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आचार्य ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के महापुण्योत्सव का पांचवा दिन,प्रभु अभिषेक, श्री गौतमस्वामी महापूजन, आंगी-भक्ति हुई,आचार्य श्री ऋषभचन्द्रसूरि तीर्थ विकास प्रेरक थे: मुनि पीयुषचन्द्रविजय



 राजगढ़ (धार)। दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की पाट परम्परा के अष्टम पट्टधर गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. का महापुण्योत्सव 11 से 18 सितम्बर तक श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी ट्रस्ट के तत्वाधान में मुनिराज श्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज वैराग्ययशविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जिनचन्द्रविजयजी म.सा., मुनिराज श्री जनकचन्द्रविजयजी म.सा. एवं साध्वी श्री सद्गुणाश्रीजी म.सा., साध्वी श्री संघवणश्रीजी म.सा., साध्वी श्री विमलयशाश्रीजी म.सा. आदि ठाणा की निश्रा में चल रहा है ।

महापुण्योत्सव के पांचवें दिन गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के शिष्यरत्न मुनिराज श्री पीयूषचन्द्रविजयजी म.सा. ने कहा कि आचार्यश्री हमेशा जिनशासन के कार्यो में अग्रणी रहते थे । आपने श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ के विकास में अपने जीवन के 30 से अधिक वर्षो का समय तीर्थ विकास हेतु प्रदान किया । तीर्थ की छोटी से छोटी कमी को दूर करने का पूरा प्रयास किया । आपकी हमेशा सृजनात्मक कार्य शैली रही जिसके चलते आप नित नये प्रतिदिन विचार करते थे और तीर्थ में नये नये कार्यो को अंजाम देते थे । श्री मोहनखेड़ा तीर्थ के अलावा आपने अन्य श्रीसंघों में भी कई जिन मंदिरों गुरु मंदिरों की प्रतिष्ठा एवं अंजनशलाका करवायी कई मंदिरों के नवीन निर्माण की प्रेरणा प्रदान की । जिसमें विशेष रुप से महावीरजी मंदिर राजगढ़, 72 जिनालय भीनमाल, श्री विद्या पार्श्वनाथ जिनालय सरोड़ पालीताणा, महावीर बाग झाबुआ, श्री पार्श्वनाथ जिन मंदिर नीमच, दहाणु, तिलक नगर इन्दौर, बदनावर, राजगढ़, मोहनखेड़ा, खरसोदकला, पोईनाड़, मुम्बई आदि में प्रतिष्ठा एवं अंजनशलाका आपके वरद हस्तों से संपन्न हुई ।

पुण्योत्सव के अवसर पर जिन मंदिर में प्रातः प्रभुजी एवं दादा गुरुदेव के अभिषेक का लाभ श्रीमती शांतिदेवी किशोरचंदजी वर्धन परिवार द्वारा लिया गया है । श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के 108 अभिषेक का आयोजन प्रथम बार हुआ । दोपहर में श्री गौतमस्वामी महापूजन श्रीमान बाबुलालजी खिमेसरा परिवार जावरा वालों की और से हुआ एवं प्रभु की अंगरचना संघवी श्री सुगंधीलालजी वेणीरामजी सराफ परिवार की और से करवायी गयी । रात्रि भक्ति भावना का लाभ श्री मंजुलादेवी ललितकुमारजी जैन सियाणा द्वारा लिया गया । जिन मंदिर, गुरु समाधि मंदिर एवं आचार्य ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. के समाधि स्थल पर विद्युत सज्जा की गयी है ।

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