इंदौर में वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस का शुभारंभ,CJI सूर्यकांत बोले- पीड़ित की पीड़ा उसकी भाषा में समझना जरूरी

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 इंदौर। भारत के मुख्य न्यायाधीश और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के प्रमुख संरक्षक न्यायमूर्ति सूर्यकांत तथा मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस 'Enhancing Access to Justice' का शुभारंभ किया। सम्मेलन 9 अगस्त तक चलेगा।

 राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली, मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर और मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच को आसान, सुलभ, शीघ्र और मानवीय बनाना है।

 सम्मेलन की थीम 'एकजुट आवाज, सशक्त भविष्य : संवाद, गरिमा और समावेशन के माध्यम से न्याय तक पहुंच' रखी गई है। उद्घाटन अवसर पर मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया।

  CJI सूर्यकांत ने कहा कि न्याय की पहुंच केवल कानून और न्यायालयों तक सीमित नहीं हो सकती। इसके लिए संवाद आवश्यक है। किसी पीड़ित को न्याय मिलने से पहले यह विश्वास होना जरूरी है कि उसकी समस्या और उसकी पीड़ा को कोई सुन रहा है।

  उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति की समस्या अलग हो सकती है, इसलिए हर समस्या का समाधान भी एक जैसा नहीं हो सकता। स्थानीय परिस्थितियों और समस्या की प्रकृति को समझकर समाधान तलाशना जरूरी है। किसी पीड़ित के दुख-दर्द को उसकी अपनी भाषा में और अंतर्मन से समझना न्याय प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बना सकता है।

 न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि न्याय व्यवस्था में गरिमा, समानता और समावेशन केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि विधिक सहायता की वास्तविक भावना हैं। गरीब, आर्थिक रूप से कमजोर, महिलाएं, बच्चे और वंचित वर्ग न्याय से वंचित न रहें, यह सुनिश्चित करना सभी की जिम्मेदारी है।

  उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम छोर तक न्याय पहुंचाना ही वास्तविक समानता है। हमारी परीक्षा केवल उन लोगों तक न्याय पहुंचाने में नहीं है जो हमारे पास आए हैं, बल्कि यह भी है कि जो व्यक्ति न्याय पाने के लिए हमारे पास नहीं पहुंच सका, हम उस तक कैसे पहुंचें।

  CJI ने पैरा लीगल वॉलेंटियर्स की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि वे समाज के सबसे करीब रहकर जरूरतमंद लोगों को विधिक सहायता उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने पैरा लीगल वॉलेंटियर्स से वंचित और जरूरतमंद लोगों को उनके अधिकारों और पात्र लाभों तक पहुंचाने के लिए समर्पित होकर काम करने का आह्वान किया।

न्याय व्यवस्था की आत्मा हैं संवाद और संवेदनशीलता : CM मोहन यादव

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि न्याय पाना प्रत्येक व्यक्ति का प्राथमिक और मानवीय अधिकार है। न्याय व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो सभी के लिए सहज, सुलभ, शीघ्र, सस्ती, समदर्शी और मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण हो।

  मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के प्रत्येक पीड़ित व्यक्ति या समुदाय को न्याय व्यवस्था तक पहुंचाना और उसे न्याय दिलाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने मध्यस्थता को विवादों के समाधान का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि छोटे-छोटे मामलों का आपसी संवाद और सहमति से समाधान होने से न्यायालयों में लंबित मामलों को कम करने में मदद मिल सकती है।

  डॉ. यादव ने भारतीय न्याय परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि पंच परमेश्वर की परंपरा में संवाद और समझाइश के माध्यम से विवादों के समाधान की व्यवस्था रही है। भारतीय संविधान ने भी न्याय, स्वतंत्रता और बंधुत्व को लोकतांत्रिक व्यवस्था का आधार बनाया है।

मध्यप्रदेश में 4 नए फास्ट ट्रैक कोर्ट शुरू

  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि युवा पीढ़ी से जुड़े पेपर लीक और धोखाधड़ी जैसे मामलों के तेजी से निराकरण के लिए मध्यप्रदेश में चार फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए गए हैं।

  उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय जबलपुर के सहयोग से इंदौर,भोपाल,ग्वालियर और जबलपुर में 24 घंटे के भीतर फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य मामलों का तेजी से निराकरण और लोगों को समय पर न्याय उपलब्ध कराना है।

 उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में साइबर सुरक्षा,ई-जीरो एफआईआर,राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली और स्मार्ट पुलिसिंग जैसी तकनीकी व्यवस्थाओं के माध्यम से पुलिस प्रणाली को आधुनिक बनाया जा रहा है।

NALSA की योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल गाइड का विमोचन

 वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस के दौरान राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण की शिक्षा स्कीम और NALSA के थीम सॉन्ग को इंडियन साइन लैंग्वेज में लॉन्च किया गया।

 इसके साथ ही NALSA की योजनाओं के हिंदी संस्करण और ब्रेल लिपि में तैयार गाइड का विमोचन किया गया। इन पहलों का उद्देश्य दिव्यांगजनों और विभिन्न भाषाई वर्गों तक विधिक सेवाओं की जानकारी को अधिक आसानी से पहुंचाना है।

जस्टिस टू चिल्ड्रन लिटिगेशन फेलोशिप प्रोग्राम शुरू

  सम्मेलन में 'Justice to Children Litigation Fellowship Program' का शुभारंभ किया गया। इसके साथ ही मध्यस्थता पर 'विवाद से सहमति की ओर' सर्टिफिकेट कोर्स भी शुरू किया गया।

  सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने कहा कि साइन लैंग्वेज में NALSA का थीम सॉन्ग और ब्रेल लिपि में गाइड न्याय तक पहुंच को अधिक समावेशी बनाने में मदद करेंगे।

 उन्होंने कहा कि मध्यस्थता के माध्यम से परिवार, पड़ोसी और साझेदारी से जुड़े विवादों का संवाद और सहमति के आधार पर समाधान किया जा सकता है। इसमें किसी पक्ष पर समाधान थोपने के बजाय सहमति से विवाद का हल निकालने का प्रयास किया जाता है।

न्याय के स्वर पुस्तक का विमोचन

  केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल सहित अन्य न्यायमूर्तियों ने सम्मेलन में आयोजकों द्वारा तैयार की गई 'न्याय के स्वर' पुस्तक का विमोचन किया।

  केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था में न्याय केवल न्यायालयों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक इसकी पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है।

 उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 39A में आर्थिक और सामाजिक स्थिति के कारण किसी व्यक्ति को न्याय से वंचित न होने देने तथा निःशुल्क विधिक सहायता उपलब्ध कराने की भावना निहित है। उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से न्याय व्यवस्था को अधिक सरल और नागरिक केंद्रित बनाने में सहायता मिल रही है।

AI और तकनीक से न्याय व्यवस्था में आ रही सरलता

  केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मोबाइल एप्लीकेशन जैसी तकनीकों का उपयोग विधिक सेवाओं को अधिक लोगों तक पहुंचाने में किया जा रहा है। बहुभाषीय तकनीक के माध्यम से लोगों को अपनी भाषा में कानूनी जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम हो रहा है।

  सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि न्याय केवल कानूनों और न्यायालयों की व्यवस्था से सुनिश्चित नहीं होता, बल्कि लोगों के भीतर यह विश्वास होना भी जरूरी है कि कठिन परिस्थिति में उन्हें सहायता और समाधान मिलेगा।

 उन्होंने न्याय व्यवस्था में संवाद, सम्मान और समानता को मजबूत करने की आवश्यकता बताई और मध्यस्थता को मामलों के समाधान का प्रभावी माध्यम बताया।

न्याय तक पहुंच संवैधानिक अधिकार : MP हाईकोर्ट

  मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रुसिया ने कहा कि 'Access to Justice' केवल संवैधानिक सोच नहीं बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है। समानता को चैरिटी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है।

 उन्होंने कहा कि विधिक सेवाओं को न्यायालयों तक सीमित न रखते हुए समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक सरल, सहज और सम्मानजनक तरीके से पहुंचाना जरूरी है। लोक अदालतों, कारागार सुधार, जनजातीय क्षेत्रों तक विधिक सेवाओं के विस्तार और मध्यस्थता के माध्यम से विवादों के समाधान की दिशा में किए जा रहे प्रयासों का भी उन्होंने उल्लेख किया।

 सम्मेलन में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति विजय विश्नोई, न्यायमूर्ति आलोक आराधे, न्यायमूर्ति शील नागु, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, गुजरात उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल, मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल सहित विभिन्न उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, विधिक सेवा प्राधिकरणों के वरिष्ठ पदाधिकारी, न्यायिक अधिकारी, इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव, पैरा लीगल वॉलेंटियर्स और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।

 दो दिवसीय वेस्ट जोन रीजनल कॉन्फ्रेंस 9 अगस्त तक चलेगी। सम्मेलन में न्याय तक पहुंच को अधिक प्रभावी, समावेशी और मानवीय बनाने के लिए विभिन्न विषयों पर चर्चा की जा रही है।