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श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन भगवान का जन्म प्रसंग वाचन हुआ



राजगढ़ (धार) म.प्र. । पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन दादा गुरुदेव की पाट परम्परा के अष्टम पट्टधर वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा., मुनिमण्डल व साध्वी मण्डल की पावनतम निश्रा में पर्युषण महापर्व के पांचवें दिन कल्पसूत्र वाचन के अन्तर्गत भगवान महावीर स्वामी का जन्म प्रसंग वाचन हुआ । जिसमें माता त्रिशला रानी द्वारा देखें गयें 14 स्वप्नों सहित पालना झुलाने व पालना ले जाने का चढ़ावा सम्पन्न हुआ । मुनीम जी बनने का लाभ- श्री मेघराज जैन, प्रथम स्वप्न गजवर- श्री सुखराज कबदी, द्वितीय वृषभ- श्री मोहनलाल जैन, तृतीय सिंह - श्री मेघराज जैन, चतुर्थ लक्ष्मीजी- श्री रणजीत जी शाह, पांचवां पुष्पमाला- श्री रेखादेवी चोपड़ा, छठा चन्द्रमां- श्री हुक्मीचंद वागरेचा, सातवां सूर्य- श्री बाबुलाल डोडियागांधी, आठवां ध्वजा- श्री प्रकाश अदाणी, नौवां कलश- श्री जयंतिलाल कंकुचोपड़ा, दसवां पद्म सरोवर- श्री राणमल धुम्बडिया, ग्यारवां शीर समुद्र- श्री विनोद शाह जी, बारहवां देवविमान- श्री राजेन्द्रकुमार शाह, तेरहवां रत्नराशी- श्री संगीता तांतेड़, चैदहवां निर्धुमअग्नि- श्री विनेश जैन व पालना झुलाने का लाभ श्री मिठालाल वेदमुथा परिवार द्वारा लिया गया । पालना श्री संदीपकुमार दिपेशकुमार लिमड़ीवालें गाजते बाजते मंदिरजी में ले गये । तत्पश्चात् भगवान महावीरस्वामी व तीर्थाधिपति आदिनाथ प्रभु एवं दादा गुरुदेव की आरती उतारी गयी । कोरोना संक्रमण को देखते हुये शासन द्वारा निधारित गाईड लाईन का पालन करते हुये पर्युषण महापर्व की आराधना की जा रही है । शासन के नियमों के अनुरुप भगवान महावीर स्वामी के जन्म प्रसंग के वाचन का प्रसारण भी आनलाईन किया गया  प्रभु की माता द्वारा देखे गये 14 दिव्य स्वप्न के चढ़ावें व उनका दर्शन भी आनलाईन करवाया गया ।
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