मध्यप्रदेश कैबिनेट के बड़े फैसले: 41 हजार करोड़ से अधिक की मंजूरी,3 नए टेक्नोलॉजी विश्वविद्यालय




 


 भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मध्यप्रदेश मंत्रि-परिषद की बैठक में प्रदेश के विकास, बुनियादी ढांचे, ग्रामीण रोजगार, डेयरी, सड़क, स्वास्थ्य, तकनीकी शिक्षा और किसानों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

 मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक के वित्तीय प्रस्तावों और विभिन्न जनकल्याणकारी निर्णयों को स्वीकृति दी। बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों के लिए वीबी जी राम जी योजना के लिए 29 हजार 619 करोड़ रुपये, डेयरी विकास और सांची ब्रांड के उन्नयन के लिए 2 हजार 973 करोड़ रुपये, पश्चिम भोपाल बायपास के लिए 3 हजार 774 करोड़ रुपये तथा मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग के लिए 3 हजार 272 करोड़ रुपये की मंजूरी प्रमुख रही।

 इसके साथ ही राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पुनर्गठन के बाद भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन नए प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया।

वीबी जी राम जी योजना के लिए 29 हजार 619 करोड़ रुपये का अनुसमर्थन

 मंत्रि-परिषद ने 'विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण): वीबी जी राम जी योजना मध्यप्रदेश' के क्रियान्वयन और इसे 1 जुलाई 2026 से प्रभावी किए जाने का अनुसमर्थन किया।

 योजना के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में अनुमानित लागत 3,183 करोड़ रुपये है। वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक योजना को जारी रखने के लिए कुल अनुमानित लागत 26,436 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रस्ताव का भी अनुसमर्थन किया गया।

 योजना में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 60:40 के अनुपात में होगी। इसमें राज्यांश 10 हजार 574 करोड़ रुपये रहेगा। पांच वर्षों में प्रशासनिक व्यय के लिए 946 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिसका वहन राज्य शासन करेगा।

 नई व्यवस्था के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों के इच्छुक वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में अब 100 दिन के स्थान पर 125 दिनों के श्रम आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी मिलेगी।

 योजना का एक प्रमुख उद्देश्य 'विकसित भारत @2047' के दृष्टिकोण के अनुरूप ग्रामीण बुनियादी ढांचे को विकसित करना है। इसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत जीआईएस आधारित तकनीक, पीएम गति शक्ति लेयर्स और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करते हुए 'विकसित ग्राम पंचायत योजना' तैयार करेगी।

 इन योजनाओं को डिजिटल पोर्टल के माध्यम से 'विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक' में शामिल किया जाएगा।

 जल सुरक्षा, जलवायु-अनुकूल इंजीनियरिंग, डेटा साइंस और आधुनिक आजीविका मॉडल से जुड़े तकनीकी कार्यों के लिए मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद में राज्य स्तर पर एक समर्पित परियोजना प्रबंधन इकाई स्थापित की जाएगी।

 वित्तीय आवंटन को पारदर्शी और जरूरत के आधार पर करने के लिए ग्राम पंचायतों को विकास मानदंड के अनुसार क, ख और ग श्रेणी में वर्गीकृत किया जाएगा।

 योजना में पारदर्शिता के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति, डिजिटल मस्टर रोल और प्रत्येक छह माह में सामाजिक अंकेक्षण अनिवार्य किया गया है। शिकायतों के त्वरित निराकरण के लिए प्रत्येक जिले में लोकपाल की नियुक्ति की जाएगी।

 नई परिषद के पूर्ण गठन और पंजीकरण तक वर्तमान मध्यप्रदेश राज्य रोजगार गारंटी परिषद को ही नई योजना से जुड़े दायित्वों के निर्वहन के लिए अधिकृत किया गया है।

डेयरी विकास और सांची ब्रांड के लिए 2,973 करोड़ रुपये

 प्रदेश के दुग्ध उत्पादकों के हित में सहकारी प्रणाली को मजबूत करने और सांची ब्रांड के उन्नयन के लिए मंत्रि-परिषद ने 2 हजार 973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना को मंजूरी दी।

 योजना के तहत अगले पांच वर्षों में सहकारी दुग्ध समितियों का विस्तार 7,331 गांवों से बढ़ाकर 26,000 गांवों तक किया जाएगा।

 दुग्ध संकलन क्षमता को 12 लाख किलोग्राम प्रतिदिन से बढ़ाकर 52 लाख किलोग्राम प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं दूध प्रसंस्करण क्षमता 17.8 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 63.3 लाख लीटर प्रतिदिन की जाएगी।

 सांची के दूध पैकेट की बिक्री को 7 लाख लीटर प्रतिदिन से बढ़ाकर 35 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य है। इसके साथ ही कृत्रिम गर्भाधान कवरेज को 15 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत किया जाएगा।

 एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड, संबद्ध दुग्ध संघों और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के बीच सहयोग के लिए 13 अप्रैल 2025 को कोलेबोरेशन एग्रीमेंट किया गया था। इसी के तहत राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की ओर से प्रस्तुत 2,973 करोड़ रुपये की डेयरी विकास योजना को सैद्धांतिक सहमति दी गई है।

  राज्य शासन द्वारा अधोसंरचना के लिए 500 करोड़ रुपये का अनुदान तथा भारत सरकार की योजनाओं के अनुसार अनुमानित 241 करोड़ रुपये के राज्यांश सहित विभिन्न घटकों के क्रियान्वयन को मंजूरी दी गई है।

पश्चिम भोपाल बायपास के लिए 3,774 करोड़ रुपये की पुनरीक्षित स्वीकृति

 मंत्रि-परिषद ने 35.61 किलोमीटर लंबे पश्चिम भोपाल बायपास को 4-लेन और पेव्ड शोल्डर के साथ बनाने के लिए हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल के तहत कुल परियोजना वित्तीय लागत 3,225 करोड़ 51 लाख रुपये की पुनरीक्षित स्वीकृति दी।

 इसके अलावा निर्माण पूर्व कार्यों के लिए 548 करोड़ 29 लाख रुपये का भुगतान राज्य बजट से किए जाने को भी मंजूरी दी गई।

 पश्चिम भोपाल बायपास बनने के बाद जबलपुर और नर्मदापुरम की ओर से इंदौर आने-जाने वाले वाहनों को भोपाल शहर से होकर गुजरने की आवश्यकता नहीं होगी। इससे करीब 21 किलोमीटर की दूरी कम होने की बात कही गई है।

 इस परियोजना के लिए पूर्व में 4 सितंबर 2023 को 40.90 किलोमीटर लंबाई के लिए 2,981 करोड़ 65 लाख रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी।

 बाद में क्षेत्र में रातापानी टाइगर रिजर्व घोषित होने, बड़े तालाब के कैचमेंट क्षेत्र से जुड़े पर्यावरण विभाग के नोटिफिकेशन, राज्य पुरातत्व विभाग के प्राचीन शिव मंदिर समसगढ़ तथा पश्चिम भोपाल बायपास को पूर्वी बायपास से जोड़कर रिंग रोड बनाने की योजना के कारण रेखांकन में बदलाव किया गया।

 रेखांकन में बदलाव के चलते परियोजना लागत में पूर्व स्वीकृति की तुलना में 8.18 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी वजह से मंत्रि-परिषद से पुनरीक्षित प्रशासनिक स्वीकृति ली गई।

 परियोजना निर्माण लागत की 40 प्रतिशत राशि 599 करोड़ 44 लाख रुपये कंसेशन अनुबंध में निर्धारित माइलस्टोन पूरे होने पर 10 किस्तों में दी जाएगी। नेट पॉजिटिव सीओएस की राशि का भुगतान भी अनुबंध के प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।

 शेष 60 प्रतिशत राशि 1,910 करोड़ 42 लाख रुपये का भुगतान संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छमाही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट से किया जाएगा। इसमें एन्यूटी, ओएंडएम और ब्याज शामिल होंगे।

आरजीपीवी के पुनर्गठन से भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में तीन नए विश्वविद्यालय

 तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने और प्रदेश में क्षेत्रीय संतुलन स्थापित करने के लिए वर्तमान राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी), भोपाल के स्थान पर तीन अलग-अलग प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय स्थापित करने की स्वीकृति दी गई है।

 इन विश्वविद्यालयों की स्थापना भोपाल, उज्जैन और जबलपुर में होगी।

 भोपाल स्थित वर्तमान विश्वविद्यालय को 'मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय', उज्जैन के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को 'मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' और जबलपुर के स्वशासी इंजीनियरिंग कॉलेज को 'महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय' के रूप में स्थापित किया जाएगा।

 वर्तमान में आरजीपीवी के अंतर्गत 13 पाठ्यक्रम, 585 संस्थाएं और 3 लाख 83 हजार से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।

 नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के तकनीकी महाविद्यालयों को संभागवार तीन विश्वविद्यालयों के क्षेत्राधिकार में बांटा गया है।

 मध्य भारत प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, भोपाल के अंतर्गत भोपाल, नर्मदापुरम, चंबल और ग्वालियर संभाग होंगे।

 मालवा प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, उज्जैन के अंतर्गत उज्जैन और इंदौर संभाग रहेंगे।

 महाकौशल प्रौद्योगिकी एवं कौशल विश्वविद्यालय, जबलपुर के अंतर्गत जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभागों के तकनीकी संस्थान शामिल किए जाएंगे।

तीनों विश्वविद्यालयों के संचालन के लिए अलग-अलग अधिनियम लागू किए जाएंगे।

 उज्जैन और जबलपुर में स्थापित होने वाले दोनों विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक संचालन के लिए प्रारंभिक तौर पर कुलगुरु, कुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, उप कुलसचिव और वित्त अधिकारी के पदों को मंजूरी दी गई है। अन्य सहायक एवं तकनीकी पदों को नियमानुसार आउटसोर्स किया जाएगा।

 इन पदों के वेतन का भुगतान प्रारंभिक स्तर पर विश्वविद्यालय की उपलब्ध राशि से किया जाएगा। दोनों संस्थानों को स्व-वित्तीय आधार पर संचालित किया जाएगा।

 तीनों विश्वविद्यालयों की स्थापना और आगे की कार्यवाही को गति देने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 'मध्यप्रदेश प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय साधिकार समिति' गठित करने को भी मंजूरी दी गई है।

मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग के लिए 3,272 करोड़ रुपये

 मंत्रि-परिषद ने 67.116 किलोमीटर लंबे मेहलुआ-बीना-खिमलासा-मालथौन मार्ग को 4-लेन और पेव्ड शोल्डर के साथ हाईब्रिड एन्यूटी मॉडल पर बनाने के लिए कुल 2,776 करोड़ 83 लाख रुपये की परियोजना वित्तीय लागत को प्रशासनिक स्वीकृति दी है।

 निर्माण पूर्व कार्यों, जिसमें भू-अर्जन और अन्य कार्य शामिल हैं, के लिए 428 करोड़ 94 लाख रुपये तथा सुपरविजन चार्ज के लिए 65 करोड़ 77 लाख रुपये का भुगतान राज्य बजट से किए जाने को मंजूरी दी गई।

 परियोजना की निर्माण लागत 1,151 करोड़ रुपये है। निर्माण लागत की 40 प्रतिशत राशि 543 करोड़ 27 लाख रुपये निर्माण अवधि में मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा लिए जा रहे ऋण के माध्यम से भुगतान की जाएगी।

 शेष 60 प्रतिशत राशि 1,738 करोड़ 85 लाख रुपये का भुगतान संचालन अवधि में 15 वर्षों तक छमाही एन्यूटी के रूप में राज्य बजट से किया जाएगा।

 प्रस्तावित मार्ग एनएच-346 विदिशा-चंदेरी मार्ग पर मेहलुआ चौराहे से शुरू होकर बीना में एनएच-934 हीरापुर-बीना को क्रॉस करते हुए मालथौन में एनएच-44 नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर से जुड़ेगा।

 बीना क्षेत्र में बीपीसीएल रिफाइनरी, थर्मल पावर प्लांट, रेलवे यार्ड और अन्य प्रमुख उद्योग होने के कारण इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही अधिक है। प्रस्तावित सड़क क्षेत्रीय, अंतरराज्यीय और औद्योगिक यातायात के लिए महत्वपूर्ण मानी गई है।

स्वास्थ्य संस्थाओं में मशीन और उपकरणों के रखरखाव के लिए 488 करोड़

 मंत्रि-परिषद ने प्रदेश की स्वास्थ्य संस्थाओं में मशीनों और उपकरणों के रखरखाव से संबंधित योजना को 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने के लिए 488 करोड़ 41 लाख रुपये की स्वीकृति दी है।

 इस राशि से चिकित्सा संस्थानों में उपलब्ध मशीनों और उपकरणों के रखरखाव, मरम्मत तथा संबंधित कार्य किए जाएंगे।

चिकित्सा संस्थानों की परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए 916 करोड़

 चिकित्सा संस्थानों की विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण से संबंधित योजना को भी 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी गई है।

 इसके लिए 915 करोड़ 77 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस योजना के अंतर्गत चिकित्सा संस्थानों में मॉड्यूलर किचन, मॉड्यूलर ओटी सहित अन्य विभागीय परिसंपत्तियों के मरम्मत एवं संधारण कार्य किए जाएंगे।

मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा में सामाजिक न्याय विभाग के लिए 21 पद

 नवगठित मैहर, मऊगंज और पांढुर्णा जिलों में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के जिला कार्यालय संचालित करने के लिए 21 पदों की स्वीकृति दी गई है।

प्रत्येक जिले में उप संचालक का एक पद, सहायक वर्ग-2 का एक पद और सहायक वर्ग-3 के तीन पद सहित कुल 15 नवीन नियमित पद सृजित किए जाएंगे।

इसके अलावा प्रत्येक जिले में चतुर्थ श्रेणी के दो-दो मानव संसाधन आउटसोर्सिंग के माध्यम से रखे जाएंगे। इस तरह तीनों जिलों के लिए कुल 6 आउटसोर्स मानव संसाधन की व्यवस्था होगी।

चार जिलों में जिला आयुष कार्यालयों के लिए 20 पद

 मंत्रि-परिषद ने निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर में जिला आयुष कार्यालयों के संचालन के लिए कुल 20 पदों के सृजन को मंजूरी दी है।

 चारों जिला कार्यालयों में जिला आयुष अधिकारी के चार पद, सहायक ग्रेड-1 एवं मुख्य लिपिक के चार पद, लेखापाल के चार पद और सहायक ग्रेड-2 के चार पद स्वीकृत किए गए हैं।

इन पदों के माध्यम से नवगठित जिलों में आयुष विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था को संचालित किया जाएगा।

किसानों से मूंग की 60 प्रतिशत तक उपज खरीदी का निर्णय बरकरार

 मंत्रि-परिषद ने रबी विपणन वर्ष 2026 में मूंग और उड़द की खरीदी को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 1 जुलाई 2026 से किए गए निर्णय का अनुसमर्थन किया।

 रबी वर्ष 2025-26 और विपणन वर्ष 2026-27 में प्राइस सपोर्ट स्कीम के तहत ग्रीष्मकालीन मूंग की खरीदी के लिए 24 फरवरी 2026 के मंत्रि-परिषद के आदेश में पंजीकृत किसानों से उनकी उपज का 25 प्रतिशत उत्पादन तक खरीदी का निर्णय था।

 बाद में इसमें आंशिक संशोधन करते हुए पंजीकृत किसानों से उनकी मूंग उपज का 60 प्रतिशत तक उपार्जन किए जाने का निर्णय लिया गया। मंत्रि-परिषद ने इस निर्णय का अनुसमर्थन किया है।