पटना के गांधी मैदान में इस वर्ष का बहुप्रतीक्षित पटना पुस्तक मेला भव्य तरीके से शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर मेले का उद्घाटन किया, इसके बाद उन्होंने अलग-अलग प्रकाशन संस्थानों के स्टॉलों का दौरा कर वहां उपलब्ध पुस्तकों और प्रदर्शनी का अवलोकन किया। बड़ी संख्या में पुस्तक प्रेमी और विशिष्ट अतिथियों की मौजूदगी ने उद्घाटन समारोह को खास बना दिया। इस वर्ष का मेला बिहार के चर्चित कथाकार अवधेश प्रीत को समर्पित है, जो साहित्य जगत के लिए गर्व की बात है।
यह पुस्तक मेला 16 दिसंबर तक चलेगा और लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रवेश रामगुलाम चौक स्थित गांधी मैदान के 10 नंबर गेट से दिया जा रहा है। खास बात यह है कि स्कूल ड्रेस में आने वाले बच्चों के लिए प्रवेश पूरी तरह निशुल्क रखा गया है, ताकि नई पीढ़ी को पुस्तकों की दुनिया से जोड़ा जा सके। मेले में करीब 200 से अधिक स्टॉल लगाए गए हैं। डॉ. मोनी त्रिपाठी के संयोजन में प्रतिदिन स्कूल उत्सव कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें विभिन्न विद्यालयों के छात्र सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे।
साहित्य और पत्रकारिता जगत की कई चर्चित हस्तियां भी इस मेले का हिस्सा बनेंगी। ‘संपादक से संवाद’ जैसे कार्यक्रम में देश के प्रमुख पत्रकार सीधे पाठकों से चर्चा करेंगे और संवाद को नई दिशा देंगे। इसी तरह कई युवा साहित्यकार भी अपनी रचनाओं और विचारों के माध्यम से पाठकों से जुड़ेंगे। इस वर्ष मेले के विभिन्न भवनों और स्थलों को भारतीय आचार्यों के नाम पर रखा गया है, जिससे भारतीय दर्शन और ज्ञान परंपरा का सम्मान झलकता है।
मेले की थीम ‘वेलनेस-अवे आफ लाइफ’ रखी गई है। स्वास्थ्य जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए ‘स्वास्थ्य-संवाद’ नामक राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें देश के प्रमुख डॉक्टर लोगों से प्रत्यक्ष संवाद करेंगे। इसके अतिरिक्त पटना लिटरेरी फेस्टिवल और पुस्तक मेले के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय मुशायरे का आयोजन भी होगा, जिसमें कई प्रसिद्ध शायर और कवि अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी मेले में भरमार रहेगी। भव्य कवि सम्मेलन जहां साहित्य प्रेमियों को जोड़कर रखेगा, वहीं नुक्कड़ नाटकों और रंगमंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से युवाओं की प्रतिभा को प्रोत्साहन मिलेगा। नाट्य जगत से जुड़े विशिष्ट कलाकारों को भी सम्मानित किया जाएगा। कुल मिलाकर, पटना पुस्तक मेला इस वर्ष ज्ञान, साहित्य, कला और स्वास्थ्य संवाद का एक शानदार संगम साबित होने जा रहा है, जो हर आयु के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनेगा।



