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महाबोधि महाविहार को बौद्ध समाज के अधीन करने की मांग के समर्थन में भव्य सर्वदलीय मोर्चा — तुषार तानाजी कांबले


 दिनांक: 14 अक्टूबर 2025 (मुंबई)
महाबोधि महाविहार बौद्ध धर्म का सबसे पवित्र और ऐतिहासिक तीर्थस्थल है, जो पूरे विश्व में बौद्ध संस्कृति और करुणा का प्रतीक माना जाता है। इस पवित्र स्थल को बौद्ध समाज के प्रशासनिक देखरेख में लाने की मांग को लेकर 14 अक्टूबर 2025 को मुंबई में एक भव्य सर्वदलीय मोर्चा आयोजित किया जा रहा है।
यह मोर्चा केंद्रीय सामाजिक न्याय राज्यमंत्री और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय डॉ. रामदास आठवले जी के मार्गदर्शन में निकाला जाएगा।

देशभर से बौद्ध अनुयायी, आंबेडकरी कार्यकर्ता, मातंग समाज के प्रतिनिधि, भिक्खू संघ तथा विभिन्न सामाजिक संगठन इस ऐतिहासिक पहल में भाग लेंगे।

तुषार तानाजी कांबले का वक्तव्य:

“मैं स्वयं मातंग समाज से हूं और इस न्यायपूर्ण प्रयास का हिस्सा बनकर गर्व महसूस कर रहा हूं।
हमारा समाज हमेशा से समानता, न्याय और भाईचारे के लिए कार्य करता आया है।
आज हम सभी बौद्ध अनुयायी, आंबेडकरी समाज और सामाजिक न्याय में विश्वास रखने वाले नागरिक मिलकर एक सकारात्मक और शांतिपूर्ण संदेश देना चाहते हैं — कि महाबोधि महाविहार बौद्ध समाज की आस्था, संस्कृति और इतिहास का प्रतीक है।
इसे बौद्ध समाज के संरक्षण में लाना हमारे सांस्कृतिक सम्मान और न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।”

सर्वदलीय अपील:

तुषार कांबले ने सभी बौद्ध अनुयायियों, मातंग समाज के सदस्यों, आंबेडकरी कार्यकर्ताओं और सामाजिक न्याय के समर्थकों से 14 अक्टूबर को इस ऐतिहासिक मोर्चे में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है।

उन्होंने आगे कहा —

“यह आंदोलन किसी एक वर्ग का नहीं, बल्कि समानता, न्याय और बौद्ध विरासत के सम्मान का प्रतीक है।
हमारा उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से समाज के हर वर्ग को जोड़ना और बौद्ध संस्कृति के प्रति सम्मान का संदेश देना है।
मैं सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों से आग्रह करता हूं कि वे इस अभियान में सहभागी बनें और बौद्ध समाज की इस न्यायपूर्ण पहल को मजबूती प्रदान करें।”

तुषार तानाजी कांबले का संदेश:

“महाबोधि महाविहार बौद्ध समाज के संरक्षण में रहे — यही हमारी आस्था, हमारा अधिकार और सांस्कृतिक न्याय की दिशा में हमारा संकल्प है।”

यह मोर्चा पूरी तरह शांतिपूर्ण, सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का प्रतीक होगा, जिसका उद्देश्य भारत की बौद्ध विरासत को सम्मानपूर्वक संरक्षित करना और न्याय तथा सद्भाव का संदेश देना है।

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