने पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए, जिनमें भगोरिया और मांदल गीतों की गूंज ने वातावरण को जीवंत कर दिया। भगोरिया पर्व पर आधारित विशेष फोटो प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही। धार, झाबुआ और अलीराजपुर अंचल की प्रसिद्ध पिथोरा कला को भी इस बार विशेष स्थान दिया गया है। ट्राइबल फाउंडेशन द्वारा स्थापित पिथोरा आर्ट गैलरी में 25 से अधिक चुनिंदा पिथोरा पेंटिंग्स प्रदर्शित की गई हैं, जिनमें आदिवासी जीवन, आस्था, प्रकृति और उत्सवों की झलक सजीव रूप में दिखाई दे रही है।

  समिति के अध्यक्ष देवकीनंदन तिवारी ने उद्घाटन समारोह के पश्चात कहा, "आज 'जात्रा–2026' का शुभारम्भ जिस उत्साह और जनसहभागिता के साथ हुआ, वह हमारे लिए अत्यंत संतोष और गर्व का विषय है। पहले ही दिन शहरवासियों ने जिस प्रकार जनजातीय कला, पिथोरा चित्रकला, लोकनृत्य और पारंपरिक व्यंजनों में रुचि दिखाई, उससे यह स्पष्ट है कि समाज अपनी जड़ों से जुड़ना चाहता है। हमारा उद्देश्य केवल सांस्कृतिक प्रस्तुति तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी जीवन के मूल्यों प्रकृति के प्रति सम्मान, सामूहिकता और परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है। हमें विश्वास है कि आगामी दो दिनों में भी इंदौरवासी बड़ी संख्या में आकर इस सांस्कृतिक महोत्सव को सफल बनाएंगे।"

  इस अवसर पर सांसद शंकर लालवानी और पूज्य गुरुजी दादू महाराज ने संयुक्त रूप से कहा,"हाल ही में हुई बारिश के बावजूद जिस उत्कृष्ट व्यवस्था और भव्यता के साथ 'जात्रा–2026' का आयोजन किया गया है, वह आयोजन समिति की प्रतिबद्धता और समर्पण को दर्शाता है। पूरे आदिवासी अंचल की संस्कृति, कला और परंपराओं को एक ही मंच पर लाना अपने आप में सराहनीय प्रयास है। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, बल्कि समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी है। हम आयोजन समिति को इस सफल शुरुआत के लिए बधाई देते हैं और आशा करते हैं कि यह उत्सव आने वाले दिनों में और भी अधिक जनसहभागिता के साथ आगे बढ़ेगा।"

  कार्यक्रम संयोजक गिरीश चव्हाण ने उद्घाटन के बाद कहा,"आज जात्रा–2026 के पहले दिन जिस तरह जनप्रतिनिधियों, संतजनों और शहरवासियों की गरिमामयी उपस्थिति रही, उससे आयोजन की भव्यता और उद्देश्य दोनों स्पष्ट हुए हैं। जनजातीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से वातावरण को जीवंत बना दिया। हमारा प्रयास था कि यह आयोजन इंदौर और जनजातीय अंचलों के बीच संवाद का सशक्त सेतु बने, और पहले ही दिन मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया से हमें विश्वास है कि आने वाले दिनों में यह उत्सव और अधिक ऊर्जावान रूप लेगा।"

   सह-संयोजक आशीष गुप्ता ने कहा,"उद्घाटन के साथ ही हस्तशिल्प प्रदर्शनी और पारंपरिक व्यंजनों के स्टॉल पर शहरवासियों की अच्छी सहभागिता देखने को मिली। लोगों ने न केवल जनजातीय शिल्पकृतियों में रुचि दिखाई, बल्कि कलाकारों से सीधे संवाद भी किया। हमारा उद्देश्य स्थानीय कलाकारों को मंच और बाजार दोनों उपलब्ध कराना है। पहले दिन की सफलता से उत्साहित होकर हम आगामी दो दिनों में और बेहतर अनुभव देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

  गांधी हॉल परिसर को मालवा-निमाड़ की पारंपरिक शैली में सजाया गया है। दीवार सज्जा, अलंकरण और मंच व्यवस्था में जनजातीय सौंदर्यबोध की झलक स्पष्ट दिखाई दे रही है। तीन दिवसीय 'जात्रा–2026' इंदौरवासियों के लिए जनजातीय संस्कृति, पर्यावरण के प्रति संवेदनशील जीवनशैली और लोकधरोहर को करीब से जानने का अनूठा अवसर है। उल्लेखनीय है कि 20 से 22 फरवरी तक चलने वाले इस आयोजन का मीडिया पार्टनर पीआर 24x7 है। आयोजन समिति ने शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता की अपील की है।
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