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भाजपा द्वारा हेगड़े को जारी कारण बताओ नोटिस केवल दिखावा, किसी ठोस कार्रवाई की संभावना नहीं : शोभा ओझा

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भोपाल।  मध्यप्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग की अध्यक्ष श्रीमती शोभा ओझा ने आज जारी अपने वक्तव्य में कहा कि भाजपा सांसद अनंत कुमार हेगडे़ द्वारा महात्मा गांधी की भूख हड़ताल एवं सत्याग्रह सहित पूरे स्वतंत्रता संग्राम को नाटक करार देना, दरअसल संघ व भाजपा की वह संगठित सोच है, जो उसके विभिन्न नेताओं के निंदनीय कथनों के माध्यम से समय-समय पर उजागर होती रहती है। केवल अनंत हेगड़े ही नहीं, प्रज्ञा ठाकुर, अमित शाह, कैलाश विजयवर्गीय जैसे नेता अपने बयानों और प्रधानमंत्री मोदी अपने आडंबरयुक्त आचरण से, पहले भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान करते रहे हैं।

अपने बयान में श्रीमती ओझा ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में अपने शून्य ही नहीं, बल्कि नकारात्मक योगदान की ग्लानि भावना से ग्रसित संघ के लोग आजादी के आंदोलन, गांधी जी के नेतृत्व और कांग्रेस के संघर्ष को कमतर कर के दिखाने का कोई अवसर चूकना नहीं चाहते परंतु यह संघ का शर्मनाक काला अतीत है जो सदियों तक उनका पीछा नहीं छोड़ने वाला है। 

अपने बयान में श्रीमती ओझा ने आगे कहा कि प्रज्ञा ठाकुर जैसी विवेकहीन सांसद द्वारा गोडसे के महिमामंडन और महात्मा गांधी के अपमान के बाद अगर प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा दिखावटी बयान देने की बजाय, कोई ठोस दंडात्मक कार्यवाही की गई होती तो आज हेगड़े जैसे सांसद के द्वारा ऐसी जुर्रत न की गई होती। हालिया घटना के बाद भाजपा द्वारा हेगड़े को दिया गया नोटिस भी पूरी तरह से दिखावटी कार्यवाही ही लगती है क्योंकि पहले भी भाजपा नेताओं के निम्नस्तरीय बयानों पर इसी तरह की लीपापोती की जा चुकी है। 

अपने बयान में श्रीमती ओझा ने कहा कि देश की सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ द्वारा भी जब यह कहा जा चुका है कि ‘‘महात्मा गांधी राष्ट्रपिता हैं, उनके लिये अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, अगर कोई गांधी जी के बारे में अपशब्द कहता है तो वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार खो देता है, ऐसे अपशब्द कहना आईपीसी की धारा 292 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है।’’ 

श्रीमती ओझा ने अपने बयान के अंत में कहा कि सुप्रीम कोर्ट की उक्त तल्ख टिप्पणी के बाद भी भाजपा नेताओं द्वारा गांधी जी के अपमान के उद्देश्य से लगातार दिये जा रहे बयान, न केवल न्यायालय की अवमानना हैं बल्कि संघ और भाजपा की उस वास्कविक घृणित सोच को भी उजागर कर रहे हैं जो भाजपा और संघ के शीर्ष नेतृत्व के संरक्षण में पल्लवित और पोषित होती आई है।
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