वन मंडल धार में वन्यजीव संरक्षण और अपराध नियंत्रण पर विशेष प्रशिक्षण,सरदारपुर में 10-11 अगस्त को दूसरा बैच






 






  धार। वन मंडल धार के क्षेत्रीय वन अमले के क्षमता संवर्धन के लिए 07 एवं 08 अगस्त 2026 को ईको सेंटर, धार में वन्यजीव संरक्षण एवं वन्यजीव अपराध नियंत्रण पर दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। वन मंडल अधिकारी धार विजयानंथम टी.आर. के मार्गदर्शन में आयोजित प्रथम बैच के प्रशिक्षण में वन परिक्षेत्र धार, मांडव एवं धामनोद के वन कर्मियों ने भाग लिया।

  प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण, वन्यजीव अपराधों की प्रभावी रोकथाम, मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन तथा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के प्रभावी क्रियान्वयन को और अधिक सुदृढ़ बनाना रहा।

  प्रशिक्षण के दौरान वन्यजीव कानून प्रवर्तन समन्वयक एवं वरिष्ठ प्रशिक्षक, मुंबई (महाराष्ट्र) संजय ठाकुर ने वन अमले को वन्यजीव अपराधों की जांच, साक्ष्य संकलन, कानून प्रवर्तन तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की परिस्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण दिया।

  इसके साथ ही वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कानूनी प्रावधानों, आधुनिक तकनीकी संसाधनों तथा क्षेत्र में वन्यजीव अपराध नियंत्रण के व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी भी दी गई। प्रशिक्षण के माध्यम से वन कर्मियों को वन्यजीव अपराधों की पहचान, जांच प्रक्रिया और आवश्यक कार्रवाई से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां प्रदान की गईं।

 वन मंडल धार द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम का दूसरा बैच 10 एवं 11 अगस्त 2026 को वन परिक्षेत्र सरदारपुर में आयोजित किया जाएगा। इसमें वन मंडल के शेष चार वन परिक्षेत्रों के वन अमले को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

 कार्यक्रम के दौरान वन मंडल अधिकारी धार विजयानंथम टी.आर., उप वन मंडल अधिकारी धार सुरेश बरोले, वन परिक्षेत्र अधिकारी धार प्रभुराम मुझाला सहित वन परिक्षेत्र धार, मांडव एवं धामनोद के वनकर्मी उपस्थित रहे।

 वन मंडल अधिकारी विजयानंथम टी.आर. ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्रीय वन अमले को नवीनतम तकनीकी ज्ञान, कानूनी प्रावधानों और व्यावहारिक कौशल से सशक्त बनाना है। इससे वन्यजीव संरक्षण, वन अपराध नियंत्रण और मानव-वन्यजीव संघर्ष प्रबंधन से जुड़े कार्यों को अधिक प्रभावी और त्वरित तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी।

  उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से वन अमले की कार्यक्षमता, आपसी समन्वय और कानून प्रवर्तन की प्रभावशीलता बढ़ेगी। साथ ही वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।