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गगनभेदी जयकारों से दीक्षार्थी की यात्रा निकाली,मुमुक्षु वही जिसे संसार मे अरुचि हो और मोक्ष में रुचि,दीक्षार्थी का हुआ बहुमान....



  राजगढ़ (धार)। शासन प्रभाविका  पूज्या श्री संयमप्रभाजी म.सा , पूज्या श्री प्रज्ञाजी म. सा , पूज्या श्री सुज्ञाजी म .सा आदि ठाणा -7 के पावन सानिध्य में आज दीक्षार्थी का अभिनन्दन किया गया ।

  मुमुक्षु किसे कहते है?जिसे संसार मे अरुचि हो और मोक्ष में रुचि हो । वैराग्य कैसे आता है? अच्छा वातावरण, सद्गुरु की प्रेरणा उत्तम निमित और स्वंय का चिंतन जागे तो वैराग्य आता है ,ऐसी समझ दीक्षार्थी को मिली और उन्हें जाना कि संसार छोड़ने जैसा है और संयम लेने जैसा है ! आपके परिवार में कोई भी दीक्षा लेने की भावना रखें तो हमेअंतराय नहीं देना चाहिए !  मुमुक्षु  दृढता  से संयम पालन करें और अपना मोक्ष लक्ष्य प्राप्त करें उक्त बाते शासन प्रभाविका महासती पूज्या श्री संयमप्रभा जी म .सा ने संयम अनुमोदन करते हुए धर्मसभा में व्यक्त किये।

 बाबूलाल मूणत के निवास से गगनभेदी जयकार यात्रा निकलकर महावीर स्थानक पर पहुंची । दीक्षार्थी जयकार  यात्रा में  श्रावक  श्राविका की उल्लासपूर्वक उपस्थिति रही।

 श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ के द्वारा दीक्षार्थी का अभिनंदन पत्र, शाल-मोती की माला से बहुमान किया गया। दोनों दीक्षार्थी का बहुमान विभिन्न त्याग प्रत्याख्यान से किया । आजीवन जमीकंद का त्याग विनोद  डोसी,अजित मेहता, अनिल चत्तर,श्रीपाल श्री श्रीमाल (लिमडी निवासी) एवं श्रीमती जागृति वीरेंद्र  वागरेचा ने और आजीवन कच्चा पानी का त्याग के प्रत्याख्यान लेकर संतोष बुरड़ ने दीक्षार्थी भाईयो का बहुमान किया । सभा में उपस्थित लगभग सभी ने 1 वर्ष तक प्रतिदिन एक सामायिक का नियम लेकर दीक्षार्थी का बहुमान किया ।

 व्याख्यान के बाद  दीक्षा अनुमोदनार्थ चौबीसी का आयोजन अर्चना महिला मंडल द्वारा किया गया।

  दीक्षार्थी के बहुमान में अनेक वक्ताओं द्वारा अपनी बात रखी अ.भा. श्री धर्मदास स्थानकवासी जैन युवा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीरज  मूणत (पेटलावद ) दीक्षार्थी श्री प्रांशुक जी के वीर पिता राकेश  का कांठेड़ , दीक्षार्थी अचलजी की माताजी श्रीमती रानी श्रीश्रीमाल तथा अन्य वक्ताओं द्वारा अपने भाव व्यक्त किये गए।

 महिला मंडल,हिमांशू मेहता ,श्रीमति नीता मूणत के द्वारा स्तवन की प्रस्तुति दी गई।

 युवा मुमुक्षु  श्री अचल श्री श्री माल ने अपने उदबोधन में कहा कि संयम की कोई उम्र नही होती है 8 वर्ष से अधिक की उम्र में  दीक्षा ली जा सकती है । 

  युवा मुमुक्षु  प्रांशुक जी कांठेड़ द्वारा बताया गया कि आचार्य भगवंत की अनंत कृपा मुझ पर बरस रही है ,मैं आगे संयम मार्ग पर चल रहा हु ,गुरु भगवन्तों द्वारा संयम मार्ग की सम्यक समझ निरन्तर  प्रदान की जा रही है ।

  कार्यक्रम का संचालन संतोष कुमार बुरड़ तथा अभिनंदन का वाचन हिमांशू मेहता द्वारा किया गया। उक्त जानकारी हितेश वागरेचा ने दी।

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