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झारखंड की सत्ता में JMM गठबंधन की समीक्षा पर विचार कर रहा, कांग्रेस और RJD के साथ संबंधों की समीक्षा शुरू

 

बिहार विधानसभा चुनावों के नतीजों ने झारखंड के राजनीतिक परिदृश्य में नई हलचल पैदा कर दी है। महागठबंधन की बिहार में करारी हार के बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) अब राज्य में अपने गठबंधन कांग्रेस और RJD के संबंधों की समीक्षा करने पर विचार कर रहा है।

JMM के महासचिव विनोद पांडे ने स्पष्ट किया कि बिहार चुनाव के दौरान RJD और कांग्रेस ने JMM के साथ कोई समन्वय नहीं किया और दोनों पार्टियों ने JMM को हल्के में लिया। ध्यान देने वाली बात यह है कि महागठबंधन में शामिल होने के बावजूद RJD ने JMM को एक भी सीट नहीं दी, और कांग्रेस ने भी इस मामले में कोई पहल नहीं की।

बाद में JMM ने बिहार विधानसभा चुनावों में हिस्सा न लेने का निर्णय लिया। पार्टी का दावा है कि यह कदम उसके सहयोगी दलों की राजनीतिक साजिश का परिणाम था, जिसने JMM को चुनावी सीटों से वंचित कर दिया। शुरुआत में JMM 16 सीटों पर चुनाव लड़ने को तैयार था, लेकिन बाद में संख्या घटाकर 12 कर दी गई। चुनावों के करीब आते-आते पार्टी केवल छह सीटों पर संतोष करने को तैयार थी, लेकिन कांग्रेस और RJD ने इसे मंजूरी नहीं दी। बिहार चुनावों के नतीजों का प्रभाव झारखंड की सत्ता पर भी दिखने लगा है। कांग्रेस और RJD ने राज्य के मौजूदा गठबंधन में संभावित असंतुलन को संभालने के लिए तत्काल कदम उठाए।

वर्तमान में JMM के पास पांच मंत्री हैं, जिनमें मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शामिल हैं। एक सीट रामदास सोरेन के निधन के कारण खाली है। कांग्रेस के चार मंत्री हैं, जबकि RJD का एक मंत्री संजय प्रसाद यादव सरकार में शामिल है। झारखंड विधानसभा में कुल 81 सीटें हैं, और बहुमत के लिए 41 सीटें जरूरी हैं। वर्तमान गठबंधन में JMM के 34, कांग्रेस के 16, RJD के 4 और CPI(M-L) के 2 सदस्य शामिल हैं, जो कुल 56 सीटें बनती हैं, यानी बहुमत से 15 अधिक। यदि JMM किसी भी तरह कांग्रेस के खिलाफ कोई कदम उठाता है, तो इससे राज्य सरकार में अस्थिरता पैदा हो सकती है। हालांकि, RJD को घटाकर भी सरकार के पास 52 सीटें हैं, जो बहुमत के लिहाज से पर्याप्त मानी जाती हैं।

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