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आर्थिक मंदी में भारत महामंदी,महामारी से महा सफलता की ओर...



(प्रोफ. डॉ. दिनेश गुप्ता- आनंदश्री,आध्यात्मिक व्याख्याता और माइंडसेट गुरु)
   
  यह भविष्य वाणी की जा रही है कि 1930 के के महामंदी के बाद यह संसार सबसे बड़ी मंदी देखने वाली है। आज हम जिस रास्ते से गुजर रहे हैं शायद यह मंदी का दौर है लेकिन जब जब भी कोई मंदी आई है तब तब भी एक बहुत बड़ी संधि बहुत बड़ा अवसर लोगों के सामने आया है। 
  माना कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष आईएमएफ ने यह चेतावनी दी है कि कोरोनावायरस महामारी को देखते हुए देशों द्वारा किए गए लॉक डाउन से 2020 का साल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए काफी खराब रहने वाला है । 
यह चेतावनी भी है और भविष्यवाणी भी है।
   ध्यान देने वाली बात है कि इससे पहले भी 1930 के दशक में दुनिया में महामंदी आई थी कोरोनावायरस की वजह से पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था तबाह कर चुकी है। दुनियाभर की सरकारों ने करीब 8 करोड डॉलर की राहत पैकेज दिए हैं लेकिन यह काफी नहीं है इस माहौल में आज हम देख रहे हैं। उस माहौल के लिए काफी नहीं है ।
   दुनिया इस संकट की अवधि को लेकर असाधारण रूप से अनिश्चित है लेकिन यह पहले ही साफ हो चुका है कि 2020 में वैश्विक वृद्धि दर में जोरदार गिरावट आएगी और यह भी अनुमान  है कि  आज से 90 साल पहले जो महामंदी आई थी 1930 में के बारे सबसे बड़ी गिरावट हम बाजार में देखेंगे। आज यह संसार एक ऐसे संकट को जूझ रहा है जो उसने पहले कभी नहीं देखा।  कोरोना ने  हमारी आर्थिक और सामाजिक स्थिति को काफी तेजी से खराब किया है और कर रही है। सबसे बड़ी मार उभरते हुए देशों और विकासशील देशों में ज्यादा पहुंची है। उन्हें अब सैकड़ों अरब डॉलर की विदेशी सहायता की जरूरत पड़ेगी। 
  कुछ सप्ताह पहले सब कुछ सामान्य था।बच्चे स्कूल जा रहे थे लोग काम पर जा रहे थे कंपनियां चल रही थी। बाजार में रौनक थी। फिर धीरे धीरे धीरे सब कुछ गायब हो गया। 

मंदी से हम बाहर कैसे निकले?

  अब सवाल उठता है कि इस मंदी से हम बाहर कैसे निकले संबंधी मैं जब जब भी बाहर निकलना है तो भारत हमेशा बचा रहा और भारत का इतिहास जब हम देखते हैं तो भारत के बचने का एक ही कारण था भारत कृषि प्रधान देश है । सबकुछ कृषि पर निर्भर रहता है अगर इस बार भी भारत  मंदी से अछूता रहता है तो इसका भी कारण कृषि होगा।भविष्य में हमें कृषि के लिए ज्यादा जोर देना पड़ेगा बजाए की बड़ी-बड़ी फैक्ट्री अकाउंटेंट की जंगल बनाएं।
   स्वदेशी को अपनाएं जैसे जापान ने किया। नागासाकी हिरोशिमा के बाद सचमुच जापान " मेड इन जापान बनकर उभरा " । रूजवेल्ट की न्यू डील अर्थव्यवस्था अपनाए।

  हमें आज की तारीख में स्वयम की अर्थव्यवस्था द्वारा कृषि और उद्योग को संतुलन बनाना जरूरी है।  मजदूरी करने वाले, रोजगार देने वाली देने वाले, उपभोक्ता करने वाले के बीच संतुलन बनाना बहुत जरूरी है। और हमारा यही उद्देश्य होना चाहिए कि आंतरिक बाजार समृद्ध बने विशाल बने तभी हम अन्य देशों के साथ व्यापार कर पाएंगे।


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