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श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ में आचार्यश्री, मुनि व साध्वी मण्डल के साथ चातुर्मास प्रवेश हुआ,कोरोना ने लोगों को सिखाया जीवन जीने का तरीका : आचार्य ऋषभचन्द्रसूरि




 राजगढ़ (धार) म.प्र. । दादा गुरुदेव श्रीमद्विजय राजेन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. की पाट परम्परा के अष्टम पट्टधर वर्तमान गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. व साधु-साध्वी मण्डल का मंगलमय चातुर्मास प्रवेश शासन की गाईड लाईन का पालन करते हुये श्री गुरु राजेन्द्र इन्टरनेशनल स्कूल से हुआ । चातुर्मास प्रवेश में राजगढ़, झाबुआ, राणापुर, थांदला, इन्दौर, उज्जैन, रतलाम, मन्दसौर, नीमच, खाचरोद, खरसोदकलां, खारवाकला, टाण्डा, बाग, धार, बांसवाड़ा, सुमेरपुर, मुम्बई, पुना, भाण्डुप सहित 50 से अधिक श्रीसंघों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही । चातुर्मास प्रवेश में श्री आदिनाथ राजेन्द्र जैन श्वे. पेढ़ी ट्रस्ट श्री मोहनखेड़ा महातीर्थ के महामंत्री फतेहलाल कोठारी, मेनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ, ट्रस्टी- जयंतिलाल बाफना, मांगीलाल पावेचा, बाबुलाल खिमेसरा, मेघराज जैन, संजय सराफ के साथ तीर्थ की मंत्रणा समिति के सदस्यगण विशेष रुप से उपस्थित रहे ।
    चातुर्मास प्रवेश के अवसर पर गच्छाधिपति आचार्यदेवेश श्रीमद्विजय ऋषभचन्द्रसूरीश्वरजी म.सा. ने कहा कि संसार परिवर्तनशील है परिस्थितियां हमेशा बदलती रहती है । कौन जानता था कि कोरोना जैसी महामारी की आपदा पुरे विश्व को झेलना पड़ेगी । इस कोरोना ने व्यक्ति के जीवन को झंकझोर कर रख दिया । व्यक्ति कभी घर में नहीं टिकता था पर स्वयं की जान बचाने के लिये खुद को अपने ही घर में नजर बंद करके रख दिया । यहा तक कि भगवान के मंदिरों को भी बंद कर दिया गया । व्यक्ति चाहकर भी प्रभु की पूजा अर्चना नहीं कर सका और अपने ही घर में कैद रहकर प्रभु भक्ति व स्वाध्याय में लिप्त हो गया । कोरोना ने व्यक्ति को जीवन जीने का तरीका सिखा दिया । आज व्यक्ति दो गज की दूरी का पालन करते हुये अपने चेहरे का मास्क से ढककर स्वयं को इस महामारी से बचाने का प्रयास कर रहा है । परिस्थितियां कितनी भी बदल जाये पर धर्म अपने स्थान पर स्थित है, वो कभी नहीं बदलता है । इस महामारी की मुक्ति के पश्चात् हम नये स्वस्थ भारत के साथ हर व्यक्ति का पूर्नजन्म ही होना है । बड़े-बड़े आचार्य भगवन्तों के चातुर्मास स्थलों में परिवर्तन हुआ है । संतों ने भी अपना रुख तीर्थो की और किया है । क्योंकि वर्तमान काल में महानगरों की अपेक्षा तीर्थ भूमि ही ज्यादा सुरक्षित है ।

इन्होने लिये लाभ- चातुर्मास प्रवेश के अवसर पर चल समारोह से पूर्व नास्ता नवकारसी व स्वामीभक्ति का लाभ झाबुआ निवासी श्री संतोषकुमार रखबचंदजी देवड़ा नाकोड़ा परिवार द्वारा लिया गया । आचार्यश्री की प्रवचन पीठिका पर गहुंली करने का लाभ श्री बाबुलालजी धनराजजी डोडियागांधी परिवार व आचार्यश्री की गुरु चरण पूजा का लाभ जयंतिलाल बाबुलालजी दख भाण्डुप एवं आचार्यश्री को चातुर्मासिक कामली ओढाने का लाभ श्री आनन्दकुमार ताराचंदजी परमार सुमेरपुर वालों को प्राप्त हुआ । इसी कड़ी में आचार्यश्री के श्री मोहनखेड़ा तीर्थ चातुर्मास 2020 में श्रावण मास की स्वामीभक्ति श्री संतोषकुमार नाकोड़ा झाबुआ व शौकिन नीमच, आसोज मास का लाभ श्री राजगुरु गारमेंटस श्री विकास हड़मता जी राठौर मुम्बई व श्री विपुल चम्पालालजी वाणीगोता पुना, कार्तिक मास का लाभ श्री बाबुलाल धनराजजी डोडियागांधी परिवार को प्राप्त हुआ । ट्रस्ट मण्डल की और से सभी लाभार्थीयों का बहुमान ट्रस्टीगणों द्वारा किया गया । कार्यक्रम का संचालन हेमन्त वेदमुथा मक्सी व संगीतमय प्रस्तुति देवेश जैन मोहनखेड़ा ने दी । ट्रस्ट के महामंत्री फतेहलाल कोठारी व मेनेजिंग ट्रस्टी सुजानमल सेठ ने पधारे हुये श्रीसंघों का आभार माना ।

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