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लॉक डाउन इफ़ेक्ट के 30 दिन का लेखा-जोखा जानिए प्रो.दिनेश गुप्ता से.....




(प्रोफ. डॉ. दिनेश गुप्ता- आनंदश्री आध्यात्मिक व्याख्याता एवं माइंडसेट गुरु)

  जीवन मे कभी तो एक वक्त आता है जब रुक कर हमें अपने सफर का लेखा जोखा करना होता है। कंही पॉज लेना होता है।जो  सामने चुनौतीयां है उसका अभ्यास करना होता है। अबतक हमने बाहरी तौर नही बल्कि आन्तरिक तौर पर ही ध्यान दे रहे है। 30 दिन के उपरांत जो भी हमे सूचना मिल रहे है वह यह है कि सभी हमे अपने आप पर ही "ध्यान"देने की ही दी जा रही है।

अब तक कोरोना वायरस ने  पूरी दुनिया को तहस नहस कर दिया है। लोगो की नॉकरी खतरे में है, कुछ व्यापार समाप्ति पर है, लोगो का स्वास्थ खतरे में है, जरूरत के सामान तो मिल रहे है लेकिन वह  भी कब तक पता नही, अफवाहों का बाजार गरम रहता है, बाहर रोज नए नए कानून और घटनाएं  हो रही है। सभी का नुकसान हो रहा है। लोग डरे हुए है।

  हमने 5.05 मिनिट को डॉक्टरों और सुरक्षा कर्मियों के लिए तालियां, घंटानाद किया, 9.09 मिनिट पर दिया जला कर अंधेरे को खत्म करने का आगाज़ किया। यह सभी बाहरी व्यवस्था हमने अपने अंदर की व्यवस्था को ठीक करने के लिए किया।

हमने स्थानों को तीन भागों में "कोरोना ग्रसित लोगो" के अनुसार बांट लिया। उसी तरह कोरोना भी  तीन भागों में बांट लिया गया है। हम विवश हो गए है, हमारी सहन शक्ति को चुनौती दी जा रही है।

हम क्या कर सकते है ?

  बदलाव को स्वीकार करो। अध्यात्म से जुडो। नॉकरियाँ खतरे में है लेकिन इस लॉक डाउन में अपनी खुद की खोज करे। विकास का द्वार खोजे। अपने इम्यून पावर सिस्टम का बढ़ाने का प्रयास करें। मानव और मानवता को बचाने की जिम्मेदारी हम सभी की है।जंहा सब्र, आस्था, विश्वास और श्रद्धा के द्वारा ही बचाया जा सकता है। हमे सकारात्मक रहना है, प्रकृति पर विश्वास करना है।

 सबसे बड़ा कार्य लोगो ने जो किया वह है अपने स्वयम की खोज। मैं नही जानता 3 मई के बाद लॉकडाउन खत्म होगा या नही। लेकिन तब तक अपनी खोज को इतना तेज कर दो, अपनी बुनियाद को इतना मजबूत कर दो की हम सब मिल कर नए माहौल में अपने आप को तैयार कर सके। उसका सामना कर सके। इस समीकरण को बदल कर रख देंगे।

 इस असाधारण चुनौतीयों और अनिश्चितताओं का सामना करते हुए  यह याद रखे हम भीतर से कैसे है?  भीतर क्या है? खुद की जिम्मेदारी लेने का वक्त यही है।
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