भोपाल/समोई (झाबुआ): मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़े धार्मिक-सांस्कृतिक फैसले की घोषणा करते हुए कहा है कि धार और झाबुआ जिले में भगवान श्रीकृष्ण की स्मृतियों से जुड़े स्थानों को 'श्रीकृष्ण पाथेय' में शामिल कर तीर्थ स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा। यह घोषणा उन्होंने झाबुआ जिले के ग्राम समोई में आयोजित श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म महोत्सव को भोपाल से वर्चुअली संबोधित करते हुए की।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में उपस्थित हजारों श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा, "आज झाबुआ-निमाड़ में आनंद बरस रहा है।" उन्होंने कहा कि इस पहल से न केवल इन स्थानों का धार्मिक महत्व बढ़ेगा, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
प्रणामी सम्प्रदाय के महोत्सव में आध्यात्मिक संदेश
इस धर्म महोत्सव का आयोजन प्रणामी सम्प्रदाय द्वारा किया गया, जो भगवान श्रीकृष्ण को अपना आराध्य मानता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महोत्सव "सर्वधर्म समभाव और सनातन मूल्यों को आगे बढ़ा रहा है" और इसे "परंपरा, भक्ति, समाज सुधार और आध्यात्मिक एकता का अद्भुत संगम" बताया।
प्रणामी सम्प्रदाय के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश
मुख्यमंत्री यादव ने प्रणामी सम्प्रदाय के 400 साल पुराने इतिहास को याद करते हुए कहा कि इसे सद्गुरु देवचंद्र जी महाराज ने शुरू किया था और यह "अखंड सनातन परंपरा का प्रकाश स्तंभ" है। उन्होंने बताया कि इस सम्प्रदाय के प्रचार-प्रसार में स्वामी प्राणनाथ और उनके शिष्य महाराज छत्रसाल का विशेष योगदान रहा। प्रणामी सम्प्रदाय के तीन प्रमुख धामों में से एक पद्मावती पुरी मध्य प्रदेश के पन्ना शहर में स्थित है।
मंच पर मौजूद गणमान्य व्यक्ति
कार्यक्रम स्थल समोई में अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान और धार-झाबुआ सांसद श्रीमती अनीता नागर सिंह चौहान सहित कई जनप्रतिनिधि एवं संत महात्मा मौजूद रहे।
भगवान श्रीकृष्ण के सार्वभौमिक संदेश को याद किया
मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं किया। उन्होंने श्रीकृष्ण प्रणामी धर्म को "कृष्ण भक्ति, आध्यात्मिक ज्ञान और सार्वभौमिक भाईचारे के सिद्धांतों पर आधारित" एक मार्ग बताया।
शुभकामनाएं और आशीर्वाद
मुख्यमंत्री ने प्रणामी सम्प्रदाय के अनुयायियों एवं सभी श्रद्धालुओं को महोत्सव की शुभकामनाएं दीं और भगवान श्रीकृष्ण, श्यामाजी महारानी, सद्गुरु देवचंद्र, स्वामी प्राणनाथ, वृंदावन दास महाराज और नटवरदास महाराज का सभी पर कृपा-आशीर्वाद बनाए रखने की कामना की।
मुख्य बिंदु:
1. ऐतिहासिक घोषणा: धार-झाबुआ क्षेत्र के श्रीकृष्ण स्थल 'श्रीकृष्ण पाथेय' में शामिल होंगे और तीर्थ स्थल के रूप में विकसित किए जाएंगे।
2. धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को बल: इससे क्षेत्र की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को नया आयाम मिलेगा।
3. पर्यटन और विकास को गति: नए तीर्थ स्थलों के विकास से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद।
4. प्रणामी सम्प्रदाय का सम्मान: 400 वर्ष पुराने इस सम्प्रदाय के योगदान और मूल्यों को राज्य सरकार द्वारा रेखांकित किया गया।
5. सर्वधर्म समभाव का संदेश: महोत्सव के माध्यम से एकता और सनातन मूल्यों को प्रसारित करने पर जोर।
यह घोषणा मध्य प्रदेश सरकार की धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं प्रचार की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।



