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व्यापार के साथ आरोग्य की सेवा: राजगढ़ के सराफा व्यवसायी कमलेश सोनी के योग का दुनिया में असर




 

 
  राजगढ़ (धार)। मध्य प्रदेश के एक छोटे से जिले राजगढ़ की मिट्टी से उपजी योग की शक्ति आज अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को लांघ चुकी है। पेशे से सराफा व्यापारी लेकिन सेवा से योग साधक कमलेश सोनी आज केवल राजगढ़ ही नहीं, बल्कि वैश्विक पटल पर एक नई पहचान बना चुके हैं। उनके योग कौशल की चर्चा अब भारत के विभिन्न राज्यों से लेकर ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों तक पहुँच चुकी है, जहाँ असाध्य रोगों से जूझ रहे लोग उनके मार्गदर्शन में नया जीवन पा रहे हैं।

ऑस्ट्रेलिया से अमरावती तक: योग बना वैश्विक ढाल

   कमलेश सोनी की ख्याति का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सात समुंदर पार ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली छाया बंधु,जो थर्ड स्टेज के ब्रेन ट्यूमर जैसी जानलेवा बीमारी से जूझ रही थीं, उन्हें कमलेश सोनी के योग परामर्श से अभूतपूर्व लाभ मिला। इसी तरह महाराष्ट्र के अमरावती के वासुदेव नसूड़े भी उनके योग विज्ञान के मुरीद हैं।

  मध्य प्रदेश के हृदय स्थल भोपाल के हमीदिया अस्पताल में पदस्थ वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. जे.पी. सिंह के मामले ने तो चिकित्सा जगत को भी अचंभित कर दिया है। कैंसर से पीड़ित होने के बाद कमलेश सोनी के बताए गए योग को अपनाकर डॉ. सिंह ने वह रिकवरी दिखाई कि उन्हें कीमोथेरेपी जैसी जटिल प्रक्रिया तक नहीं लेनी पड़ी। यह इस बात का प्रमाण है कि कमलेश जी का योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि एक संपूर्ण उपचार पद्धति बन चुका है।

मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में फैला सेवा का नेटवर्क

  राजगढ़ के सोनी धर्मशाला से शुरू हुई यह मुहिम आज एक विशाल वटवृक्ष बन गई है। मध्य प्रदेश के अलावा राजस्थान,महाराष्ट्र और गुजरात जैसे राज्यों से भी लोग अपनी शारीरिक और मानसिक व्याधियों के समाधान के लिए कमलेश सोनी से संपर्क करते हैं। विशेषकर मोहनखेड़ा तीर्थ में प्रवास के दौरान उन्होंने कई जैन संतों और साध्वियों को योग की बारीकियां सिखाईं, जिससे उनके स्वास्थ्य में क्रांतिकारी सुधार आए।

संघर्ष की भट्टी में तपकर निखरा व्यक्तित्व

  कमलेश सोनी के इस सफर की शुरुआत स्वयं के दुखों से हुई थी। 47 वर्षीय कमलेश सोनी कभी माइग्रेन,पाइल्स और टॉन्सिल जैसी बीमारियों से लड़ रहे थे। जिम, तैराकी, स्केटिंग और साइकिलिंग जैसे हर संभव प्रयास विफल होने के बाद उन्होंने योग को अंतिम विकल्प के रूप में अपनाया। स्वामी रामदेव जी के योग सूत्रों को आत्मसात कर उन्होंने न केवल खुद को निरोगी किया, बल्कि इसे अपने जीवन का मिशन बना लिया।

डिजिटल योग और आयुष मंत्रालय का सम्मान

  कोरोना काल में कमलेश सोनी ने मोबाइल व वीडियो कॉल के जरिए मरीजों को योग कराकर स्वस्थ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी इस सेवा के लिए भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने उन्हें प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। हरिद्वार में योग निरीक्षकों के साक्षात्कार के बाद उन्हें आधिकारिक योग शिक्षक का प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ।

समर्पित टीम: निरंतरता ही सफलता की कुंजी

  कमलेश सोनी की सबसे बड़ी उपलब्धि उनकी वह टीम है जो उनकी अनुपस्थिति में भी सेवा की इस मशाल को जलाए रखती है। रितेश अम्बोर, राहुल माली और नितिन धारीवाल जैसे समर्पित सहयोगी प्रतिदिन सुबह 5:30 से 7:25 बजे तक योग कक्षाएं संचालित करते हैं। आज सोनी धर्मशाला में 30 से अधिक महिला-पुरुषों का समूह नियमित रूप से योग साधना कर रहा है।




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