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फायन्सर ईयर की तरह,रिश्तों का भी ईयर हो,जिसमे फिर से जीरो बैलेंस के साथ शुरुआतत हो - प्रो.दिनेश गुप्ता"आनंद श्री""


(प्रो डॉ दिनेश गुप्ता-आनंदश्री,आध्यात्मिक व्याख्याता- माइन्डसेट गुरु मुंबई)

रिश्तों में नई ताजगी का जीरो बैलेंस मंत्र अप्रैल का महीना शुरू होने के पहले सारे एकाउंट क्लोजिंग करके नए से आर्थिक व्यवहार की शुरुवात की जाती है। ऐसा प्रैक्टिस करना बहुत अच्छा होता है कि आने वाले समय की गड़बड़ी से बचा जा सके।

रिश्तों का जीरो बैलेंस: हमने सभी को कुछ न कुछ मान लिया है, जान लिया है। यही हमारे रिश्तों को खराब कर रहा हैं। अनुमान लगा कर हम जी रहे है। यह ऐसा है, वह वैसा ही है।

नई शुरुआत करे: फाइनेंस ईयर के साथ रिश्तों को भी फिर से शुरुवात करे। जीवन में कंही तो ऐसा वक्त आता है जब सब कुछ जीरो करके नए सिरे से शुरुवात की जाती है। 

भागम दौड़ में थोड़ा रुक जाए: दौड़ती हुई गाड़ी को भी पेट्रोल भरने के लिए रुकना पड़ता है। इस भागम दौड़ी की दुनिया मे हमे भी रुकने की जरूरत है, जंहा पर सारे बोझ को हल्का करते हुए,  जीरो करके नई पारी की शुरुवात करनी होती है। 

मतभेद मनभेद को माइनस करे,अच्छी यादों को प्लस करे: रिश्तों के मतभेद, मनभेद को ऋंण करे और अच्छी बातें, यांदे, सहकार्य को आगे क्रेडिट करे। यह रिश्तों का गणित है। इस फायनेंस ईयर में रिश्तों का भी ऑडिट करके उसे बढ़ाते रहे। 

रिश्तों का गणित भी बड़ा अनोखा हैं- जंहा दो में से एक जाने के बाद कुछ नही बचता।

मुस्कुराते रहे:हर परिस्थिति में मुस्कुराते रहे। रिश्तों को मजबूत बनाते रहे। गलती किसीकी भी हो पहल आप कीजिये। माफ कीजिये और आगे बढ़िए।


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