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ऑक्सीजन सहेजने पूरा परिवार जुटा है हजारों सीड बॉल बनाने,क्योंकि ये जानते हैं जीवन के लिए पेड़ कितना है जरूरी....

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 राजगढ़(धार)। नगर का एक परिवार ऐसा भी है जो कई वर्षों से पौधा रोपण कर रहे है साथ ही सीड बॉल का भी निर्माण कर रहे है । कोरोना महामारी में आक्सीजन सभी के लिए कितनी जरूरी है इसका ज्यादा अच्छे से सभी को अहसास हो गया है। इसके चलते नगर का व्यास परिवार हरियाली बढ़ाने पर ज़ोर दे रहा है । परिवार के मुखिया प्रहलाद व्यास अपनी धर्मपत्नी नर्मदा व्यास के साथ मिलकर बीजों का चयन करते है वहीं उनके पुत्र राहुल व्यास अपनी धर्मपत्नी परिधि व्यास के साथ मिलकर मिट्टी में इन बीजों को रखकर गोले बनाते है । कई वर्षों से कर रहे इस कार्य को पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ाया जा रहा है । शहर को हरा भरा रखना तथा प्रकृति को सुंदर बनाने का जुनून ऐसा है कि 65 वर्ष की आयु में भी समय दे कर सीड बॉल का निर्माण लगातार जारी है । 


कई वर्षों से बना रहे है सीड बॉल, अभी तक 10 हज़ार से ज़्यादा पौधों को रोपा

  अभी तक लगभग 10 हज़ार से ज़्यादा सीड बॉल से पौधों को उगाया है इस वर्ष 3 हज़ार सीड बॉल तैयार किए गए है जिनको वितरित किया जाएगा । ऑक्सीजन (Oxygen) संकट को देखते हुए धार जिले के पर्यावरण प्रेमी प्रहलाद व्यास और उनका परिवार अभी से आने वाली पीढिय़ों के लिए सांसें संजोने में जुट गया है। वे बरसात आने से पहले हजारों सीड बॉल (Seed Ball) तैयार कर रहे हैं ताकि ये बीज बरसात में नन्हें पौधों का आकार लेकर बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन का स्त्रोत बने। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करते हुए पूरा परिवार सीड बॉल बनाने में जुटा है। व्यास ने बताया कि इस साल एक हजार सीड बॉल तैयार कर उसे खाली स्थानों में रखेंगे जो बारिश के पानी में भीगने के साथ पौधा बनेगा और आगे चलकर पेड़ बनेगा।


जानिए कैसे तैयार होता है सीड बॉल

  सीड बॉल तैयार करने सबसे पहले बीज एकत्रित करना होगा। उपजाऊ मिट्टी के साथ गोबर खाद की बराबार मात्रा में मिश्रण तैयार कर गीला किया जाता है। उसे लड्डू के रूप में बनाकर बीचोबीच बीज डालकर बंद कर दिया जाता है। ऐसे जगह रखकर सुखाया जाता है जहां सूरज की किरण न पहुंच सके। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि धूप की किरण नहीं पडऩे से गीली मिट्टी के बीच में रहने के बाद भी बीज अंकुरित नहीं होता है। सीड बॉल को पूर्ण रूप से सूख जाने पर अपने हिसाब से खाली पड़े स्थानों पर बारिश के मौसम में छोड़ दिया जाता है। मिट्टी जैसे ही गीली होती है बीज अंकुरित हो जाएगा और नए पौधे तैयार हो जाएंगे।

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