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हर जीव में शिव बसा है- प्रो डॉ.दिनेश गुप्ता - आनंदश्री



(प्रो डॉ दिनेश गुप्ता - आनंदश्री,आध्यात्मिक व्याख्याता एवं माइन्डसेट गुरु,मुम्बई)

हर निराकार और आकार में यही शिव बसा है जिसे ऊर्जा, तरंग या एनर्जी कहते है वही सत्य है,सुंदर है शिव है। हर मनुष्य का आंतरिक और अंतिम लक्ष्य है उसी सत्य जो शिव है उसको पाना। जबकि वह उसके अंदर ही है लेकिन उसे उस शिव रूप की पहचान नही है इसलिए वह बाहर भटक रहा है। 


एक ही ऊर्जा ...एक ही शिव, लेकिन अलग अलग आभास: बिजली एक ही दौड़ रही है सभी मे, लेकिन अलग अलग उपकरण है। कोई ठंडा, कोई गर्म, कोई चित्र तो कोई इंटरनेट दिखाता है। ऊर्जा तक एक ही है। ब्रह्माण्ड तो एक ही है, सत्य और शिव भी एक है।  जो इस तरंग को जान लेता है वह शिव बनजाता है । आत्मसाक्षात्कारी कहलाता है बुद्धत्व को प्राप्त करता है। शिव को समझाने के लिए , उस अनुभव तक ले जाने के लिए महाशिवरात्रि का आयोजन किया जाता है। आप को शिव ही नही,महा शिव रात्रि को समझना है। 

शिव लक्ष्य और शिव फल है: महात्मा गौतम बुद्ध जिस सत्य को पाने के लिए महल छोड़ा और जंगल गए वह सत्य - शिव ही तो था। शिव मंजिल और रास्ता है। यही लक्ष्य और फल है। 

शिव अनदेखी ताकत है: शिवलिंग प्रकट रूप लेकिन शिव अप्रगट है। अनदेखी ताकत, शक्ति है। यह है, एहसास है, शिव है यह एक अनदेखी ताकत है।  जिन्हें आत्मसाक्षात्कार हुआ उन्होंने इसे एक रूप देने का प्रयास किया। प्रतीक के साथ समझाया । 

शिव मूर्ति प्रतीक है: शिव मूर्ति, शिवलिंग, नंदी, सांप, गंगा जल, चाँद, त्रिशूल, बेल के पत्ते, दूध का चढ़ावा, नीला कंठ, ध्यान सभी के सभी प्रतीक है,बाहर से अंदर की ओर जाने का महामार्ग है। महाशिवरात्रि तो रिमाइंडर है। आपके अपने अंदर के शिव को जानने का।

समझ का नेत्र खोलो: शिव रात्रि और महाशिवरात्रि के दिन आप ने अपने समझ का निर्माण कर दिया, समझ का नेत्र खोल दिया तो आपकी तीसरी नेत्र स्वयं ही खुल जाएगी।  

 महाशिवरात्रि कर्मकाण्ड वाला त्योहार नही अपने आप को समझने का त्योहार है। उस अदृश्य शक्ति -शिव को जानकर अभिव्यक्ति करने का नाम महाशिवरात्रि है। आपमें महासमझ बढ़े, आप महान बन कर आपकी महा अभिव्यक्ति हो। आपके अंदर का शिव बाहर आये, आपके बुद्धि से श्वेत, शुद्ध विचारो से नए समाज और राष्ट्र का निर्माण हो यही सद्भावना सहित आप सभी को जागृत महाशिवरात्रि।



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