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मंत्रि-परिषद् ने अगले 5 साल के लिए करीब 10500 करोड़ रुपये की पांच किसान हितैषी योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने को दी मंजूरी

 

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 24 जनवरी को मंत्रि-परिषद् बैठक के निर्णयों के संबंध में सदन में दिया गया वक्तव्य
 
  आज की कैबिनेट किसानों को समर्पित की

  देश में पहली बार उड़द एवं सरसों की फसल का उत्पादन बढ़ाने मध्यप्रदेश सरकार ने किया नवाचार

 उड़द के उपार्जन पर एमएसपी के अतिरिक्त किसानों को देंगे 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस

 सरसों का उत्पादन 28 प्रतिशत बढ़ा, इस वर्ष 3.38 मीट्रिक टन उपार्जन की संभावना

  कल सदन में घोषणा की थी,आज कैबिनेट ने मंजूरी भी दे दी, हम जो कहते हैं,करके दिखाते हैं

 कैबिनेट ने किसान कल्याण वर्ष में किसानों को दी बड़ी सौगात

 मंत्रि-परिषद् ने अगले 5 साल के लिए करीब 10500 करोड़ रुपये की पांच किसान हितैषी योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने को दी मंजूरी

   भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वर्तमान में चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान मंगलवार को सदन में किसान कल्याण वर्ष को लेकर सरकार की कटिबद्ध मंशा और इस संबंध में की जा रही कार्यवाहियों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने सदन को अवगत कराया कि आज ही मध्यप्रदेश सरकार की मंत्रि-परिषद् की बैठक सम्पन्न हुई। किसान कल्याण वर्ष का किसानों को अधिकतम लाभ दिलाने के लिए मंत्रि-परिषद् ने आज ही किसानों एवं कृषि से सम्बद्ध क्षेत्रों के विकास के लिए कार्य करीब 10500 करोड़ रुपये की लागत के पांच किसान हितैषी योजनाओं को अगले पांच साल तक निरंतर रखने को मंजूरी दी। उन्होंने बताया कि अब यह पांच योजनाएं 31 मार्च 2031 तक जारी रहेंगी और इसका सर्वाधिक लाभ मध्यप्रदेश के किसानों को मिलेगा। 

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन में कहा कि किसान हमारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। आज की पूरी कैबिनेट हमने प्रदेश के किसानों को ही समर्पित की है। उन्होंने कहा कि देश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि मध्यप्रदेश सरकार ने दलहन फसल उड़द एवं तिलहन फसल सरसों के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उड़द को हम तय समर्थन मूल्य पर खरीदेंगे और किसानों को तय समर्थन मूल्य के अतिरिक्त खरीदी गई उड़द पर 600 रुपए प्रति क्विंटल बोनस राशि भी देंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में सरसों का उत्पादन इस वर्ष 28 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इस वर्ष 3.38 मीट्रिक टन सरसों का उत्पादन होने की संभावना है। हम सरसों की फसल को भावांतर योजना के दायरे में लेकर आ रहे हैं। 

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सदन को मंत्रि-परिषद् की बैठक में आज लिए गए सभी निर्णयों की सिलसिलेवार जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने बताया कि जिन पांच किसान हितैषी योजनाओं को 31 मार्च 2031 तक निरंतर रखने का निर्णय मंत्रि-परिषद् ने लिया है, उनमें निम्न योजनाएं शामिल हैं :

प्रधानमंत्री राष्ट्रीय किसान कृषि विकास योजना

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 2008.683 करोड़ रुपये की इस योजना की मंजूरी से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की विकास के लिए आवश्यक संसाधनों की पूर्ति राज्य सरकार के माध्यम से की जा सकेगी।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पर ड्रॉप मोर क्रॉप)

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 2393.97 करोड़ रुपये की इस योजना की मंजूरी से किसानों को अपने खेतों में स्प्रिंकलर/ड्रिप इरीगेशन सिस्टम लगाने के लिए शासकीय अनुदान 31 मार्च 2031 तक निरंतर मिलता रहेगा। इस योजना से किसान के खेतों में माइक्रो इरीगेशन सुविधाओं में अगले 5 सालों तक लगातार विस्तार होता रहेगा।

राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन योजना

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 3285.49 करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी मिलने से ऐसे किसान, जो धान, गेहूं, दलहन, मोटा अनाज, नगदी फसलों का पैदावार करते हैं, उन्हें क्षेत्र विस्तार, अपना उत्पादन बढ़ाने एवं मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने के लिए आवश्यक सहयोग राज्य सरकार के जरिए निरंतर मिलता रहेगा।

नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग

  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 1011.59 करोड़ रुपये की इस योजना की स्वीकृति से प्रदेश में प्राकृतिक खेती के क्षेत्रफल में विस्तार 31 मार्च 2031 तक निरंतर होता रहेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का विकास जरूरी है। यह न केवल मध्यप्रदेश की नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होगी, वरन् मिट्टी की उर्वरता में सुधार, उत्पादन बढ़ाने, पर्यावरण सुरक्षा एवं रसायन मुक्त खाद्य उपलब्ध कराने में भी सहायक होगी।

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन - ऑयल सीड योजना

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 1793.87 करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी मिलने से प्रदेश के ऐसे सभी किसानों को, जो तिलहन फसलों का उत्पादन करते हैं, उन्हें निरंतर लाभ प्राप्त होगा।

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि करीब 10500 करोड़ रुपए की बड़ी लागत वाली इन पांच किसान मित्र योजनाओं को अगले 5 सालों तक निरंतर रखने से किसानों के माध्यम से प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आमूल-चूल सुधार होगा। साथ ही रसायन युक्त उत्पादन से निजात पाने में भी ये 5 योजनाएं बेहद सहायक सिद्ध होंगी।
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